'क्वीन्स बैटन' की प्रतिकृति को लेकर सहारा कानूनी पचड़े में (लीड-1)
एक अधिकारी ने बताया कि देश के लिए सम्मान का प्रतीक 'क्वींस बैटन' की प्रतिकृति तैयार करने और उसका अपमान करने के कारण सहारा समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
लखनऊ से जब 'क्वींस बैटन' की रैली रायबरेली के लिए रवाना हो गई तब सहारा के कुछ अधिकारियों ने इसकी प्रतिकृति के साथ सहारा शहर में इसकी रैली निकाली। गोमती नगर इलाके में स्थित सहारा शहर में ही सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय का निवास है।
लखनऊ के जिलाधिकारी अनिल सागर ने कहा, "क्वींस बैटन का अपमान करने और इसकी प्रतिकृति के साथ बिना इजाजत रैली निकालने वाले सहारा के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
सागर ने बताया कि कानूनी कार्रवाई के अलावा सहारा के खिलाफ मामला भी दर्ज किया जाएगा, जिस पर भारत सरकार और खेल अधिकारी कार्रवाई करेंगे।
बकौल सागर, "सहारा अधिकारियों का यह कदम निश्चित तौर पर निंदनीय है और इससे क्वींस बैटन का अपमान हुआ है। इससे लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। खेल जगत के लोग इससे बेहद आहत हैं।"
सागर ने कहा कि इस बात की भी जांच की जाएगी कि किस तरह से प्रतिकृति वाली क्वींस बैटन मुख्य रिले का हिस्सा बनी और फिर सहारा शहर में उसका अलग से रिले कैसे आयोजित किया गया।
सागर ने कहा, "आधिकारिक क्वींस बैटन जब लखनऊ से रायबरेली के लिए रवाना हो गई तब उसमें शामिल पांच वाहन कथित तौर पर निश्चित मार्ग छोड़कर सहारा शहर की ओर मुड़ गए।"
"जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने जब उनका पीछा किया तो देखा कि वे लोग पांच निजी वाहनों में सवार थे और सहारा शहर पहुंचकर उन्होंने क्वींस बैटन की प्रतिकृति निकाल ली और रिले के हिस्से के रूप में खुद को प्रदर्शित करने लगे।"
लखनऊ के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) राजीव कृष्ण ने कहा, "हमारे पास जो जानकारी आई है, उसके मुताबिक प्रतिकृति के साथ रिले आयोजित करने वाले लोग अब भी सहारा शहर में ही मौजूद हैं।"
कृष्ण ने जब सहारा के उन अधिकारियों की पहचान पूछी गई तब उन्होंने कहा, "इस संबंध में हम निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते। क्वींस बैटन की प्रतिकृति के साथ रिले निकालने वाले लोगों में महिलाएं भी शामिल रही हैं। इसमें से एक महिला का नाम अल्का लाम्बा है।"
कृष्ण ने कहा कि वास्तविक बैटन सफलतापूर्वक राय बरेली पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, "हमने इस बात की पुष्टि कर ली है। क्वींस बैटन सुरक्षित रायबरेली पहुंच चुकी है। उसकी सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।"
ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मशाल दो चरणों में राज्य के तकरीबन 19 शहरों से होकर गुजरेगी। इस दौरान इन शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मशाल यात्रा को सफल और सुरक्षित आयोजित कराने के लिए पूरे राज्य में सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
पहले चरण में मशाल शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, इलाहाबाद होते हुए वाराणसी से 13 जुलाई को बिहार के गया में प्रवेश करेगी। दूसरे चरण में 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के झांसी से प्रवेश करके ललितपुर और ताजनगरी आगरा जाएगी। यहां से 21 सितंबर को मशाल जयपुर के लिए रवाना होगी।
इसी साल तीन अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल-2010 की मशाल 25 जून को पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंची थी। उससे पहले उसने दुनिया भर में 170,000 किलोमीटर की यात्रा की। भारत में इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 20,000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए 30 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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