राष्ट्रमंडल खेल (हॉकी) : जरा सी चूक भारत को पड़ सकती है महंगी
पुरुष टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी क्षमता के साथ न्याय नहीं किया है। 1998 में हॉकी को पहली बाार राष्ट्रमंडल खेलों में जगह मिली, उसके बाद से भारतीय टीम तीसरी बार इन खेलों में हिस्सा ले रही है।
1998 में कुआलाम्पुर में उसे चौथा स्थान मिला था जबकि उसने 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लिया था। 2006 में मेलबर्न मे आयोजित पिछले संस्करण में भारतीय टीम निराशाजनक तौर पर छठे स्थान पर रही थी।
रविवार को पाकिस्तान पर मिली 7-4 की जीत ने भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उसका प्रदर्शन निस्संदेह बेहद उम्दा रहा था लेकिन इस प्रदर्शन को आगे के मैचों में भी जारी रखने की जरूरत है।
इसके लिए अनुशासन की सबसे अधिक जरूरत होती है। टीम को अपने मन से यह बात निकाल देनी चाहिए कि उसने अपने पिछले मैच में बड़ी जीत हासिल की है। हर मैच में नया किस्सा लिखा जाता है और इस लिहाज से भारतीय खिलाड़ियों को नए सिरे से प्रयास करना होगा।
पाकिस्तान के साथ खेले गए मैच से एक अच्छी बात यह सामने आई कि अहम मुकाबलों में खिलाड़ियों में तालमेल की कोई कमी नहीं रहती लेकिन एक खराब बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 11 पेनालटी कार्नर हासिल किए परंतु उनमें से सिर्फ दो को गोल में तबदील कर सके।
पेनालटी कार्नर को गोल में बदलने का यह औसत अहम मुकाबलों में महंगा पड़ सकता है। एक बार हमारे साथ ऐसा हो भी चुका है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने कुल पांच पेनालटी कार्नर हासिल किए लेकिन वह एक को भी गोल में नहीं बदल सकी जाकि इतने मौकों पर तो बढ़त हासिल की जा सकती थी।
इंग्लैंड के खिलाफ होने वाला मैच काफी अहम है और यही कारण है कि टीम के कोच जोस ब्रासा ने कहा है कि मंगलवार को उनकी रणनीति बिलकुल अलग होगी।
ब्रासा ने कहा," इंग्लैंड टीम की शैली हमारी शैली से बिलकुल भिन्न है। उसकी शैली आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान से भी अलग है। वह हमारी शैली से परिचित है और यही कारण है कि हमने उसके खिलााफ होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले के लिए अलग रणनीति पर चलने का फैसला किया है"
भारतीय टीम का अब तक का सफर अच्छा नहीं रहा है। पहले मैच में मलेशिया के खिलााफ उससे बड़ी जीत की उम्मीद थी लेकिन कड़े संघर्ष के बाद उसे 3-2 से जीत मिल सकी। मलेशिया के खिलाफ टीम के खेल में कई तरह की खामियां थीं और उन्हीं का खामियाजा टीम को आस्ट्रेलिया के खिलााफ भुगतना पड़ा, जहां उसे 2-5 से करारी शिकस्त मिली।
इसके बाद भारत ने पूल-ए की सबसे कमजोर टीम स्कॉटलैंड को 4-0 से पराजित किया। यह मैच अंक पाने के लिहाज से अहम था लेकिन सीखने के लिहाज से यह भारतीय खिलाड़ियों के लिए बिलकुल भी फायदेमंद नहीं था।
पाकिस्तान को हराकर भारतीय खिलाड़ियों ने बेशक अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है लेकिन इस उम्मीद को पदक में बदलने के लिए उसे अभी और दो मैच जीतने हैं। इंग्लैंड उसके सामने पहला रोड़ा है और बहुत संभव है कि फाइनल में उसका सामना आस्ट्रेलिया से हो, जो मंगलवार को ही न्यूजीलैंड के साथ भिड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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