बेंगलुरू। दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरू की सड़कों पर फीफा के पोस्टर बैनर लहरा रहे हैं। लोगों में अपनी टीम के बारे में जानने की ललक बढ़ती जा रही है। रात में मैच देखना है लिहाजा दिन में आराम कर लें, आखिर फुटबॉल का महासमर जो शुरू हो रहा है। जरा सोचिए भारतीय टीम के शिरकत न करने के बावजूद यहां के लोगों में उत्साह कूट-कूट कर भरा हुआ है। वो इसलिए क्योंकि फुटबॉल खेल है जोश और जुनून का।
इस बार इस महासमर में 32 टीमें भाग ले रही हैं। सभी टीमें पूरे दमखम के साथ उतरेंगी। इस बार ब्राजील व अर्जेंटीना पर लोगों की खास निगाहे हैं। साथ में है इटली, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी जैसी दिग्गज टीमों का मनोबल चरम पर है। इस टूर्नामेंट की खासियत यह है कि यहां हर खिलाड़ी जान लड़ाने के लिए तैयार है। यही नहीं करोड़ों लोग अपने-अपने देशों का मनोबल बढ़ाने के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंचे हैं।
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यहां जीत उसी की होगी जो अच्छा खेलेगा। कौन सी टीम किस देश की है, यहां यह मायने नहीं रखता। जिसका गोल होगा वही जीतेगा। प्रतिभा के इस मंच में कई बड़े देशों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। जबकि कई छोटे देश महज एक जीत पर भी खुशी से लबालब हो जाते हैं। यहां ऐसे देश भी हैं, जहां सुविधाओं के नाम पर खिलाडि़यों के लिए कुछ नहीं है। उनमें पराग्वे, आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया और घाना प्रमुख हैं। अपनी प्रतिभा के दम पर यहां तक पहुंची ये टीमें कई बार टर्निंग प्वाइंट का काम करती हैं। ये टीमें फ्रांस और ब्राजील तक को हराने का दम रखती हैं।
भारत की बात करें तो स्कूलों में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल ही है। यही कारण है कि युवा वर्ग इस खेल से सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है। आलम
यह है कि स्कूलों में छात्र एक दूसरे से बेट लगा रहे हैं। फुटबॉल प्रेमी छात्रों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इस साल फीफा का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब स्कूल में कोई इम्तहान नहीं कोई टेस्ट नहीं है।