क्या है देश की तरफ़ से खेलने की योग्यता?
वैसे तो इसका सीधा जवाब ये होना चाहिए कि वे सभी जो इस देश के नागरिक हैं, खेलने के योग्य हैं.
लेकिन बहुत नज़दीक से देखें तो जवाब इतना आसान नहीं है, क्योंकि ऐसी तमाम मिसालें हैं जिन्होंने भारतीय मूल के होने के बावजूद किसी और देश के लिए खेलने का फ़ैसला किया.
इनमें से कुछ अमरीका या ब्रिटेन के नागरिक हैं क्योंकि वे उन देशों में पैदा हुए.
तो क्या उन्हें भारत की तरफ़ से खेलने का हक़ सिर्फ़ इसलिए नहीं मिलना चाहिए क्योंकि तकनीकी आधार पर वे भारत के नागरिक नहीं हैं?
नई नीति
खेल मंत्रालय ने अब एक नीति बनाई है कि सिर्फ़ 'असली' भारतीय यानी भारत का पासपोर्ट रखने वाला व्यक्ति ही देश का प्रतिनिधित्व कर सकेगा. इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है कि आयातित 'प्रतिभा' को भारतीय नागरिक पर क्यों तरजीह दी जाए, फिर चाहे आयातित खिलाड़ी भारतीय नागरिक से कहीं अधिक अच्छा ही क्यों न हो.
भारतीय मूल के कई ऐसे खिलाड़ी हैं, ख़ासकर टेनिस में, जो देश का प्रतिनिधित्व तो करते हैं, लेकिन अमरीकी नागरिक हैं.
मुझे नहीं पता कि उन्होंने भारत से खेलने के फैसला इसलिए किया क्योंकि वे अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं या फिर इसलिए कि उनका प्रदर्शन इतना दमदार नहीं था कि अपने अपनाए गए देश के लिए खेलने की योग्यता रखते.
आंद्रे आगासी मूल रूप से ईरान के रहने वाले थे, लेकिन अमरीका की तरफ़ से खेले
हम उनकी राष्ट्रभक्ति पर भी संदेह नहीं कर सकते क्योंकि देखा गया है कि प्रवासी भारतीय मूल के लोग दुनिया भर में जहाँ कहीं भी हैं, वहाँ वे स्टेडियम में पहुँचकर भारतीय टीम की जमकर हौसलाअफ़जाई करते हैं.
मैं ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसे परिवार को जानता हूँ जो अपने दो बच्चों को भारतीय फ़िल्में इसलिए दिखाया करता था ताकि वे भारतीय सभ्यता और संस्कृति से रूबरू हो सकें.
मुझे नहीं पता कि उन बच्चों ने इसे कितना आत्मसात किया होगा, क्योंकि उनमें से एक बच्चा तो अभी-अभी चलना सीखा था और दूसरा बोलना.
कई सवाल
अगर वे कल भारत के लिए खेलने के योग्य हुए तो तब भी क्या हम उनकी राष्ट्रीयता पर सिर्फ़ इसलिए शक करेंगे कि उनके पासपोर्ट पर ऑस्ट्रेलियाई है.
खेलों के इतिहास के पन्ने पलटें तो तमाम मिसालें मिल जाएँगी, जिसमें अपनी जड़ें छोड़कर खिलाड़ी ने किसी और देश का प्रतिनिधित्व किया और नाम रोशन किया.
ये भी आसान नहीं है कि अमरीका जैसे देश की नागरिकता सिर्फ़ इसलिए ठुकरा दी जाए क्योंकि इससे आपको भारत की तरफ़ से खेलने का मौका मिलेगा
| |
आंद्रे आगासी की जड़ें ईरान में थी, लेकिन उन्होंने अमरीका की तरफ़ से खेलने का फैसला किया क्योंकि वो उसका पासपोर्ट रखते थे.
ज़ोला बड दक्षिण अफ़्रीका में पैदा हुईं, लेकिन अस्सी के दशक में उन्हें दक्षिण अफ़्रीका की तरफ़ से ओलंपिक में खेलने की इज़ाजत नहीं मिली तो उन्होंने ब्रिटेन का रुख़ किया और ओलंपिक में हिस्सेदारी की हसरत पूरी की.
तो सवाल ये उठता है कि प्रकाश अमृतराज या शिखा ओबेराय अगर आगासी की तरह अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने का दम रखते तो क्या वे तब भी भारत के लिए खेलना चाहते? इन सवालों के जवाब हरगिज़ आसान नहीं हैं.
ये भी आसान नहीं है कि अमरीका जैसे देश की नागरिकता सिर्फ़ इसलिए ठुकरा दी जाए क्योंकि इससे आपको भारत की तरफ़ से खेलने का मौका मिलेगा.
अमरीकी नागरिक के रूप में मिलने वाले फायदे ठुकराकर क़ानूनी तौर पर भारत का नागरिक बनने से ज़्यादा आसान शायद तिरंगे को चूमना और उसे अपनी आत्मा में बसाना है.
- Male
- Female
- Others
- Under 18
- 18 to 25
- 26 to 35
- 36 to 45
- 45 to 55
- 55+


Click it and Unblock the Notifications
