Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

हमारे पास असली क्वींस बैटन लाई गई : सहारा (राउंडअप)

शनिवार शाम तक लखनऊ जिला प्रशासन यह कहता आ रहा था कि सहारा शहर में क्वींस बैटन की प्रतिकृति की रिले निकाली गई थी लेकिन सहारा अधिकारियों के खुलासे के बाद यह मामला और पेचीदा होता दिख रहा है।

जिला प्रशासन ने कहा था कि सहारा समूह के तीन अधिकारी क्वींस बैटन की प्रतिकृति बिना इजाजत के सहारा शहर में लेकर आए थे और अब प्रशासन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

इस संबंध में सहारा समूह के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन चीफ अभिजीत सरकार के उस बयान ने खलबली मचा दी है कि सहारा शहर में असल क्वींस बैटन लाई गई थी न कि नकली। सरकार ने कहा कि सहारा शहर में क्वींस बैटन को लखनऊ आते वक्त और लखनऊ से रायबरेली जाते वक्त लाया गया था।

सहारा अधिकारियों का दावा है कि खुद भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने सहारा शहर में क्वींस बैटन को ले जाने की अनुमति प्रदान की थी। कलमाडी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अच्छी तरह जानते हैं कि सुब्रत रॉय ने देश में खेलों के विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सरकार ने रॉय को 'देश में खेलों का सबसे बड़ा संरक्षक' करार देते हुए कहा कि रॉय खुद राष्ट्रमंडल खेलों की प्रोटोकॉल उपसमिति के अध्यक्ष हैं।

सरकार ने कहा, "शुक्रवार को रिले के सदस्य क्वींस बैटन के साथ सुब्रत रॉय से मिले। शनिवार को बैटन को एक बार फिर सहारा शहर लाया गया। इस दौरान प्रोटोकॉल संबंधी हर जरूरत पर ध्यान दिया गया और बैटन का कोई अपमान नहीं हुआ।"

इससे पहले, शनिवार सुबह जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि क्वीन्स बैटन की प्रतिकृति तैयार करने और उसकी रैली निकालने को लेकर सहारा समूह को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकारी ने बताया कि देश के लिए सम्मान का प्रतीक 'क्वींस बैटन' की प्रतिकृति तैयार करने और उसका अपमान करने के कारण सहारा समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

लखनऊ से जब 'क्वींस बैटन' की रैली रायबरेली के लिए रवाना हो गई तब सहारा के कुछ अधिकारियों ने इसकी प्रतिकृति के साथ सहारा शहर में इसकी रैली निकाली। गोमती नगर इलाके में स्थित सहारा शहर में ही सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय का निवास है। सहारा के अधिकारी अब इसी प्रतिकृति को असल बैटन बता रहे हैं।

लखनऊ के जिलाधिकारी अनिल सागर ने कहा, "यह सामने आया है कि राज काद्यान, श्रुति मेनन और अल्का लाम्बा क्वींस को लेकर सहारा शहर गए थे। बैटन का अपमान करने और इसकी प्रतिकृति के साथ बिना इजाजत रैली निकालने वाले सहारा के इन अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

काद्यान एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल और क्वींस बैटन रिले समिति के अध्यक्ष हैं जबकि लाम्बा एक सलाहकार हैं। मेनन समिति में परियोजना अधिकारी के तौर पर कार्यरत हैं।

सागर ने बताया कि जिला प्रशासन इन तीनों के बारे में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करेगा और सहारा समूह के खिलाफ मामला भी दर्ज करेगा। इन सभी मामलों पर केंद्र सरकार और खेल अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि आखिर अब तक सहारा समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की गई। सागर ने कहा, "अब तक तो इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।" इस संबंध में उन्होंने इससे अधिक जानकारी देने से इंकार कर दिया।

बाद में पता चला कि बैटन को सहारा शहर में लाने में शामिल तीनों लोगों ने बंद दरवाजे के भीतर सरकारी और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मंत्रणा की। यह बैठक तीन घंटे तक चली। बाद में तीनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी गलती के लिए प्रशासन से लिखित माफी मांग ली है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मीडिया के लोग भी मौजूद थे।

काद्यान ने कहा, "हां, हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं। ऐसा लगता है कि हमारे बीच संवाद की कमी हो गई थी। हमें इस संबंध में जिला प्रशासन की अनुमति लेनी चाहिए थी। हम बैटन को सुब्रत रॉय के पास इसलिए नहीं लेकर गए क्योंकि वह सहारा समूह के मालिक हैं बल्कि हम उनसे इस हैसियत से मिलने गए कि वह बैटन रिले समिति के सदस्य हैं। मैं यहां यह भी कहना चाहूंगा कि पहली बार हम सुब्रत रॉय के पास बैटन की प्रतिकृति लेकर गए थे।"

शुक्रवार दोपहर 12.30 बजे सहारा अधिकारियों ने जिला प्रशासन को फोन करके बैटन को सहारा शहर में स्वागत करने की इजाजत मांगी थी लेकिन जिलाधिकारी ने इससे साफ इंकार कर दिया था। सागर ने कहा, "हमने साफ कर दिया था कि रिले का कार्यक्रम तय हो चुका है और अंतिम समय में इसे कहीं और ले जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।"

अधिकारियों के मुताबिक रिले की समाप्ति के बाद जब मशाल को रायबरेली ले जाया जा रहा था जब पांच वाहनों में सवार लोग असली बैटन को लेकर सहारा शहर की ओर मुड़ गए थे।

सागर ने कहा, "आधिकारिक क्वींस बैटन जब लखनऊ से रायबरेली के लिए रवाना हो गई तब उसमें शामिल पांच वाहन कथित तौर पर निश्चित मार्ग छोड़कर सहारा शहर की ओर मुड़ गए।"

"जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने जब उनका पीछा किया तो देखा कि वे लोग पांच निजी वाहनों में सवार थे और सहारा शहर पहुंचकर उन्होंने क्वींस बैटन की प्रतिकृति निकाल ली और रिले के हिस्से के रूप में खुद को प्रदर्शित करने लगे।"

ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मशाल दो चरणों में राज्य के तकरीबन 19 शहरों से होकर गुजरेगी। इस दौरान इन शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मशाल यात्रा को सफल और सुरक्षित आयोजित कराने के लिए पूरे राज्य में सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

पहले चरण में मशाल शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, इलाहाबाद होते हुए वाराणसी से 13 जुलाई को बिहार के गया में प्रवेश करेगी। दूसरे चरण में 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के झांसी से प्रवेश करके ललितपुर और ताजनगरी आगरा जाएगी। यहां से 21 सितंबर को मशाल जयपुर के लिए रवाना होगी।

इसी साल तीन अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल-2010 की मशाल 25 जून को पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंची थी। उससे पहले उसने दुनिया भर में 170,000 किलोमीटर की यात्रा की। भारत में इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 20,000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए 30 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:40 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+