दिलशान के कहने पर रणदीव ने फेंकी थी नो-बॉल : रिपोर्ट (लीड-1)
दाम्बुला में सोमवार को खेले गए एकदिवसीय मुकाबले के दौरान उस नो-बॉल के कारण सहवाग अपने 13वें शतक से मात्र एक रन से चूक गए थे।
इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। रणदीव के अलावा क्रिकेट श्रीलंका (एसएलसी) ने इसके लिए सहवाग से माफी मांग ली थी और साथ ही मामले की जांच के आदेश भी दे दिए थे।
दिलशान से जुड़ी इस खबर पर श्रीलंकाई टीम प्रबंधन और किसी भी खिलाड़ी ने कोई टिप्पणी नहीं की है। गौरतलब है कि दिलशान श्रीलंकाई टीम के एक वरिष्ठ खिलाड़ी हैं कई मौकों पर ही उपकप्तान भी रह चुके हैं।
जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने टीम की कप्तानी भी थी। दिलचस्प बात यह है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में सहवाग और दिलशान दोनों दिल्ली डेयरडेविल्स की ओर से खेलते हैं।
सोमवार को श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) और रणदीव ने नो-बॉल फेंकने की घटना को लेकर सहवाग से माफी मांग ली थी। रणदीव की नो-बॉल पर सहवाग ने छक्का जड़ा था, लेकिन उस छक्के को स्कोर में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि नो-बॉल पर मिले एक रन से भारतीय टीम मैच जीत गई थी। इस तरह 99 रनों के स्कोर पर खेल रहे सहवाग शतक लगाने से महरूम रह गए।
इसे लेकर सहवाग ने नाराजगी जताते हुए रणदीव पर जानबूझकर नो-बॉल फेंकने का आरोप लगाया था। सहवाग ने मैच के बाद कहा था, "ऐसे मौकों पर मैंने रणदीव को अक्सर नो-बॉल फेंकते देखा है। यह क्रिकेट के हित में नहीं है।"
एसएलसी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए। एसएलसी के सचिव निशांत रणातुंगा ने मैच के अगले दिन भारतीय टीम प्रबंधक रंजीब बिस्वाल को बुलाकर इस घटना के लिए खेद जताया।
रिपोर्ट के मुताबिक दिलशान उस वक्त कवर प्वाइंट पर फील्डिंग कर रहे थे। रणदीव के गेंद फेंकने से पहले उन्होंने सिंहली में चिल्लाकर कहा था, "ओने नाम, नो-बॉल एकाक डान्ना पुलुवान"। इसका हिंदी रुपांतरण यह है कि 'अगर तुम चाहो तो नो-बॉल फेंक सकते हो।'
श्रीलंकाई समाचार पत्र 'द आइलैंड' में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है, "दाम्बुला में श्रीलंकाई टीम के सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान ने रणदीव को नो-बॉल फेंकने की सलाह दी थी ताकि वीरेंद्र सहवाग शतक पूरा न कर सकें।"
रणदीव ने दिलशान के कहने पर नो-बॉल फेंकी और सहवाग अपने शतक से चूक गए। रणदीव की उस गेंद के फेंके जाने से पहले भारत को जीत के लिए मात्र एक रन की जरूरत थी। साथ ही सहवाग को शतक पूरा करने के लिए भी एक रन की जरूरत थी।
रणदीव के नो-बॉल फेंकने का मतलब यह हुआ कि भारत मैच जीत गया लेकिन उस गेंद पर छक्का लगाकर शतक पूरा करने वाले सहवाग को निराशा हाथ लगी क्योंकि उस छक्के को नियमत: बेकार करार दिया गया क्योंकि नो-बॉल के कारण भारत मैच जीत चुका था।
एसएलसी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और मैच के प्रसारणकर्ता टेन स्पोर्ट्स से मैच का वीडियो मांगा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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