देशपांडे ने पुणे स्थित सिटी कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक की हैसियत से उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया है कि बोली प्रक्रिया में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और उनके परिजन भी शामिल रहे हैं। देशपांडे के मुताबिक उस बोली में उन्होंने 'व्यक्तिगत हैसियत' से हिस्सा लिया था।
इस संबंध में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शशांक मनोहर ने शनिवार को चौंकाने वाला बयान दिया था। मनोहर ने देशपांडे के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि उन्होंने सिटी कार्पोरेशन के नाम से ही बोली लगाई थी।
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देशपांडे को 31 जनवरी को कंपनी की ओर से उस बोली में शिरकत करने को कहा गया था लेकिन देशपांडे ने कहा है कि जनवरी में लिया गया वह फैसला मार्च में वापस ले लिया गया था। कंपनी ने साफ कर दिया था कि वह कंपनी के नाम पर बोली में हिस्सा नहीं ले सकते।
देशपांडे ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान कहा, "निविदा पत्र सिटी कार्पोरेशन के नाम पर खरीदा गया था लेकिन मैं उससे मार्च में अलग हो गया था। मैंने आईपीएल को दस्तावेजों में इस बात की जानकारी दी थी कि बोली हासिल करने के बाद मैं क्लब को चलाने के लिए एक नई कंपनी गठित करुं गा। जनवरी में कंपनी द्वारा लिया गया फैसला पहले ही सबके सामने आ चुका है।"
"उसका जिक्र नीलामी से जुड़े दस्तावेजों में भी है। इसमें कोई बात छुपाई नहीं गई है। इसके बाद सिटी कार्पोरेशन ने नीलामी से अलग होने का फैसला किया था। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि मैं 17 मार्च को भेजे गए उस पत्र के साथ छेड़छाड़ कैसे कर सकता हूं, जो मैंने 21 मार्च को कई अन्य दावेदारों के सामने आईपीएल गवर्निग काउंसिल के सामने पेश करता हूं।"
इस संबंध में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा), उसके अध्यक्ष पवार और उनकी सांसद पुत्री सुप्रिया सुले ने भी अपने बयान दिए हैं। पवार और सुले ने शुक्रवार को कहा था कि उनका और उनके परिवार को इस नीलामी से कोई संबंध नहीं रहा है।
रविवार को इस संबंध में राकांपा ने भी पवार का बचाव किया। पार्टी ने साफ कर दिया कि सिटी कार्पोरेशन ने मार्च में हुई इस नीलामी से खुद को दूर कर लिया था, लिहाजा इस संबंध में पवार और उनके परिजन किसी भी दृष्टिकोण से नीलामी में शामिल नहीं रहे हैं।
राकांपा के प्रवक्ता डी.पी. त्रिपाठी ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि कंपनी ने जनवरी में देशपांडे को इस नीलामी में शामिल होने का अधिकार दे दिया था लेकिन मार्च में कंपनी ने अपने उस फैसले को रद्द कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि पवार और उनके परिजनों का सिटी कार्पोरेशन में 16.2 फीसदी हिस्सेदारी है और इसी संबंध में एक प्रमुख मीडिया ग्रुप ने खबर दी थी कि पवार और उनका परिवार पुणे टीम की नीलामी में शामिल रहा था, जिसे बाद में सहारा समूह ने खरीद लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।