न्यायालय का फैसला भारतीय हॉकी के हक में : गिल
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को भारतीय हॉकी महासंघ (आईएचएफ) की मान्यता फिर से बहाल करने संबंधी फैसले के बाद आईएचएफ प्रमुख और पूर्व आईपीएल अधिकारी कुंवर पाल सिंह गिल ने खुशी जाहिर की। गिल ने कहा कि न्यायालय का फैसला भारतीय हॉकी के हक में है और इसका सम्मान करते हुए वह जल्द ही अपने काम पर लौटेंगे।
न्यायालय ने आईएचएफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के उस आदेश को अवैध करार दिया, जिसके अंतर्गत सरकार ने दो वर्ष पहले आईएचएफ की मान्यता समाप्त कर दी थी। साथ ही न्यायालय ने सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने अपने फैसले में कहा, "आईएचएफ की मान्यता रद्द करने के संबंध में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा पेश की गई दलीलें न्यायालय को बेबुनियाद लगीं। इस संबंध में दिए गए आदेश से आईएचएफ के साथ नाइंसाफी हुई है। ऐसे में न्यायालय का मत है कि यथास्थिति फिर से बहाल होनी चाहिए।"
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गिल ने न्यायालय के इस फैसले के बाद कहा कि आईएचएफ जल्द ही काम पर लौटेगा। न्यायालय का फैसला आने के बाद आईएएनएस से बातचीत के दौरान गिल ने कहा, "न्यायालय ने हमारी बात की पुष्टि कर दी है। हम आईएचएफ की वार्षिक आम बैठक बुलाएंगे और आगे के काम पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय संघ हमारे साथ हैं और यही कारण है कि हम आम बैठक बुलाने की स्थिति में हैं। हम इस देश में हॉकी के विकास के लिए काम करेंगे।"
गिल ने कहा कि सरकार और आईओए को न्यायालय के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए और आईएचएफ को देश में हॉकी की सर्वोच्च नियंत्रक संस्था के रूप में काम करने देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि आईओए ने अप्रैल 2008 में सचिव ज्योतिकुमारन को एक स्टिंग ऑपरेशन में टीम में चयन को लेकर एक खिलाड़ी से कथित तौर पर रिश्वत लेते दिखाए जाने के बाद आईएचएफ की मान्यता रद्द कर दी थी। बाद में खेल मंत्रालय भी इस फैसले में आईओए के साथ दिखा था। इसके बाद आईओए ने हॉकी इंडिया (एचआई) नाम की एक अलग संस्था का गठन किया जो भारत में हॉकी को नियंत्रित करने वाली अंतरिम इकाई के तौर पर काम कर रही है।
ज्योतिकुमारन ने न्यायालय के इस फैसले को लेकर कहा, "आईएचएफ को निलंबित किया जाना पूरी तरह गैरकानूनी था। इसमें कुछ लोगों का षड़यंत्र था। ये लोग भारतीय हॉकी का भला नहीं चाहते। मैं इतना कहूंगा कि हॉकी एक बार फिर सुरक्षित हाथों में आ गई है। दो वर्ष तक देश में कोई भी टूर्नामेंट नहीं हुआ। हम जल्द ही एक राष्ट्रीय चैम्पियनशिप आयोजित कराएंगे।"
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एचआई की अस्थाई समिति के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और आईएचएफ के चयनित उपाध्यक्ष असलम शेर खान ने कहा कि वह न्यायालय के फैसले को पढ़ने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करेंगे।
इधर, भारतीय महिला हॉकी महासंघ की सचिव अमृता बोस ने कहा है कि उनके महासंघ को आईएचएफ के साथ मिलकर काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। साथ ही वह अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के नियमों के मुताबिक चुनावों में भी आईएचएफ का साथ देने के लिए तैयार हैं।
बोस ने कहा कि एचआई ने भारतीय हॉकी को पांच वर्ष पीछे ढकेल दिया है। उन्होंने कहा, "हम पांच वर्ष पीछे जा चुके हैं। हमारे देश में आज कोई राष्ट्रीय आयोजन नहीं होते। हम देश में हॉकी का गौरव स्थापित करने के लिए फिर से काम करेंगे। इसके लिए लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत चुनाव कराने की जरूरत है और हम इसके लिए आईएचएफ के साथ हैं। खेल मंत्रालय को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
