कलमाडी के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है उच्चायोग
लंदन, 2 अगस्त (आईएएनएस)। ब्रिटेन स्थित भारतीय उच्चयोग ने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति (सीजीओसी) के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी के उन आरोपों का जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उच्चयोग के एक कनिष्ठ क्लर्क ने सीजीओसी के सामने लंदन स्थित एक भारतीय कंपनी की सिफारिश की थी, जिसे अक्टूबर में आयोजित क्वींस बैटन रिले समारोह के दौरान सेवाओं के बदले सीजीओसी ने एक बड़ी राशि उपलब्ध कराई थी।
उच्चायोग के प्रवक्ता रवीश कुमार ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान सोमवार को कहा, "हम सभी पक्षों की विस्तार से जांच कर रहे हैं।"
सूत्रों का कहना है कि उच्चायोग इस संबंध में उसके तथा सीजीओसी के बीच ईमेल के जरिए हुए सभी संवादों का विस्तार से अध्ययन कर रहा है। इसमें जूनियर क्लर्क राजू सबास्टियन द्वारा भेजे गए ईमेल की विशेष रूप से पड़ताल की जा रही है, जिन पर कलमाडी ने लंदन की कंपनी ए.एम फिल्म्स की सिफारिश करने का आरोप लगाया है। यह कंपनी भारतीय मूल के व्यक्ति आशीष पटेल की है।
कलमाडी ने ब्रिटिश कंपनी ए. एम. फिल्म्स को भुगतान के मामले में कथित अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए इस संबंध में रविवार को उच्चायोग के साथ हुए संवादों का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखा था। उससे एक दिन पहले शनिवार को कलमाडी ने पत्रकार सम्मेलन में इन आरोपों का खंडन किया था।
कलमाडी ने पत्रों के माध्यम से लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के उस कथन को गलत साबित करने का प्रयास किया, जिसमें कहा गया है कि इस विवाद में शामिल ए.एम. फिल्म्स नाम की कंपनी की सिफारिश उच्चायोग ने नहीं की थी।
भारतीय उच्चायोग ने शनिवार को इस बात से इंकार किया था कि उसने लंदन में होने वाले क्वींस बैटन रिले के लिए लंदन स्थित एम.एम. फिल्म्स का नाम सीजीओसी के सामने रखा था।
कलमाडी ने इस संबंध में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीजीओसी पर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया था और फिर रविवार को भी वह अपनी बात पर अड़े रहे।
कलमाडी ने रविवार को कहा कि भारतीय उच्चयोग ने भी उसके सामने ए.एम. फिल्म्स की पैरवी की थी। यही नहीं, कलमाडी के मुताबिक उच्चयोग ने ए.एम. फिल्म्स की एक सहयोगी कंपनी की भी उसके सामने पैरवी की थी, जो मुख्य रूप से लंदन में कार किराए पर देने, मोबाइल स्क्रीन लगाने तथा मोबाइल शौचालय लगाने का काम करती है।
कलमाडी ने अपनी बात को साबित करने के लिए साक्ष्य के तौर पर तीन पत्र सामने रखे। उनके मुताबिक इनमें से एक पत्र भारतीय उच्चायोग ने उन्हें लिखा था जबकि दो अन्य पत्रों में से एक में राजू सबास्टियन का जिक्र है। राजू उच्चायोग में ही कार्यरत है।
उच्चायोग का कहना है कि राजू को इस संबंध में सीजीओसी को भेजे गए किसी प्रकार के ईमेल की जानकारी नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए सीजीओसी और उच्चायोग के बीच ईमेल के जरिए हुए सभी संवादों और ईमेल पतों को खंगाला जा रहा है।
असल विवाद इस बात का है कि ब्रिटेन का टैक्स विभाग यह जानना चाहता है कि क्या अक्टूबर में ली गई सेवाओं के बदले सीजीओसी द्वारा ए.एम. फिल्म्स को किए गए भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता बरती गई है?
सीजीओसी का दावा है कि उसने ए.एम. फिल्म्स और उसकी सहयोगी कंपनी ए.एम. कार एंड वैन हायर को करीब 45,000 पाउंड का भुगतान किया है लेकिन ब्रिटेन के टैक्स अधिकारियों ने दावा किया है कि कंपनी के खाते में विगत आठ महीने से बराबर 25,000 पाउंड जमा किए जा रहे हैं।
कंपनी के मालिक पटेल ने टैक्स विभाग के दावों का खंडन किया है। उसने कहा है कि उसे सीजीओसी से अब तक 247,000 पाउंड प्राप्त हुए हैं, जिसमें से 147,000 पाउंड यातायात और अन्य किरायों से जुड़े खर्चे के लिए दिया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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