आसाम काम नहीं अकादमी चलाना : उषा
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की 'उड़न परी' नाम से मशहूर पी.टी. उषा का मानना है कि अकादमी चलाना दौड़ने से कहीं अधिक कठिन काम है।
उषा ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार करियर के बाद अपना एक अकादमी शुरू किया है, जिसे उन्होंने 'उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स' नाम दिया है। उषा ने चैम्पियन एथलीट पैदा करने के लिए यह अकादमी शुरू की है।
उषा को यह अकादमी शुरू किए हुए आठ वर्ष हो चुके हैं लेकिन उनके मुताबिक उनका काम कभी भी आसान नहीं रहा है। उनकी यह अकादमी कोझिकोड के करीब स्थित है।
उषा ने कहा, "दौड़ना किसी अकादमी को चलाने से कहीं आसान काम है।" उषा ने अपनी यह अकादमी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर शुरू किया था लेकिन बाद में अकादमी को चलाने के लिए धन जुटा पाना उनके लिए आसान नहीं रहा।
उषा ने कहा, "वित्तीय जरूरतें बढ़ती जा रही हैं और आमदनी कम हो रही है। हम अपनी अकादमी में मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यही कारण है कि हम देश भर की प्रतिभाओं को यहां लाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।"
"केरल सरकार ने हमें 30 एकड़ जमीन और 20 लाख रुपये मुहैया कराए थे लेकिन इतने पैसे में स्तरीय मूलभूत सुविधाएं जुटा पाना संभव नहीं। अब हमें ओलंपिक के लिए 20 एथलीटों को प्रशिक्षत करने की जिम्मेदारी दी गई है। हम ऐसा कर पाने में असमर्थ हैं क्योंकि हम खुद ही सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं।"
तमाम मुश्किलों के बाद उषा ने चैम्पियन एथलीट पैदा करने की अपनी हरसत पर पानी नहीं फिरने दिया और टिंटू लुका के रूप में एक बेहतरीन मध्यम दूरी की धाविका तैयार की है।
लुका इन दिनों 800 मीटर में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में पदक का दावेदार माना जा रहा है।
लुका ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित ऑल स्टार्स एथलेटिक्स मीट में 800 मीटर स्पर्धा में दो मिनट 1.24 सेंकेंड का समय निकाला और स्वर्ण जीता। उषा मानती हैं कि लुका और उनकी अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली तमाम लड़कियों और लड़के अपनी-अपनी स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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