FIFA U-17 Match Preview: डेब्यू मैच में जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी टीम इंडिया, मजबूत है अमेरिका
नई दिल्ली। फीफा के किसी टूर्नामेंट के आयोजन का भारत का सपना शुक्रवार को पूरा हो जाएगा। दरअसल पहली बार फीफा अंडर-17 वर्ल्डकप का आयोजन भारत में हो रहा है। आबादी के लिहाज से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश के लोगों की ढेरों उम्मीदों और आकांक्षाओं के बीच भारतीय टीम फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्वकप में खेलने उतरेगी। गौरतलब है कि ये भारत का फीफा के किसी टूर्नामेंट में डेब्यू है। अपने पहले ही मैच में भारत की निगाहें जीत से शुरुआत करने पर होंगी। भारत का पहला ही मुकाबला अमेरिका जैसी मजबूत टीम के साथ है।
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सबसे मजबूत ग्रुप में है डेब्यू वाली टीम इंडिया
ऐसे में भारत अपने पहले मैच में बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। भारत की जमीन पर पहली बार हो रहे फीफा टूर्नामेंट में दुनिया के 24 देश हिस्सा ले रहे हैं, जो छह से 28 अक्टूबर तक चलेगा। यह पहला मौका है जब भारत किसी भी वर्ग के फीफा विश्वकप फाइनल्स में हिस्सा ले रहा है। हालांकि भारत को मेजबान होने का फायदा मिला है। दरअसल भारत टूर्नामेंट में सीधे क्वालीफिकेशन मिला है। लेकिन भारत जिस ग्रुप में है वो अपने आप में सबसे मजबूत ग्रुप माना जाता है। भारत के ग्रुप में ही दो बार की चैंपियन घाना जैसी टीम है। ऐसे में भारत को ग्रुप की सबसे कमतर टीम आंका जा रहा है। लेकिन कोच लुइस नॉर्टन डे मातोस ने खिलाड़ियों को शानदार तरीके से ऑर्गानइज्ड कर रखा है। खिलाड़ियों के हौसले बुलंद हैं।

कड़े अभ्यास के साथ मैदान पर उतर रही है टीम इंडिया
टीम पूरी तैयारी और कड़े अभ्यास के बाद विश्वकप में उतर रही है, जहां दुनिया की 24 दिग्गज टीमें खिताब के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। भारत इस टूर्नामेंट में निश्चित ही खिताब के दावेदार या मजबूत टीम के तौर पर शामिल नहीं है लेकिन 'ब्लू कब्स' के नाम से जाने जानी वाली अंडरडॉग भारतीय टीम घरेलू मैदान और घरेलू परिस्थितियों में बड़ा उलटफेर कर सकती है। खुद टीम के कोच मातोस ने खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की छूट दे रखी है। मतोस का कहना है कि टीम के खिलाड़ी जोश से भरे हुए हैं। और उनके पास खुद की क्षमता दिखाने का शानदार अवसर है।

कम अनुभव लेकिन जोश भरपूर
अमेरिका के मुकाबले भारत के पास अनुभव की ज्यादा कमी है। जहां भारत पहली बार इस टूर्नामेंट में खेल रहा है तो वहीं अमेरिका 1999 में सेमीफाइनल तक का सफर तय कर चुका है। अमेरिका के पिछले प्रदर्शन को देखा जाए तो भारत सच में काफी पीछे है। हालांकि कोच मतोस ने जिस तरह से युवा खिलाड़ियों को मोटीवेट किया है वो भारत के लोगों की उम्मीदें जगाने के लिए काफी है। वहीं भारतीय टीम ने एएफसी अंडर-16 चैंपियनशिप में सात बार हिस्सा लिया है और 15 वर्ष पूर्व 2002 में उसने क्वार्टर फाइनल तक जगह बनाई थी जो उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा था। हालांकि वह कोरिया से हारकर इसके आगे नहीं बढ़ सका था।

मजबूत है अमेरिका की टीम, खिताब की है दावेदार
अमेरिकी टीम इस खिताब की प्रबल दावेदार टीमों में से एक है। अमेरिका के ज्यादातर खिलाड़ी मेजर लीग सॉकर की युवा टीम में खेल चुके हैं। अमेरिकी टीम ने फीफा अंडर-17 विश्वकप के कुल 16 संस्करणों में से 15 में हिस्सा लिया है। इसके अलावा अमेरिकी टीम के 21 में से 12 खिलाड़ी दुनिया के बड़े फुटबॉल लीग क्लबों की ओर से भी खेलते हैं।

घरेलू दर्शकों के साथ पीएम मोदी भी बढ़ाएंगे हौसला
पिछले काफी दिनों से खिलाड़ियों का हौसला बुलंद कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारत बनाम अमेरिका के मैच में शामिल होंगे। खबरों के मुताबिक फुटबॉल की विश्व नियामक संस्था फीफा की महासचिव फातमा समौरा और फीफा टूर्नामेंटों के प्रमुख जेमी यारजा भी मैच के दौरान उपस्थित रहेंगे। इन सबके अलावा भारतीय फुटबॉल जगत के दिग्गज आईएम विजयन, बाईचुंग भूटिया और भारतीय फुटबॉल टीम (सीनियर) के वर्तमान कप्तान सुनील छेत्री भी इस ऐतिहासिक मौके पर दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद रहेंगे।
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