न्यायालय ने आईएचएफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के उस आदेश को अवैध करार दिया, जिसके अंतर्गत सरकार ने दो वर्ष पहले आईएचएफ की मान्यता समाप्त कर दी थी। साथ ही न्यायालय ने सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने अपने फैसले में कहा, "आईएचएफ की मान्यता रद्द करने के संबंध में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा पेश की गई दलीलें न्यायालय को बेबुनियाद लगीं। इस संबंध में दिए गए आदेश से आईएचएफ के साथ नाइंसाफी हुई है। ऐसे में न्यायालय का मत है कि यथास्थिति फिर से बहाल होनी चाहिए।"
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गिल ने न्यायालय के इस फैसले के बाद कहा कि आईएचएफ जल्द ही काम पर लौटेगा। न्यायालय का फैसला आने के बाद आईएएनएस से बातचीत के दौरान गिल ने कहा, "न्यायालय ने हमारी बात की पुष्टि कर दी है। हम आईएचएफ की वार्षिक आम बैठक बुलाएंगे और आगे के काम पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय संघ हमारे साथ हैं और यही कारण है कि हम आम बैठक बुलाने की स्थिति में हैं। हम इस देश में हॉकी के विकास के लिए काम करेंगे।"
गिल ने कहा कि सरकार और आईओए को न्यायालय के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए और आईएचएफ को देश में हॉकी की सर्वोच्च नियंत्रक संस्था के रूप में काम करने देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि आईओए ने अप्रैल 2008 में सचिव ज्योतिकुमारन को एक स्टिंग ऑपरेशन में टीम में चयन को लेकर एक खिलाड़ी से कथित तौर पर रिश्वत लेते दिखाए जाने के बाद आईएचएफ की मान्यता रद्द कर दी थी। बाद में खेल मंत्रालय भी इस फैसले में आईओए के साथ दिखा था। इसके बाद आईओए ने हॉकी इंडिया (एचआई) नाम की एक अलग संस्था का गठन किया जो भारत में हॉकी को नियंत्रित करने वाली अंतरिम इकाई के तौर पर काम कर रही है।
ज्योतिकुमारन ने न्यायालय के इस फैसले को लेकर कहा, "आईएचएफ को निलंबित किया जाना पूरी तरह गैरकानूनी था। इसमें कुछ लोगों का षड़यंत्र था। ये लोग भारतीय हॉकी का भला नहीं चाहते। मैं इतना कहूंगा कि हॉकी एक बार फिर सुरक्षित हाथों में आ गई है। दो वर्ष तक देश में कोई भी टूर्नामेंट नहीं हुआ। हम जल्द ही एक राष्ट्रीय चैम्पियनशिप आयोजित कराएंगे।"
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एचआई की अस्थाई समिति के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और आईएचएफ के चयनित उपाध्यक्ष असलम शेर खान ने कहा कि वह न्यायालय के फैसले को पढ़ने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करेंगे।
इधर, भारतीय महिला हॉकी महासंघ की सचिव अमृता बोस ने कहा है कि उनके महासंघ को आईएचएफ के साथ मिलकर काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। साथ ही वह अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के नियमों के मुताबिक चुनावों में भी आईएचएफ का साथ देने के लिए तैयार हैं।
बोस ने कहा कि एचआई ने भारतीय हॉकी को पांच वर्ष पीछे ढकेल दिया है। उन्होंने कहा, "हम पांच वर्ष पीछे जा चुके हैं। हमारे देश में आज कोई राष्ट्रीय आयोजन नहीं होते। हम देश में हॉकी का गौरव स्थापित करने के लिए फिर से काम करेंगे। इसके लिए लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत चुनाव कराने की जरूरत है और हम इसके लिए आईएचएफ के साथ हैं। खेल मंत्रालय को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:37 [IST]
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