गॉल टेस्ट : श्रीलंकाई टीम ने जीत के साथ मुरली को दी विदाई (राउंडअप)
गॉल, 22 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम को गॉल अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में श्रीलंका के हाथों 10 विकेट से हार झेलनी पड़ी है। यह टेस्ट मैच मुथैया मुरलीधरन के 800 विकेटों के मील के पत्थर के लिए हमेशा याद दिया जाएगा। इस मैच के साथ मुरली ने टेस्ट मैचों से संन्यास ले लिया।
मैच के पांचवें दिन गुरुवार को श्रीलंका को जीत के लिए 95 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे उसने बिना कोई विकेट गंवाए हासिल कर लिया। पहली पारी में शानदार शतक लगाने वाले सलामी बल्लेबाज थरंगा पारानाविताना (नाबाद 23) और हालिया नाकामी से उबरते हुए दिग्गज बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान (नाबाद 68) अपनी टीम को जीत दिलाने के बाद ही पेवेलियन लौटे।
इस जीत के साथ मेजबान टीम ने तीन मैचों की इस श्रृंखला में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। यह मैच मुरलीधरन की टेस्ट क्रिकेट से विदाई और उनके 800 विकेटों के मील के पत्थर के कारण यागदार बन गया। मुरली ने भारत के बल्लेबाज प्रज्ञान ओझा का विकेट हासिल करने के साथ यह जादुई आंकड़ा छुआ।
इससे पहले, भारतीय टीम की दूसरी पारी 338 रनों पर सिमट गई। फॉलोऑन खेल रही भारतीय टीम पारी की हार बचाने में सफल रही और श्रीलंका के सामने जीत के लिए 95 रनों का लक्ष्य रखा। भारतीय टीम ने भोजनकाल तक आठ विकेट के नुकसान पर 292 रन बनाए थे। भोजन के बाद बल्लेबाजी के लिए उतरे दिग्गज बल्लेबाज वी.वी.एस. लक्ष्मण का सब्र जवाब दे गया और पूरे एक सत्र तक विकेट पर टिके रहने के बाद वह 127 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 69 रन बनाने के बाद रन आउट हो गए। भारत का यह विकेट 314 रन के कुल योग पर गिरा।
इसके बाद, ईशांत शर्मा और प्रज्ञान ओझा ने हालांकि अंतिम विकेट के लिए 24 रन जोड़े। 338 रन के कुल योग पर मुरलीधरन द्वारा ओझा को आउट करने के साथ ही भारतीय पारी समाप्त हुई। मुरली ने इस विकेट के साथ 800 विकेटों का आंकड़ा छू लिया। ओझा 50 गेंदों पर एक चौके की मदद से 13 रन बनाने में सफल रहे।
मुरली का 800वां शिकार बने ओझा का नाम भी क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया क्योंकि जब भी मुरली की इस ऐतिहासिक सफलता का जिक्र होगा, तब ओझा का नाम जरूर लिया जाएगा। दूसरी छोर पर ईशांत शर्मा 106 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 31 रन बनाकर नाबाद रहे।
भारतीय टीम ने अपना आठवां विकेट 246 रन के कुल योग पर गंवाया था। आठवें विकेट के रूप में अभिमन्यु मिथुन आउट हुए थे। अपने करियर का पहला टेस्ट खेल रहे मिथुन ने अपनी संघर्षपूर्ण पारी के दौरान 59 गेंदों का सामना करते हुए पांच चौकों की मदद से 25 रन बनाए। पहली पारी में श्रीलंका के चार बल्लेबाजों को पेवेलियन की राह दिखाने वाले मिथुन ने लक्ष्मण के साथ आठवें विकेट के लिए 49 रन जोड़े।
पांचवें दिन हरभजन सिंह मुरली की गेंद पर पगबाधा करार दिए गए। हरभजन सिर्फ आठ रन बना सके। पहली पारी में मुरली ने पांच विकेट चटकाए थे। पहली पारी में बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण फॉलोऑन खेल रही टीम इंडिया ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक पांच विकेट पर 181 रन बनाए थे।
आखिरी दिन भारतीय टीम को कप्तान धौनी और लक्ष्मण से लंबे समय तक मैदान पर डटे रहने की उम्मीद थी। परंतु जल्द ही मलिंगा ने धौनी को क्लीन बोल्ड कर इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। धौनी सिर्फ चार रन ही बना सके। मलिंगा इस पारी में पांच विकेट लिए।
मुरली के नाम है सर्वाधिक 1328 विकेट :
इस मुकाम पर उनके अलावा और कोई गेंदबाज नहीं पहुंच सका है। मुरलीधरन विश्व के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 1000 से अधिक विकेट लिए हैं। उन्होंने 133 टेस्ट मैचों में अब तक कुल 800 विकेट झटके हैं जबकि 337 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 515 विकेट दर्ज हैं।
28 अगस्त 1992 को आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में अपने करियर का पहला टेस्ट मैच खेलने वाले मुरली ने टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 67 बार पारी में पांच और 22 बार मैच में दस विकेट झटके हैं। इसके अलावा 11 ट्वेंटी-20 मैचों में उन्होंने 13 विकेट झटके हैं। मुरली के नाम कुल 1328 विकेट हैं।
