FIFA World Cup 2018 team analysis: मोरक्को की टीम मजबूत ग्रुप से कैसे निकलेगी बाहर?

Morocco, the dark horse finds itself in the group of death!

नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने में बेहद कम समय बचा है। ऐसे में सभी टीमें अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर कर रही हैं। 14 जून से शुरू होने वाले इस महामुकाबले का फाइनल 15 जुलाई को रूस की राजधानी मॉस्को में खेला जाएगा। इस विश्वकप महामुकाबले में 32 टीमें हिस्सा लेंगी और उनके बीच 64 मुकाबले खेले जाएंगे। विश्वकप का आयोजन इस बार रूस कर रहा है, जिसके 11 शहरों में मैच खेले जाएंगे और फाइनल मुकाबला राजधानी मॉस्को के लुजनिकी स्टेडियम में खेला जाएगा। इस बार विश्वकप में 32 टीमों को 4-4 के आठ अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया। हर ग्रुप से चोटी की दो टीमें सीधे नॉकआउट स्टेज में जाएंगी। फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले 11 और 12 जुलाई को खेले जाएंगे।

देशः मोरक्को


ग्रुपः बी ( पुर्तगाल, ईरान, मोरक्को, स्पेन)
मुकाबलेः पहला मुकाबला 15 जून को ईरान के साथ
दूसरा मुकाबला पुर्तगाल के साथ 20 जून को
तीसरा मुकाबला 25 जून को स्पेन के साथ
फीफा रैंकिंगः 41
पिछला विश्वकपः क्वालीफाई नहीं हुई थी
बेस्ट प्रदर्शनः 1986 में अंतिम 16 के लिए क्वालीफाई

स्टार प्लेयर्स: मेधी बेनातिया (जुवेंटस सेंटर बैक), यूनूस बेलहांडा (गलात्सारे मिडफील्डर), खालिद बोटाइब (येनी मालट्यास्पोर स्ट्राइकर)
कोच: हेर्वे रेनार्ड
20 साल के लंबे अंतराल के बाद मोरक्को की टीम फीफा विश्वकप में हिस्सा लेने जा रही है। ऐसे में वो हर संभव कोशिश करेंगी की वो रूस में शानदार प्रदर्शन करे। हालांकि इस टीम के लिए फीफा का यह सफऱ आसान नही होगा क्योंकि इस ग्रुप में उसका सामना एक बार की चैंपियन टीम स्पेन के साथ हैं वहीं इस ग्रुप में रोनाल्डो और यूरो विजेता टीम पुर्तगाल शामिल हैं वहीं उनके साथ एशिया की पावरहाउस टीम ईरान भी शामिल है।

हेर्वे रेनार्ड जो की इस टीम में 2016 में शामिल हुए और उनको अफ्रीका कप विजेता बनाने का श्रेय भी माना जाता है। जिसमें जंबिया,इवोरी कोस्ट जैसी टीम शामिल थे। इस टीम इस फ्रेंच कोच ने बहुत अनुशासित करके रखा है जिसकी बदौलत इस टीम में शानदार खिलाड़ी और कुछ बेहतरीन युवा खिलाड़ी जैसे यूनूस बेलहांडा टीम का हिस्सा हैं। वहीं अगर इस टीम में मेधी बेनातिया की बात करें तो वो इस टीम का बेहतरीन हिस्सा हैं। ऐसे में इस खिलाड़ी से मोरक्को की टीम को खासा उम्मीदें होंगी।

कमजोर अटैक


इस टीम का डिफेंस तो अच्छा है लेकिन मिडफील्ड के साथ-साथ इस टीम में खिलाड़ियों का सपोर्ट इस टीम के लिए खासा कमजोर है। पूर्व स्ट्रैसबर्ग स्ट्राइकर, जो वर्तमान में तुर्की पक्ष यनी मालट्यास्पोर के साथ अपना खेल जारी रखे हैं उन्होंने अकेले ही क्वालीफिकेशन अभियान में चार गोल करके क्वालीफिकेशन की राह को आसान बनाया। वहीं अगर बात करें तो इस टीम से सभी को उम्मीदें होंगी की ये टीम अंतिम 16 में जगह बनाने में सफल हो।

यूरोपियन फ्लेवर

इस टीम में यूरोपियन फ्लेवर देखने को मिलता है क्योंकि इस टीम में अधिकांश खिलाड़ी यूरोप में पैदा हुए थे इसलिए इसका असर इश टीम में दिखता है। वहीं इसकी एक झलक देखने को मिली थी जब 1986 में मोरक्को में ही फीफा का आयोजन हुआ था। भले ही यह टीम एक कठिन ग्रुप में हो लेकिन इनके खिलाड़ियों को पूरी उम्मीद है की वो शानदार प्रदर्शन करेंगे और नॉक आउट राउंड तक जाएंगे।

भविष्यवाणीः हालांकि इस टीम को कमतर आंका नहीं जा सकता हांलांकि वो स्पेन, पुर्तगाल जैसी मजबूत टीमों से भिड़ेगी। वहीं उम्मीद है की ये टीम ईरान को हराकर और बाकी दोनो टीमों में एक मुकाबला ड्रा कर या जीतकर अपनी आगे की राह आसान कर सके।

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    Story first published: Tuesday, June 12, 2018, 12:45 [IST]
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