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क्रिकेट की जगह लेगा फुटबॉल: मथायस

पीएम तिवारी

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

जर्मनी के महान फुटबॉलर और विश्व कप विजेता टीम के कप्तान लोथार मथायस ने कहा है कि अगले दो दशक में भारत में फुटबाल क्रिकेट की जगह ले सकता है.

उन्होंने कहा कि भारत में लोग क्रिकेट से बेशुमार प्यार करते हैं, लेकिन अगर सबने मिल कर फुटबॉल को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया तो अगले 10-20 सालों में यह यहां क्रिकेट की जगह ले सकता है.

मथायस ने शुक्रवार को कोलकाता में फीफा विश्व कप के दुनिया भर के दौरे के पहले पड़ाव के दौरान इसका औपचारिक अनावरण किया.

इस विश्व कप को यहां साल्टलेक स्टेडियम में रविवार तक रखा जाएगा. इस मौके पर प्रायोजकों के अलावा कई जाने-माने फुटबॉलर भी मौजूद थे.

मथायस ने उम्मीद जताई है कि इस साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाला विश्व कप स्पेन जीत सकता है, क्योंकि अर्जेंटीना और ब्राजील के मुक़ाबले उसका पलड़ा भारी है.

वे अर्जेंटीना के फुटबॉलर डिएगो माराडोना को अब तक का बेहतरीन फुटबॉलर मानते हैं.

उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी माराडोना या रोनाल्डो नहीं बन सकता. लेकिन युवा खिलाड़ियों को निखारने पर उनकी प्रतिभा उभर सकती है. खेल का आनंद लेना सबसे महत्वपूर्ण है.

विश्व कप में जीत की संभावनाओं का जिक्र करते हुए मथायस ने कहा कि स्पेन के पास बेहतरीन खिलाड़ी हैं.

उन्होंने कहा, ''स्पेन की टीम में वह सब कुछ है, जो किसी टीम को विश्व चैम्पियन बनाने के लिए जरूरी होता है. इसलिए मेरी नज़र में अबकी उसकी दावेदारी ब्राजील और अर्जेंटीना के मुकाबले मजबूत है.''

मथायस की अगुवाई में जर्मनी ने अर्जेंटीना को हराकर ही 1990 में विश्व कप जीता था.

उनका कहना था,''मैंने माराडोना से बेहतर खिलाड़ी नहीं देखा. अर्जेंटीना के खिलाफ खेलना हमेशा अच्छा रहा है. उनके ख़िलाफ़ खेलते हुए मैंने कभी अपनी एकाग्रता नहीं टूटने दी. मैं माराडोना के ख़िलाफ़ पहली बार 1982 में एक नुमाइशी मैच में खेला था. वह बेहतरीन खिलाड़ी थे.''

माराडोना ने हाल में इस जर्मन मिडफील्डर को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रतिद्वंद्वी करार दिया था.

उसके जवाब में मथायस ने कहा कि हम एक दूसरे का काफी सम्मान करते हैं.

उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 में माराडोना अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फार्म में थे. उनके बिना उस साल अर्जेंटीना विश्व चैंम्पियन नहीं बन सकता था.

मथायस ने कहा कि मौजूदा दौर में अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लियोनेल मेसी सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं.

अहम क्षण

उन्होंने 1990 में विश्व कप जीतने को अपने करियर का सबसे अहम क्षण करार दिया.

मथायस ने अतीत के पन्ने पलटते हुए कहा कि ‘उस मैच में माराडोना अपना बेहतरीन खेल नहीं दिखा पाए थे. इसलिए हमें अर्जेटीना के पीटने में आसानी हुई थी.’

वे कहते हैं कि ‘एक कप्तान के तौर पर विश्व कप अपने हाथों में लेने के अनुभव को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.’

मथायस के नाम जर्मनी की ओर से सबसे ज्यादा डेढ़ सौ मैच खेलने का रिकार्ड है.

दो महीने पहले जर्मनी में अपनी कटु टिप्पणी का जिक्र करते हुए मथायस ने कहा,''भारत में लोग मेरी जर्सी का सम्मान करते हैं. देश के लिए लंबे समय तक खेलने वालों को कुछ सम्मान तो मिलना ही चाहिए.''

उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में अफ्रीका और एशिया की कई टीमें दुनिया की दस बेहतरीन टीमों की सूची में शामिल हो सकती हैं.

टोंगो की फुटबाल टीम पर बीते सप्ताह हुए हमले के बारे में पूछने पर मथायस ने कहा कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते.

इस समस्या का समाधान मेरे हाथों में नहीं है. इस हमले का फुटबॉल से कुछ लेना-देना नहीं था.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:12 [IST]
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