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विश्व कप का सेमी फ़ाइनल खेल रहे क्रोएशिया के बारे में कितना जानते हैं आप

क्रोएशिया

फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप जब शुरू हुआ था तो लोग ब्राज़ील, अर्जेंटीना, पुर्तगाल और जर्मनी के नारे लगा रहे थे, लेकिन कुछ ही दिनों में साफ़ हो गया कि ये खेल सरप्राइज़ देने के मामले में किसी से पीछे नहीं है.

आप भले कोई नायक चुन लीजिए, विश्व कप में वो नाम कमाएगा जो टीम की तरह खेलेगा. पुराने नायक बाहर हो गए और नए नायक चमक गए.

विश्व कप के ख़िताबी मुकाबले में फ़्रांस ने जगह बनाकर साफ़ कर दिया है कि उसकी नाक के नीचे से कप उठा ले जाना कोई बच्चों का खेल नहीं है.

दो टीमें आमने-सामने हैं जो ख़्वाब देख रही हैं कि वो कप उठाने के लिए फ़्रांस से भिड़ेंगी और क़िस्मत ने साथ दिया तो दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कार उनके पास होगा.

ये हैं इंग्लैंड और क्रोएशिया. साल 1966 में एकमात्र वर्ल्ड कप जीतने वाली इंग्लैंड में 'It's Coming Home' के नारे लग रहे हैं. इशारा ये कि इस बार विश्व कप लंदन की फ़्लाइट पकड़ेगा.

कहां है क्रोएशिया?

दूसरी ओर क्रोएशिया है. महज़ 40 लाख की आबादी वाले इस देश का हर बाशिंदा अपनी टीम की इस कामयाबी पर आसानी से यक़ीन नहीं कर पा रहा. वो नर्वस हैं ये सोचकर कि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हार गए तो दिल कैसे टूटेंगे और नर्वस हैं ये सोचकर कि जीत गए तो इतिहास बनाने के कितने क़रीब पहुंच जाएंगे.

ज़ाहिर है, सेमीफ़ाइनल में पहुंची दोनों ही टीमों के लिए ये मैच कितना ज़रूरी है, ये हम जानते हैं. लेकिन दुनिया के लोग इन दोनों में से इंग्लैंड के बारे में ज़्यादा जानते हैं और क्रोएशिया के बारे में काफ़ी कम.

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क्रोएशिया ख़ुद भी इस बात का जवाब नहीं दे सकता कि वो आज़ादी के बाद से अब तक खेले गए छह में से पांच फ़ुटबॉल विश्व कप में जगह बनाने और 1998 में सेमीफ़ाइनल तक पहुंचने में कैसे कामयाब रहा.

द सन के मुताबिक फ़ुटबॉल के जानकार बताते हैं कि पूर्ववर्ती यूगोस्लाविया के एकेडमी सिस्टम का कमाल है कि इतने कम समय में क्रोएशिया ने इस खेल में इतना नाम कमाया है.

साल 1987 में चिली में खेले गई वर्ल्ड अंडर-20 चैम्पियनशिप जीतकर उसने दुनिया में धमाका कर दिया था, जबकि स्वतंत्र देश के रूप में पहला मैच खेलने में उसे इसके बाद भी सात साल लगे.

यूगोस्लाविया कावो दौर

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चिली, ब्राज़ील और वेस्ट जर्मनी जैसी ताक़तवर टीमों को हराने के बाद ये कहा जाने लगा था कि यूगोस्लाविया शायद सबसे शानदार युवा टीम है, लेकिन ये बात साबित न हो सकी.

चार साल बाद 1991 में बाल्कन युद्ध छिड़ गया जिसने कई उम्मीदों का दम निकाल दिया. सात साल बाद 1998 में फ़्रांस में खेले गए विश्व कप में लाल-सफ़ेद चेक जर्सी पहने खिलाड़ियों ने दुनिया को बताया कि क्रोएशिया के ख़्वाब कितने बड़े हैं.

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ख़ूनी जंग ख़त्म होने के महज़ तीन साल बाद मिली ये खुशी क्रोएशिया के लिए छाया से निकलकर अपनी जगह बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई.

डिनामो ज़ाग्रेब एकेडमी का ज़िक्र ज़रूरी है क्योंकि उसी ने लुका मोदरिक, डेजान लोवरन, सिमे विरास्लाजको, मारियो मांदज़ुचिक और मातेओ कोवासिच जैसे खिलाड़ी दिए हैं.

लेकिन इस खेल से नाम कमाने वाले क्रोएशिया ने अपने हिस्से का काफ़ी संघर्ष भी किया है.

क्रोएशिया का इतिहास

फ़ुटबॉल के बहाने ये क्रोएशिया के बारे में जानने का भी सही वक़्त है. ये देश मध्य और दक्षिण-पूर्व यूरोप के बीचोंबीच बसा है और एड्रियाटिक सागर के क़रीब.

क्रोएशिया की राजधानी का नाम ज़ाग्रेब है और क़रीब 56 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश में ज़्यादातर लोग रोमन कैथोलिक हैं.

