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सिर्फ धौनी ही पर क्यों गिरे गाज?

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। ट्वेंटी-20 विश्व कप में एक और नाकामी ने भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया है। टीम के खराब प्रदर्शन की गाज कप्तान महेंद्र सिंह धौनी पर गिरने की खबरें जोरों पर हैं। तमाम अटकलों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिर्फ धौनी ही क्यों, हर उस शख्स पर गाज क्यों न गिरे जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से टीम की हार के लिए जिम्मेदार रहा है।

इसके लिए जिम्मेदार सभी कारकों और कारणों की बात की जाए तो दोषियों की एक बड़ी फौज तैयार हो जाएगी। इनमें कप्तान, खिलाड़ी, टीम का सहयोगी स्टाफ, प्रबंधक, चयनकर्ता और यहां तक खुद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के आला अधिकारी शामिल हैं।

सबसे पहले बात धौनी की। एक बार यह मान भी लिया जाए कि एक कप्तान के तौर पर उनके कुछ फैसले टीम की हार का कारण बने तो फिर वह दोषी हैं। ट्वेंटी-20 विश्व कप के सुपर-8 दौर के दौरान धौनी की गलतियां उनकी कप्तानी के लिए खतरा बन गई हैं। टीम और बल्लेबाजी क्रम के चयन तथा रणनीति को लेकर उनकी नाकामी उन पर भारी पड़ती दिख रही है। खासतौर पर धौनी द्वारा धीमी पिचों पर आस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला करना ज्यादा गंभीरता से लिया जा रहा है।

इसके लिए जाहिर तौर पर उनकी कप्तानी जानी चाहिए लेकिन एक खिलाड़ी के तौर धौनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वह एक अच्छे कप्तान और भारतीय टीम का 'चेहरा' हैं और अपने आत्मसंयम से उन्होंने इस छवि को कभी नुकसान नहीं पहुंचने दिया है। इस लिहाज से टीम कप्तान न सही लेकिन ख्रिलाड़ी के तौर पर टीम में उनका स्थान बनता है।

अब बात करते हैं प्रबंधक की। रंजीब बिस्वाल को जब यह मालूम था कि खिलाड़ी मैच से पहले और मैच के बाद पबों में जाते हैं और पार्टियों में मौज-मस्ती करते हैं तो उन्होंने इसकी शिकायत बीसीसीआई से क्यों नहीं की। और अगर उन्होंने बीसीसीआई से इसकी शिकायत की है तो फिर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के दौरान ही उन खिलाड़ियों को दंडित क्यों नहीं किया, जिनके लिए नियम और आचार संहिता 'ठेंगा' दिखाने वाली चीज है।

बिस्वाल तो इसके लिए दोषी हैं ही, यहां लापरवाही और करोड़ों देशवासियों के साथ विश्वासघात करने की फांस बीसीसीआई के गले में भी गिरती है। साथ ही साथ ऐसे खिलाड़ियों के चयन के लिए चयनकर्ता भी जिम्मेदार हैं। टीम के चयन में कप्तान और कोच की भी सुनी जाती है, इस लिहाज से गैरी कर्स्टन भी दोषी हैं। ऐसे में तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन कर्स्टन ने गुरुवार को पत्रकार सम्मेलन बुलाकर अपना पक्ष साफ कर दिया है कि टीम के सदस्य उनकी एक नहीं सुनते थे।

कर्स्टन को श्रेष्ठ दर्जे का पेशेवर माना जाता है और इस कारण उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को बोर्ड गंभीरता से ले सकता है। कर्स्टन ने कहा था कि टीम के आठ सदस्यों का वजन अधिक है और तीन खिलाड़ी फिटनेस और अनुशासन के लिहाज से 'किसी काम' के नहीं हैं। जब टीम के चयन को लेकर कोच की राय मांगी गई होगी तब उसमें कर्स्टन की संतुति शामिल रही होगी, तो फिर कर्स्टन क्यों नहीं मानते कि वह भी एक लिहाज से दोषी हैं।

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, धौनी और उनकी टीम के समर्थन मे आए हैं लेकिन इन सबके बीच सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि विश्व कप के जरिए भारतीय टीम की कई ऐसी कमियां उगाजर हुई हैं, जिन्हें लेकर विश्व कप से पहले ही काम होना चाहिए था क्योंकि सबको पता था कि वेस्टइंडीज में उनका सामना धीमी पिचों से होने वाला है। इस बारे में कस्र्टन से भी सवाल पूछे जाएंगे। इनसे बचने के लिए उनके पास कोई रास्ता नहीं है क्योंकि एक खिलाड़ी और कोच के तौर पर वह कैरेबियाई पिचों और वहां के हालात से अच्छी तरह परिचित हैं।

जिन खिलाड़ियों पर प्रदर्शन, फिटनेस और अनुशासन के संदर्भ में उंगलियां उठ रही हैं उनमें युवराज सिंह का नाम सबसे ऊपर है। कर्स्टन ने जिन खिलाड़ियों को 'ओवरवेट' और अनुशासनहीन करार दिया है, उनमें युवराज का भी नाम है। । इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान भी मैदान के बाहर युवराज के तौर-तरीकों को लेकर खासी चर्चा हुई थी।

इस संदर्भ में युवराज के साथ हरभजन के नाम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिरी गेंद पर छक्का देकर टीम की हार तय करने वाले आशीष नेहरा, अनुभव को ताक पर रखकर दिशाहीन गेंदबाजी करने वाले जहीर खान, अपने चयन को बेकार साबित करने वाले रोहित शर्मा, चयन प्रमुख श्रीकांत के पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक मुरली विजय, हर गेंद पर छक्का लगाने का प्रयास करने वाले यूसुफ पठान, पीयूष चावला, रवींद्र जडेजा, दिनेश कार्तिक और यहां तक की गौतम गंभीर के नाम भी शामिल हैं।

मतलब साफ है कि प्रदर्शन का मूल्यांकन मानक तरीके से किया जाए और सभी के लिए एक ही नियम लागू किए जाएं तो में तो लगभग पूरी भारतीय टीम बदलनी पड़ेगी। क्या बीसीसीआई इसके लिए तैयार है?

ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को चाहिए। कप्तान बदलने या फिर कुछ खिलाड़ियों को बदलकर या 'आराम' देकर इन सवालों पर फौरी तौर पर लीपा-पोती तो जरूर की जा सकती है लेकिन अपना पैसा और समय क्रिकेट के पीछे 'बर्बाद' करने वाले करोड़ों देशवासियों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता।

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए दोषी सिर्फ धौनी या कर्स्टन या फिर युवराज नहीं बल्कि पूरा वह तंत्र है, जो खुद 'अनियंत्रित और दिशाहीन' अवस्था में देश में क्रिकेट को कथित तौर पर 'नियंत्रित' कर रहा है। गाज गिरनी चाहिए तो इस तंत्र पर।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:36 [IST]
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