अलीगढ़-मथुरा में किसानों का विरोध प्रदर्शन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और मथुरा जिलों में राज्य सरकार द्वारा शांति की अपील के बावजूद दूसरे दिन भी किसानों का हंगामा जारी रहा। किसान जगह-जगह आगजनी और तोड़फोड़ कर रहे हैं। पूरे इलाके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अलीगढ़ में शनिवार देर रात किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे। किसान नोएडा और आगरा के बीच बनने वाले 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के लिए ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
अलीगढ़ और मथुरा में हजारों किसान सड़कों पर आगजनी कर रहे हैं। उन्होंने कई सरकारी वाहन और एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे वाहन आग के हवाले कर दिए हैं। रविवार सुबह अलीगढ़ के टप्पल और सरौल इलाकों में किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे करीब पांच रोड रोलरों और आठ डंपरों में तोड़फोड़ करके उन्हें जला दिया। उग्र किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे पर जे. पी. इंडस्ट्रीज के तीन गोदामों को भी आग के हवाले कर दिया। इन गोदामों में निर्माण का सामान रखा हुआ था। मथुरा में भी किसानों द्वारा कुछ डंपरों में तोड़फोड़ किये जाने की खबर है।
पुलिस का रक्षात्मक रवैया
शनिवार रात गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस पूरे मामले पर रक्षात्मक रुख अपना रही है। तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे किसानों पर रविवार को पुलिस की ओर से कोई सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। अलीगढ़ के जिलाधिकारी के. आर. मोहन राव ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि किसानों को तोड़फोड़ और आगजनी न करने के लिए समझया बुझ्लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तनावग्रस्त इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।
हिंसा में मारे गये पुलिसकर्मी की पहचान ब्रजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी) में प्लाटून कमांडर था। जबकि पुलिस की गोली से मारे गए किसान की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है।
किसानों ने पुलिस पर लगाया आरोप
किसानों का आरोप है कि पुलिस की गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हुई है जबकि प्रशासन एक किसान की मौत का दावा कर रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि सिर्फ एक किसान की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से गोलीबारी शुरू किए जाने के बाद पुलिस को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी थी।
प्रदर्शनकारियों ने शनिवार की रात पथराव, हिंसा और आगजनी की तथा टप्पल में एक पुलिस चौकी व जेपी इंडस्ट्रीज के एक शिवर कार्यालय को आग के हवाले कर दिया था। कुल 165 किलोमीटर लंबे आठ लेन वाले इस मार्ग के निर्माण का ठेका जे. पी. इंडस्ट्रीज को दिया गया है।
हिंसा की शुरुआत किसान नेता राम बाबू कथीरिया की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। कथीरिया अधिक मुआवजे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिन से किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। बताया गया है कि कथीरिया ग्रेटर नोएडा के किसानों को दिए गए मुआवजे की दर के अनुसार ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अलीगढ़ से शुरू हुई हिंसा मथुरा जिले तक फैल गई। मथुरा में भी किसानों ने कई वाहनों को आग लगा दी। किसान कथीरिया की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
अलीगढ़ में शनिवार देर रात किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे। किसान नोएडा और आगरा के बीच बनने वाले 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के लिए ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
अलीगढ़ और मथुरा में हजारों किसान सड़कों पर आगजनी कर रहे हैं। उन्होंने कई सरकारी वाहन और एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे वाहन आग के हवाले कर दिए हैं। रविवार सुबह अलीगढ़ के टप्पल और सरौल इलाकों में किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे करीब पांच रोड रोलरों और आठ डंपरों में तोड़फोड़ करके उन्हें जला दिया। उग्र किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे पर जे. पी. इंडस्ट्रीज के तीन गोदामों को भी आग के हवाले कर दिया। इन गोदामों में निर्माण का सामान रखा हुआ था। मथुरा में भी किसानों द्वारा कुछ डंपरों में तोड़फोड़ किये जाने की खबर है।
पुलिस का रक्षात्मक रवैया
शनिवार रात गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस पूरे मामले पर रक्षात्मक रुख अपना रही है। तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे किसानों पर रविवार को पुलिस की ओर से कोई सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। अलीगढ़ के जिलाधिकारी के. आर. मोहन राव ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि किसानों को तोड़फोड़ और आगजनी न करने के लिए समझया बुझ्लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तनावग्रस्त इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।
हिंसा में मारे गये पुलिसकर्मी की पहचान ब्रजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी) में प्लाटून कमांडर था। जबकि पुलिस की गोली से मारे गए किसान की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है।
किसानों ने पुलिस पर लगाया आरोप
किसानों का आरोप है कि पुलिस की गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हुई है जबकि प्रशासन एक किसान की मौत का दावा कर रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि सिर्फ एक किसान की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से गोलीबारी शुरू किए जाने के बाद पुलिस को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी थी।
प्रदर्शनकारियों ने शनिवार की रात पथराव, हिंसा और आगजनी की तथा टप्पल में एक पुलिस चौकी व जेपी इंडस्ट्रीज के एक शिवर कार्यालय को आग के हवाले कर दिया था। कुल 165 किलोमीटर लंबे आठ लेन वाले इस मार्ग के निर्माण का ठेका जे. पी. इंडस्ट्रीज को दिया गया है।
हिंसा की शुरुआत किसान नेता राम बाबू कथीरिया की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। कथीरिया अधिक मुआवजे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिन से किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। बताया गया है कि कथीरिया ग्रेटर नोएडा के किसानों को दिए गए मुआवजे की दर के अनुसार ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अलीगढ़ से शुरू हुई हिंसा मथुरा जिले तक फैल गई। मथुरा में भी किसानों ने कई वाहनों को आग लगा दी। किसान कथीरिया की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:42 [IST]
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