राष्ट्रीय खेलों को लेकर झारखंड सरकार की किरकिरी
तीन वर्ष पहले जब झारखंड को मेजबानी मिली थी, तब इसके लिए 265 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन आधारभूत संरचना निर्माण की कछुआ चाल और आयोजन की तिथि टलते रहने के कारण अब इसका बजट एक हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
राज्य सरकार पहले ही कह चुकी है वह इस आयोजन के लिए केन्द्र सरकार से एक हजार करोड़ रुपये की मांग करेगी। राज्य के खेल मंत्री बंधु टिर्की भी मानते हैं कि आयोजन की तिथि बढ़ेगी तो बजट तो बढ़ेगा ही। हालांकि वह मानते हैं कि जिस रफ्तार से तैयारी चल रही है उसमें जून तक सभी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कर लिए जाने की संभावना है।
इधर, झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन (जेओए) के प्रशासनिक सचिव जय कुमार सिन्हा की मानें तो भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने जून में राष्ट्रीय खेल के आयोजन की तिथि जरूर दी है परंतु इस माह में भी आयोजन कराना उचित नहीं है। सिन्हा का मानना है कि जून माह में आउटडोर खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा।
सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय खेल के आयोजन की तिथि लगातार बढ़ने का कोई एक कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल आधारभूत संरचना तैयार नहीं होने के कारण ही तिथि बढ़ाई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड राज्य को वर्ष 2005 में 34वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन की मेजबानी मिली थी परंतु वर्ष 2007 में ही असम में 33वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन के कारण फरवरी, 2008 में झारखंड में इन खेलों का आयोजन करवाने का निर्णय लिया गया।
आधारभूत संरचना का अभाव बताते हुए इस आयोजन को नवंबर तक टाल दिया गया। नवंबर में वही समस्या दोहराई गई और आयोजन टाल दिया गया। इसके बाद 18 फरवरी, 2009 से खेलों के आयोजन की तिथि तय की गई परंतु एक बार फिर यह आयोजन जून तक के लिए टाल दिया गया है।
राज्य के कई खेल संघ हालांकि तिथि बढ़ने से प्रसन्न हैं परंतु लाख टके का सवाल यह है कि क्या गारंटी है कि इस बार नियत समय पर खेल का आयोजन हो ही जाएगा।
झारखंड महिला हॉकी संघ के कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार कहते हैं कि तिथि बढ़ने से राज्य की प्रतिष्ठा बच गई। अब चार माह में सब कुछ सही हो जाएगा और राष्ट्रीय खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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