पाकिस्तानी उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद रिहा हुए आसिफ
आईपीएल के दौरान प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के आरोप में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) द्वारा लगाया गया प्रतिबंध झेल रहे आसिफ को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद ही भारतीय आव्रजन अधिकारियों से मुक्ति मिल सकी।
नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के एक सूत्र ने बताया, "आसिफ के पास मौजूद यात्रा संबंधी दस्तावेज अधूरे थे। इस कारण उन्हें हवाई अड्डे पर घंटों बिताने पड़े। पाकिस्तानी उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें जाने दिया गया।"
अधिकारी ने नाम उजागर नहीं होने देने की शर्त पर बताया कि आसिफ के पास भारत में क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी वीजा है लेकिन वे व्यक्तिगत कार्यो के लिए उस वीजा के आधार पर भारत नहीं आ सकते।
बकौल अधिकारी, "आव्रजन अधिकारियों ने आसिफ को सिर्फ इसलिए हिरासत में लिया क्योंकि वह क्रिकेट खेलने के वीजा पर व्यक्तिगत कार्य के लिए भारत आए थे। अगर उन्हें यहां आना ही था तो उन्हें इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।"
यहां आसिफ पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है- चले थे हरी भजन को, ओटन लगे कपास। अब आसिफ भी क्या करें। उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि वीजा संबंधी इतनी छोटी सी भूल के लिए उन्हें इतनी जलालत झेलनी पड़ सकती है।
भारत में खेलने से संबंधित आसिफ के नाम जारी वीजा के मुताबिक वे अगले पांच साल तक भारत आकर आईपीएल में खेल सकते हैं। आसिफ ने आईपीएल के पहले संस्करण में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के लिए हिस्सा लिया था।
आसिफ आईपीएल के दूसरे सबसे महंगे पाकिस्तानी खिलाड़ी थे। दिल्ली की टीम ने तीन साल के लिए उनके साथ 650,000 डॉलर का करार किया था। लगभग साढ़े चार लाख डॉलर का भुगतान तो उन्हें हो गया था लेकिन 200,000 डॉलर का भुगतान बाकी था और इसी को हासिल करने के लिए आसिफ दिल्ली पहुंचे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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