विदाई समारोह में जुटे मुरली के परिजन :
विदाई के इस महान अवसर का गवाह बनने के लिए गॉल स्टेडियम में मुरली का पूरा परिवार मौजूद था। उनकी मां, पत्नी माधीमालार, पुत्र नरेन और उनके सभी भाइयों ने इस शानदार पल का लुत्फ उठाया। इसके अलावा उनके हजारों प्रशंसकों ने भी इस महान क्षण को जमकर जिया। मुरली के इस रिकार्ड के इंतजार में गॉल स्टेडियम खचाखच भर गया था।
इतिहास बनाने के बाद मुरली को उनके साथियों ने घेर लिया। सबने उन्हें गले लगाकर बधाई दी। मैदान से पेवेलियन की ओर लौटते वक्त उनके दो साथियों ने उन्हें कंधों पर उठा रखा था और मुरली ने वह गेंद ऊपर उठा रखी थी, जिससे उन्होंने इतिहास कायम किया था।
महान खिलाड़ी का उदय :
वर्ष 1992 में जब मुरली ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला टेस्ट खेला था और पहले विकेट के रूप में क्रेग मैक्डरमॉट को आउट किया था, तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन वह विश्व क्रिकेट में गेंदबाजी से जुड़ी सभी रिकार्ड अपने नाम करेंगे।
विवादों का साया :
तीन वर्ष के बाद जब मुरली आस्ट्रेलिया दौरे पर गए तब उन्हें चकर करार दिया गया और तभी से उनके करियर में विवादों का दौर शुरू हो गया। अंपायर डरेल हेयर के उस फैसले ने मुरली को कितनी बार बॉयोमैकेनेनिकल टेस्ट से गुजरने पर मजबूर कर दिया।
मुरली की विवादास्पद गेंद 'दूसरा' ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी। उन्हें चकर कहा गया और फिर कई बार उनके एक्शन पर अंगुली उठाई गई लेकिन मुरली ने हार नहीं मानी। हर बार अपने आलोचकों को गलत साबित करते हुए वह मैदान में लौटे और विकेट चटकाने का सिलसिला जारी रखा।
प्रशंसकों को मुरली का सलाम :
मैच के बाद मुरली ने कहा कि वह अपने देश के राष्ट्रपति, पत्नी, परिजनों, बेटे, कोच, क्रिकेट अधिकारियों, टीम के साथियों, देशवासियों और दुनिया भर में अपने चाहने वालों को 19 वर्षो तक प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।
मुरली ने अपने सम्मान में आयोजित समारोह के दौरान इंग्लैंड के पूर्व कप्तान टोनी ग्रेग से बातचीत के दौरान कहा, "मैं क्रिकेट में रुचि रखने वाले अपने देश के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे सहित उन तमाम लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जो आज मेरे रिकार्ड को बनते देखने के लिए यहां पहुंचे। मैं अपनी इस सफलता से बेहद खुश हूं और यही मानता हूं कि इन सबके सहयोग, प्यार और समर्थन के बिना मैं इस मुकाम पर हरगिज नहीं पहुंच पाता।"
चकिंग के आरोप से निराश थे :
मुरली ने कहा कि वह 1995 और 2000 के बीच के दौर को अपने करियर का सबसे संघर्षपूर्ण दौर मानते हैं क्योंकि उस दौरान उन्हें कई बार अनचाहे तौर पर चकिंग का आरोप झेलना पड़ा था।
मुरली ने कहा, "1995 में हुई पहली घटना से मैं निराश था। मैंने नहीं सोचा था कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में आने के तीन वर्ष बाद ही मुझे चकर करार दिया जाएगा लेकिन मैंने हार नहीं मानी और पूर्व कप्तान अरविंद डी सिल्वा की सलाह पर अमल करता गया। मेरे लिए अरविंद के शब्द रामवाण की तरह थे। मैं उन पर चलते हुए मुश्किलों से निकलने में सफल रहा।"
किसी से कोई शिकायत नहीं :
मुरली ने यह भी कहा कि उन्हें अपने खिलाफ चकिंग का आरोप लगाने वाले किसी खिलाड़ी या अंपायर से कोई शिकायत नहीं। बकौल मुरली, "मेरे मन में किसी के लिए दुर्भावना नहीं है। जिन्होंने ऐसा किया, वे अपना काम कर रहे थे। मेरा काम खुद में सुधार लाना था और मैंने वही किया। मैं खुश हूं कि पाचं वर्ष के संघर्ष के बाद ही सही लेकिन मैं खुद को तकनीकी रूप से सही साबित करने में सफल रहा।"
2011 विश्व कप खेलने की चाह :
मुरली ने टेस्ट मैचों से भले ही संन्यास ले लिया हो लेकिन वह एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 मैचों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए 2011 विश्व कप खेलने की इच्छा रखते हैं।
मुरली बोले, "चयनकर्ताओं ने चाहा तो मैं 2011 विश्व कप खेलना चाहता हूं। टीम को जरूरत हुई तो मैं उसे सेवाएं देने के लिए तैयार हूं। हां, मेरी जगह अगर वे किसी युवा खिलाड़ी को मौका देना चाहते हैं तो मुझे कोई दुख नहीं होगा। इसके अलावा मैं थोड़े समय तक ट्वेंटी-20 क्रिकेट भी खेलना चाहता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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