बेहतर मेजबानी के साथ दिल जीता

By Super

पंकज प्रियदर्शी

बीबीसी संवाददाता, दक्षिण अफ़्रीका से

लंबे समय तक खेल प्रेमियों को जिस प्रतियोगिता का इंतज़ार था, वो समाप्त हुई. फ़ाइनल में स्पेन की जीत हुई और नीदरलैंड्स की हार. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका ने मेज़बान होने के नाते सबका दिल जीता.

अब भी कई आधारभूत सुविधाओं की कमी की समस्याओं से जूझ रहे इस देश ने दिखाया कि बड़े मौक़े पर कैसे एकजुट होकर काम किया जाता है और दुनिया भर की वाहवाही ली जाती है.

इस विश्व कप से पहले और शुरुआती दौर में भी कई बार इस पर सवाल उठे थे कि क्या दक्षिण अफ़्रीकी इतने बड़े आयोजन में सफल हो पाएगा, लेकिन दक्षिण अफ़्रीका ने न सिर्फ़ बेहतर मेज़बानी की, बल्कि पर्यटकों के दिल में भी जगह बनाई.

इक्का-दुक्का चोरी और लूटमारी की घटनाओं को छोड़ दें, तो ये विश्व कप शांति से गुज़र गया. सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही और आम लोगों को बहुत परेशानी भी नहीं हुई.

लाजवाब पुलिस तंत्र

दुनिया के कई देशों के पुलिसकर्मियों को मुझे देखने का अवसर मिला है, लेकिन यहाँ की पुलिस जितना संयम से काम करती है, वो लाजवाब है. नागरिकों के साथ सहयोग, उन्हें समझाना, बाहर के लोगों को रास्ता बताना....कभी भी आपा न खोना....पुलिसकर्मियों से आप यही उम्मीद करते हैं.

और कम से कम इस विश्व कप में तो दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस ने ये सब किया.....

हालाँकि विश्व कप के शुरू में कुछ स्वयंसेवकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन ने ज़ायका ख़राब ज़रूर किया, लेकिन फिर मामला शांत हो गया. हालाँकि जिन बड़ी समस्याओं से दक्षिण अफ़्रीका को दो-चार होना पड़ रहा है, उनमें बेरोज़गारी सबसे बड़ी समस्या है.

और सरकार के पास ये बड़ी चुनौती है कि विश्व कप के बाद बड़ी संख्या में बेरोज़गार होने वाले लोगों से वो कैसे निपटती है.

बड़े उलटफेर

प्रतियोगिता की बात करें, तो इस विश्व कप ने शुरू से ही कई बड़े उलटफेर किए, विवाद हुए, रेफ़री के फ़ैसलों पर सवाल उठे, जाबुलानी गेंद पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगे, तो वुवुज़ेला बजाने पर पाबंदी की भी बात उठी. लेकिन कई आकर्षक मैच भी हुए.

पिछली चैम्पियन इटली की टीम और उपविजेता फ़्रांस की टीम का पहले ही दौर में प्रतियोगिता से बाहर हो जाने लोगों को चकित कर गया. तो फ़्रांसीसी खिलाड़ियों की बग़ावत ने भी ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरीं.

फ़्रांसीसी खिलाड़ी निकोलस एनेल्का को टीम से बाहर किए जाने और फिर खिलाड़ियों के विद्रोह के कारण भी फ़्रांस की दुर्गति हुई और टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई.

दूसरी ओर इटली की टीम को भी सदमा लगा और खिलाड़ियों में तालमेल की कमी के कारण उसे भी पहले ही दौर में बाहर होना पड़ा. पहले दौर में एशियाई टीमों दक्षिण कोरिया और जापान ने ख़ूब प्रभावित किया और दोनों ही देश नॉक आउट स्टेज में दुर्भाग्यशाली साबित हुए.

पहले दौर में जर्मनी का सर्बिया के हाथों हारना और स्पेन का स्विट्ज़रलैंड के हाथों परास्त हो जाना भी चर्चा का विषय रही. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका में सबसे ज़्यादा निराशा उस समय फैली जब घाना को छोड़कर सभी अफ़्रीकी देश पहले ही दौर में पिट गए.

जर्मनी और इंग्लैंड के दौरान मैच में रेफ़री के फ़ैसले पर काफ़ी विवाद हुआ और आख़िरकार फ़ीफ़ा भी गोल लाइन तकनीक पर चर्चा के लिए तैयार हुई. इस मैच में इंग्लैंड के लैम्पार्ड का गोल नामंज़ूर कर दिया गया था, जबकि गेंद गोललाइन को पार कर गई थी.

