नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2018 में मंगलवार को पोलैंड और सेनेगल के बीच कड़ा मुकाबले देखने को मिलेगा। टीमों की बीच होने वाली टक्कर में रॉबर्ट लेवानडॉस्की और सैडियो माने पर सभी की निगाहें होंगी। दोनों को यूरोप के दो बड़े फारवर्ड में होती है। पोलैंड के लेवानडॉस्की बेयर्न म्यूनिख के लिए खेलते हैं और इस सीजन में 29 गोल के साथ क्लब की ओर से लगातार तीसरी बार श्रेष्ठ स्कोरर रहे हैं। सेनेगल के सैडियो माने ने चैंपियंस लीग में 10 गोल किए, जिसमें एक कीव में खेले गए फाइनल में भी किया था। लिवरपुल की टीम में वह मिस्र के मोहम्मद सालाह और ब्राजील के राबर्टो फिरमिनो के बाद एक बड़ी ताकत हैं।
हालांकि मास्को के स्पार्टक स्टेडियम में ग्रुप एच के इस मैच में पोलैंड जीत के दावेदार के रूप में शुरूआत करेगा। विश्व में आठवें नंबर का पोलैंड विश्व कप में आठवीं बार हिस्सा ले रहा है। कोच एडम नवाल्का की टीम 1974 और 1982 के तीसरे स्थान पर रहने के रिकार्ड में सुधार करने के लिये बेताब है। लेवानडोवस्की ने स्वीकार किया कि उन्हें यहां खुद को साबित करना होगा क्योंकि यूरो 2016 में वह केवल एक गोल कर पाये थे और पोलैंड क्वार्टर फाइनल से बाहर हो गया था।
पोलैंड के बारे में कहा जाता है कि ये एक ऐसी टीम है जिस पर सभी की निगीहें रहेंगी। लेवानडोवस्की पोलैंड में अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। म्यूनिख के इस स्ट्राइकर ने अपने देश के लिए सबसे ज्यादा गोल करते हुए 52 गोल दागे हैं। हालांकि फीफा रैंकिंग में नंबर 7 पर काबिज पोलैंड के सामने सेनेगल की चुनौती होगी।
रॉबर्ट ने 14 जून से शुरू होने वाले फुटबॉल महाकुंभ के लिए जमकर तैयारियां की हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि उनकी टीम उनके ऊपर बहुत ज्यादा निर्भर है लेकिन वह ऐसा नहीं मानते हैं। टीम लेवांडोस्की से कहीं आगे है। खुद लेवांडोस्की का मानना है कि वे इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि फुटबॉल एक ऐसा खेल है, जिसमें 11 खिलाड़ी दूसरी टीम के 11 खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि, यूएफा क्वालीफायर में हम ग्रुप ई में शीर्ष पर रहे और हमें डेनमार्क और रोमानिया जैसी टीमों के खिलाफ खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी पर निर्भर टीम आखिर 10 में से आठ मैच कैसे जीत सकती है।
पोलैंड के चार डिफेंडर- लुकाज पिस्जकेक, कामिल ग्लिक, मीकल पाजदान, मासीज रायबस - 30 साल से अधिक उम्र के हैं। आयु निश्चित रूप से खेल को बेहतर तरीके से तय करने में मदद करती है, लेकिन टीम सेनेगल जैसे एनर्जेटिक साइड के खिलाफ थोड़ी स्लो साबित हो सकती है।
गार्जेगॉर्ज क्रिकवियाक इस सीजन में प्रीमियर लीग में वेस्ट ब्रॉमविच एल्बियन के लिए फ्लॉप रहे। सेरी ए में सैम्पोरिया के लिए खेलने वाले यंग करोल लिनेटी ने जरूर अपने प्रदर्शन से सभी को चौंकाया। उनसे उम्मीद है कि वे पीएसजी के धाकड़ मिडफील्डर क्रिचोवियाक के साथ डिफेंसिव मिडफील्ड की अगुआई करेंगे। तीन अटैकिंग मिडफील्डर (या विंगर, फॉर्मेशन पर डिपेंड करता है) जैकब ब्लाश्चिकोस्की (वुल्फ्सबर्ग), पियोटर जीलिंस्की (नेपोली), कामिल ग्रोसिकी (हल सिटी) के पास उम्र और अनुभव का एक अच्छा संतुलन है। ब्लाश्चिकोस्की और ग्रोसिकी दोनों 30 से वर्ष से ज्यादा की उम्र के हैं। इनके अलावा लिंक्सी (24 साल) भी एक परिपक्व खिलाड़ी हैं जिन पर लेवांडोस्की के अलावा सभी की नजरें रहेंगी।
वहीं सेनेगल की बात करें तो सेनेगल के कोच अलीउ सीस 2002 वर्ल्ड कप में भी सेनेगल टीम का हिस्सा थे, इस टीम ने 1998 की चैंपियन फ्रांस को अपने पहले ही मुकाबले में हराकर इतिहास रचते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। हालांकि उनकी योग्यता की कहानी बेहद दिलचस्प है - सेनेगल ग्रुप डी में दक्षिण अफ्रीका से हार गई लेकिन फीफा ने उस फैसले को पलट दिया था। दरअसल उस मैच में रेफरी जोसेफ लैम्टेई को मैच फिक्सिंग का दोषी पाया गया था। जिसके बाद फीफा ने रिप्ले का आदेश दिया और सेनेगल ने नवंबर 2017 में अफ्रीका को 2-0 हराकर अपना रूस का टिकट कटाया था।
विवादों को पीछे रखते हुए अब ये अफ्रीकन टीम अपने इन-फॉर्म फॉरवर्ड सैडियो माने के साथ इतिहास रचने की कोशिश करेगी। सैडियो माने ने हाल ही में लिवरपूल के साथ यूईएफए चैंपियंस लीग में फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके अलावा टीम की ताकत उसकी पेस (गति) है। हालांकि सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि टेरंगा के शेर एक इकाई के रूप में कितना अच्छा खेलते हैं।
अपने पहले ही विश्व कप में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करनेवाली सेनेगल की टीम 16 वर्ष बाद वापसी कर रही है। पहली बार 2002 में खेला था, जो उसका अंतिम टूर्नामेंट था। कोच अलीउ सीस 2015 से टीम के साथ फिर से जुड़े हैं। लीवरपुल की ओर से खेलनेवाले सैडिओ माने शानदार फॉर्म में हैं और लीग राउंड में उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं।
पोलैंड vs सेनेगल - 08.30PM - मॉस्को (स्पार्टक)