सावरकर की याद में मुंबई में तैराकी प्रतियोगिता
विनायक दामोदर सावरकर जिन्हें वीर सावरकर भी कहा जाता है, आठ जुलाई 1910 को तैरकर अंग्रेजों के चंगुल से बच पाए थे। इसकी 100वीं वर्षगांठ उपलक्ष्य में स्वतंत्रतावीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक और एमेच्योर एक्वे टिक एसोसिएशन ने यह प्रतियोगिता आयोजित की।
प्रतियोगिता मानसून आने से एक महीने पहले ही आयोजित की गई क्योंकि उस दौरान समुद्र में लहरें चलने लगती हैं।
तैराकी प्रतियोगिता बांद्रा-वर्ली समुद्र किनारे से शुरू होकर बांद्रा में खत्म हुई। इनके बीच की दूरी ढाई किलोमीटर की है। इसमें 10 वर्ष लेकर 40 साल तक के 212 तैराकों ने हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता में 30 वर्षीय कुछ महिलाओं सहित सात विकलांगों ने भी भाग लिया।
सावरकर को अंग्रेज पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में 13 मार्च 1910 को गिरफ्तार किया था। उन्होंने जेल से भागने के अपनी योजना के बारे में अपने मित्र को पत्र लिखकर बताया था।
स्वतंत्रतावीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के एक अधिकारी ने बताया,"सावरकर को श्रद्धांजलि देने के लिए यह प्रतियोगिता आयोजित की गई।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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