अर्जेंटीना और मैक्सिको के बीच मैच के दौरान भी रेफ़री और लायंसमैन पर सवाल उठे, जब उन्होंने तेवेज़ को ऑफ़ साइड नहीं दिया और तेवेज़ ने गोल मार दिया.

सबसे ज़्यादा रोमांच

घाना और उरुग्वे के बीच क्वार्टर फ़ाइनल सबसे ज़्यादा रोमांचक और विवादित रहा. जब घाना की टीम जीतते-जीतते हार गई जबकि उरुग्वे की टीम हारते-हारते जीती. उरुग्वे के खिलाड़ी स्वारेज़ ने जिस तरह हाथ से गोल रोका, उसे अब भी अफ़्रीकी नहीं पचा रहे और उनके लिए स्वारेज़ एक विलेन बन गए.

क्वार्टर फ़ाइनल में ब्राज़ील के नीदरलैंड्स के हाथों पिट जाने के कारण माहौल काफ़ी ग़मगीन हुआ तो अर्जेंटीना की टीम जिस तरह जर्मनी के हाथों पिटी, उस पर लोगों को सहसा यक़ीन ही नहीं हुआ.

इस विश्व कप में उत्तर कोरिया और पुर्तगाल के ख़िलाफ़ मैच में गोलों की बरसात हुई और पुर्तगाल 7-0 से यह मैच जीता, जो इस विश्व कप में सबसे बड़ा स्कोर रहा. जर्मनी की टीम ने तीन बार एक मैच में चार गोल किए.

जहाँ तक खिलाड़ियों की बात है, तो एक-दो को छोड़ दें तो क़रीब-क़रीब वो सारे स्टार खिलाड़ी फ़िसड्डी साबित हुए, जिनसे लोगों ने उम्मीदें लगा रखी थी. अर्जेंटीना के मेसी, ब्राज़ील के काका और इंग्लैंड के रूनी तो एक गोल भी नहीं कर पाए, जबकि पुर्तगाल के रोनाल्डो के खाते में सिर्फ़ एक गोल ही आया.

लेकिन स्पेन के डेविड विया, जर्मनी के टॉमस मुलर, उरुग्वे के डेविड फ़ोरलैन, नीदरलैंड्स के स्नाइडर सभी ने पाँच-पाँच गोल मारे लेकिन गोल्डन बूट मुलर को मिला.

अगर मैचों की बात करें तो क्वार्टर फ़ाइनल में जर्मनी और अर्जेंटीना का मैच और सेमी फ़ाइनल में स्पेन और जर्मनी का मैच बेहतरीन रहा. अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मैच में जिस तरह जर्मन खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाया, वो शानदार था.

स्पेन और जर्मनी

स्पेन और जर्मनी के बीच मैच में एक ही गोल हुआ, लेकिन स्पेन का गेंद पर नियंत्रण इतना बेहतरीन था कि वो विश्व कप के यादगार मैचों में शुमार होगा.

खिलाड़ियों के अलावा विश्व कप के कुछ अन्य चर्चित चेहरों की चर्चा करें, तो माराडोना इनमें सबसे आगे रहे. अपने स्टाइल, अपने बयान के कारण उन्हें हमेशा सुर्ख़ियाँ मिली.

एक ओर जहाँ माराडोना अपनी हरकतों से चर्चा में रहे, तो सबसे शांत और संयमित दिखे स्पेन के कोच विन्सेंट डेल बॉस्क़ और आख़िरकार उनका संयम काम भी आया.

मैदान के बाहर शकीरा की ख़ूब धूम रही और उनका गाना वाका...वाका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा. शकीरा ने उदघाटन से पहले कार्यक्रम में और फिर समापन में इस गाने को पेश किया.

उदघाटन समारोह में मंडेला का न आना लोगों को खला, तो मंडेला ने अपने ख़राब स्वास्थ्य के बीच लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए समापन समारोह में शामिल होने के लिए थोड़ा समय निकाला.

जर्मनी के पॉल द ऑक्टोपस ने तो इतनी सुर्ख़ियाँ बटोरी, जो शायद किसी खिलाड़ी को न मिली हो. विश्व कप में उसकी भविष्याणी सौ फ़ीसदी सही साबित हुई. लेकिन उसे जर्मन और बाद में डच समर्थकों की नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है.

लेकिन इस विश्व कप के सबसे बड़े हीरो रहे देश-दुनिया के आए फ़ैन्स, जिन्होंने इस विश्व कप को अपने जज़्बे से रंगीन बनाया और यहाँ के स्थानीय लोग जिन्होंने अपनी टीम के हार जाने के बावजूद विश्व कप का जुनून नहीं जाने दिया...

अलविदा दक्षिण अफ़्रीका....

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Story first published: Monday, July 12, 2010, 18:01 [IST]
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