पीटरसन को बायकॉट और फ्लेचर का समर्थन, ईसीबी पर उतारा गुस्सा
समाचार पत्र 'डेली टेलीग्राफ' के मुताबिक बायकॉट का मानना है कि ईसीबी को पीटरसन का साथ देना चाहिए था। बकौल बायकॉट, "आखिर कप्तान नियुक्त करते वक्त ईसीबी ने पीटरसन से क्या अपेक्षा की थी। जब उसे मालूम था कि पीटरसन बेबाक और साफ छवि वाले हैं तो फिर उसने इस विवाद को यह रूप क्यों नहीं लेने दिया। मैं पीटरसन को बिल्कुल दोषी नहीं मानता।"
दूसरी ओर, फ्लेचर ने कहा कि एंड्रयू स्ट्रॉस को कप्तान बनाकर ईसीबी ने एक और गलत कदम उठाया है। वर्ष 2005 में इंग्लैंड को एशेज श्रंखला में जीत दिलाने वाले फ्लेचर ने कहा, "स्ट्रॉस अभी एकदिवसीय टीम में नहीं हैं जबकि ईसीबी का कहना है कि वह दोनों तरह के क्रिकेट में एक ही कप्तान चाहता है। ऐसे में ईसीबी का यह फैसला किसी चाल का नतीजा लगता है।"
उल्लेखनीय है कि पूर्व कप्तान माइकल वॉन को वेस्टइंडीज दौरे के लिए राष्ट्रीय टीम में जगह दिलाने के लिए पीटरसन ने मूर्स के साथ रार ठानी थी और जब वॉन को टीम में जगह नहीं मिली तो मूर्स और पीटरसन के बीच विवाद इतने गहरा गए कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर डाली।
पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुई टेस्ट श्रंखला के दौरान वॉन के कप्तानी पद से इस्तीफा देने के बाद से ही पीटरसन काफी आहत थे। वॉन की विदाई के बाद उन्हें कप्तानी सौंपी गई और उन्होंने अपने नेतृत्व में इंग्लैंड टीम को अंतिम टेस्ट मैच में जीत दिलाई लेकिन भारत के खिलाफ दिसंबर में खेली गई दो मैचों की टेस्ट श्रंखला में उनका जादू नहीं चल सका और टीम 0-1 से हार गई।
भारत से लौटने के बाद पीटरसन दो सप्ताह की छुट्टी पर चले गए। जाते-जाते वे मूर्स से कह गए कि खराब फार्म में होने के बावजूद वे वॉन को वेस्टइंडीज जाने वाली टीम में देखना चाहते हैं।
पीटरसन के अनुरोध के बावजूद वॉन को वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया और तभी से पीटरसन और मूर्स का विवाद जोर पकड़ने लगा। कुछ दिनों के भीतर यह विवाद इतना गहरा गया कि कोच और कप्तान को अपने पद से हटना पड़ा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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