क्रिकेट के दीवानों को मुरलीधरन का सलाम
अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच में खेलते हुए मुरली ने भारत के प्रज्ञान ओझा का विकेट लेने के साथ यह मील का पत्थर स्थापित किया। मुरली ने गॉल टेस्ट में 191 रन पर कुल आठ विकेट झटके। मुरलीधरन विश्व के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 1000 से अधिक विकेट लिए हैं। उन्होंने 133 टेस्ट मैचों में अब तक कुल 800 विकेट झटके हैं जबकि 337 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 515 विकेट दर्ज हैं।
28 अगस्त 1992 को आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में अपने करियर का पहला टेस्ट मैच खेलने वाले मुरली ने टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 67 बार पारी में पांच और 22 बार मैच में दस विकेट झटके हैं। इसके अलावा 11 ट्वेंटी-20 मैचों में उन्होंने 13 विकेट झटके हैं। मुरली के नाम कुल 1328 विकेट हैं।
मुरली ने अपने सम्मान में आयोजित समारोह के दौरान इंग्लैंड के पूर्व कप्तान टोनी ग्रेग से बातचीत के दौरान कहा, "मैं क्रिकेट में रुचि रखने वाले अपने देश के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे सहित उन तमाम लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जो आज मेरे रिकार्ड को बनते देखने के लिए यहां पहुंचे। मैं अपनी इस सफलता से बेहद खुश हूं और यही मानता हूं कि इन सबके सहयोग, प्यार और समर्थन के बिना मैं इस मुकाम पर हरगिज नहीं पहुंच पाता।"
इस महान अवसर का गवाह बनने के लिए गॉल स्टेडियम में मुरली का पूरा परिवार मौजूद था। उनकी मां, पत्नी माधीमालार, पुत्र नरेन और उनके सभी भाइयों ने इस शानदार पल का लुत्फ उठाया। इसके अलावा उनके हजारों प्रशंसकों ने भी इस महान क्षण को जमकर जिया। मुरली के इस रिकार्ड के इंतजार में गॉल स्टेडियम खचाखच भर गया था।
इतिहास बनाने के बाद मुरली को उनके साथियों ने घेर लिया। सबने उन्हें गले लगाकर बधाई दी। मैदान से पेवेलियन की ओर लौटते वक्त उनके दो साथियों ने उन्हें कंधों पर उठा रखा था और मुरली ने वह गेंद ऊपर उठा रखी थी, जिससे उन्होंने इतिहास कायम किया।
मुरली ने कहा कि वह 1995 और 2000 के बीच के दौर को अपने करियर का सबसे संघर्षपूर्ण दौर मानते हैं क्योंकि उस दौरान उन्हें कई बार अनचाहे तौर पर चकिंग का आरोप झेलना पड़ा था।
मुरली ने कहा, "1995 में हुई पहली घटना से मैं निराश था। मैंने नहीं सोचा था कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में आने के तीन वर्ष बाद ही मुझे चकर करार दिया जाएगा लेकिन मैंने हार नहीं मानी और पूर्व कप्तान अरविंद डी सिल्वा की सलाह पर अमल करता गया। मेरे लिए अरविंद के शब्द रामवाण की तरह थे। मैं उन पर चलते हुए मुश्किलों से निकलने में सफल रहा।"
मुरली ने यह भी कहा कि उन्हें अपने खिलाफ चकिंग का आरोप लगाने वाले किसी खिलाड़ी या अंपायर से कोई शिकायत नहीं। बकौल मुरली, "मेरे मन में किसी के लिए दुर्भावना नहीं है। जिन्होंने ऐसा किया, वे अपना काम कर रहे थे। मेरा काम खुद में सुधार लाना था और मैंने वही किया। मैं खुश हूं कि पाचं वर्ष के संघर्ष के बाद ही सही लेकिन मैं खुद को तकनीकी रूप से सही साबित करने में सफल रहा।"
मुरली ने टेस्ट मैचों से भले ही संन्यास ले लिया हो लेकिन वह एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 मैचो में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए 2011 विश्व कप खेलने की इच्छा रखते हैं।
मुरली बोले, "चयनकर्ताओं ने चाहा तो मैं 2011 विश्व कप खेलना चाहता हूं। टीम को जरूरत हुई तो मैं उसे सेवाएं देने के लिए तैयार हूं। हां, मेरी जगह अगर वे किसी युवा खिलाड़ी को मौका देना चाहते हैं तो मुझे कोई दुख नहीं होगा। इसके अलावा मैं थोड़े समय तक ट्वेंटी-20 क्रिकेट भी खेलना चाहता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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