क्रोएशियाई यहां छठी सदी में आकर बसे थे और टोमिस्लाव इनके पहले राजा बने थे. साल 1102 में वो हंगरी के साथ हो लिया और 1527 में ऑटोमन साम्राज्य के फैलते प्रभाव के सामने क्रोएशियाई संसद ने फ़र्डिनेंड ऑफ़ हैब्सबर्ग को अपना राजा मान लिया.

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19वीं सदी की शुरुआत में इस देश के टुकड़े फ़्रांसीसी इलीरियर प्रॉविंस में हो गए जबकि ऑस्ट्रिया-हंगरी ने बोस्निया हर्जेगोविना पर कब्ज़ा कर लिया.

ये विवाद साल 1878 में हुई बर्लिन की संधि में सुलझाया गया.

नाज़ियों का कब्ज़ा

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साल 1918 में जब क्रोएशियाई संसद (सबोर) ने आज़ादी का एलान किया और 'स्टेट ऑफ़ स्लोवेनस, क्रोएट्स एंड सर्ब' से जुड़ने का फ़ैसला किया है.

अप्रैल 1941 में नाज़ी जर्मनी की अगुवाई में ध्रुवीय शक्तियों ने यूगोस्लाविया पर कब्ज़ा कर लिया तो क्रोएशिया का ज़्यादातर हिस्सा नाज़ी समर्थन वाले क्लाइंट स्टेट में चला गया.

इसके बाद विरोध शुरू हुआ जिसके नतीजे में फ़ेडरल स्टेट ऑफ़ क्रोएशिया बना. इसके बाद ये सोशलिस्ट फ़ेडरल रिपब्लिक ऑफ़ यूगोस्लाविया का संस्थापक सदस्य और संघीय घटक बन गया.

साल 1918 से 1991 के बीच क्रोएशिया, यूगोस्लाविया का हिस्सा रहा और साल 1991 में क्रोएशिया में लड़ाई स्लोवेनिया में जंग के बाद शुरू हुई.

लेकिन पहले सोवियत रूस और फिर यूगोस्लाविया के बिखरने और उस वजह से हालात बिगड़ने की क्रोएशिया ने बड़ी क़ीमत चुकाई है.

मुश्किलें ही मुश्किलें

बढ़ते तनाव के बीच क्रोएशिया ने 25 जून, 1991 को स्वतंत्रता की घोषणा की. हालांकि इस घोषणापत्र को पूरी तरह अमली जामा पहनाया गया 8 अक्टूबर, 1991 को.

इस बीच हालात बिगड़ रहे थे क्योंकि युगोस्लाव पब्लिक आर्मी और सर्ब पैरामिलिट्री समूहों ने क्रोएशिया पर हमला बोल दिया.

1991 के अंत में हालात ऐसे थे कि क्रोएशिया के पास सिर्फ़ अपनी एक-तिहाई ज़मीन पर कब्ज़ा रह गया था. क्रोएशियाई मूल के लोगों को निशाना बनाया गया. लाखों मारे गए और बेघर हुए.

जनवरी, 1992 में क्रोएशिया को यूरोपीय इकोनॉमिक कम्युनिटी से मान्यता मिल गई और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उसे पहचान दे दी. अगस्त 1995 में युद्ध ख़त्म हुआ तो साफ़ हो गया कि जीत क्रोएशिया की हुई है.

इसके साथ ही बाग़ी इलाकों से दो लाख सर्बियाई खदेड़े गए और वो जगह बोस्निया हेर्जेगोविना से आने वाले क्रोएशियाई शरणार्थियों को बसाने में काम आई.

और फिर रिकवरी का दौर

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कब्ज़े वाले बाकी इलाके क्रोएशिया को नवंबर, 1995 में हुए एक समझौते के बाद मिले. लेकिन जंग के बाद भी क्रोएशिया की मुश्किलें ख़त्म नहीं हुईं क्योंकि उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में काफ़ी वक़्त लगने वाला था.

साल 2000 के बाद का दौर क्रोएशिया में लोकतंत्र के कुछ मज़बूत होने, आर्थिक विकास और ढांचागत सामाजिक सुधार के रूप में आया. साथ ही बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता जैसी दिक्कतें भी.

लेकिन उसने लंबा सफ़र भी तय किया है. वो यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय परिषद, नेटो, डब्ल्यूटीओ का सदस्य देश है.

यूएन पीस कीपिंग फ़ोर्स का सक्रिय सदस्य होने की वजह से वो नेटो की अगुवाई वाले कई मिशन में अपने सैनिक भेजता रहा है.

क्रोएशिया की अर्थव्यवस्था की बात करें तो वो सर्विस, इंडस्ट्री और खेती पर आधारित है. पर्यटन भी कमाई का बड़ा ज़रिया है. दुनिया के शीर्ष 20 पर्यटन स्थलों में इसे शुमार किया जाता है.

विकास और संघर्ष के बीच क्रोएशिया दिक्कतों के बीच फ़ुटबॉल को हर बार अपने नए और पुराने ज़ख़्मों पर मरहम की तरह इस्तेमाल करता रहा है.

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Story first published: Wednesday, July 11, 2018, 16:36 [IST]
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