मुरलीधरन ने 800 विकेटों के साथ टेस्ट क्रिकेट को कहा अलविदा (लीड-1)
अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच में खेलते हुए मुरली ने गॉल अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में गुरुवार को भारत के प्रज्ञान ओझा का विकेट लेने के साथ यह मील का पत्थर स्थापित किया।
मुरली ने गॉल टेस्ट में 191 रन पर कुल आठ विकेट झटके। यह एक महान गेंदबाज के 18 वर्ष पुराने क्रिकेट करियर का शानदार समापन था। इस मुकाम पर उनके अलावा और कोई गेंदबाज नहीं पहुंच सका है। मुरलीधरन विश्व के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 1000 से अधिक विकेट लिए हैं। उन्होंने 133 टेस्ट मैचों में अब तक कुल 800 विकेट झटके हैं जबकि 337 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 515 विकेट दर्ज हैं।
28 अगस्त 1992 को आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में अपने करियर का पहला टेस्ट मैच खेलने वाले मुरली ने टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 67 बार पारी में पांच और 22 बार मैच में दस विकेट झटके हैं। इसके अलावा 11 ट्वेंटी-20 मैचों में उन्होंने 13 विकेट झटके हैं। मुरली के नाम कुल 1328 विकेट हैं।
मुरली ने मई 2004 में वेस्टइंडीज के कोर्टन वाल्श का 519 विकेटों का विश्व रिकार्ड ध्वस्त किया था। लंबे समय तक आस्ट्रेलिया के शेन वार्न उनके प्रतिद्वंद्वी बने रहे लेकिन दिसंबर 2007 में उनके संन्यास के साथ मुरली सर्वाधिक विकेट लेने की दौड़ में अकेले धावक रह गए।
इस महान अवसर का गवाह बनने के लिए गॉल स्टेडियम में मुरली का पूरा परिवार मौजूद था। उनकी मां, पत्नी माधीमालार, पुत्र नरेन और उनके सभी भाइयों ने इस शानदार पल का लुत्फ उठाया। इसके अलावा उनके हजारों प्रशंसकों ने भी इस महान क्षण को जमकर जिया। मुरली के इस रिकार्ड के इंतजार में गॉल स्टेडियम खचाखच भर गया था।
प्रज्ञान ओझा और ईशांत शर्मा की संघर्षपूर्ण पारियों के आगे एक समय मुरली निराश होते दिखे थे लेकिन फिर उनके अंदर का महान क्रिकेटर जग गया और उन्होंने वह गेंद फेंकी, जिसका सभी को इंतजार था। मुरली ने ओझा को पहले स्लिप में माहेला जयवर्धने के हाथों कैच कराया और इतिहास में अमर हो गए। मुरली के साथ ओझा और जयवर्धने भी अमर हो गए। यही नहीं, गॉल टेस्ट भी सदा के लिए अमर हो गया।
इतिहास बनाने के बाद मुरली को उनके साथियों ने घेर लिया। सबने उन्हें गले लगाकर बधाई दी। मैदान से पेवेलियन की ओर लौटते वक्त उनके दो साथियों ने उन्हें कंधों पर उठा रखा था और मुरली ने वह गेंद ऊपर उठा रखी थी, जिससे उन्होंने इतिहास कायम किया था।
वर्ष 1992 में जब मुरली ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला टेस्ट खेला था और पहले विकेट के रूप में क्रेग मैक्डरमॉट को आउट किया था, तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन वह विश्व क्रिकेट में गेंदबाजी से जुड़ी सभी रिकार्ड अपने नाम करेंगे।
तीन वर्ष के बाद जब मुरली आस्ट्रेलिया दौरे पर गए तब उन्हें चकर करार दिया गया और तभी से उनके करियर में विवादों का दौर शुरू हो गया। अंपायर डरेल हेयर के उस फैसले ने मुरली को कितनी बार बॉयोमैकेनेनिकल टेस्ट से गुजरने पर मजबूर कर दिया।
मुरली की विवादास्पद गेंद 'दूसरा' ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी। उन्हें चकर कहा गया और फिर कई बार उनके एक्शन पर अंगुली उठाई गई लेकिन मुरली ने हार नहीं मानी। हर बार अपने आलोचकों को गलत साबित करते हुए वह मैदान में लौटे और विकेट चटकाने का सिलसिला जारी रखा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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