'ग्रैंड स्लैम जीतने की मुझे उम्मीद थी'
भांबरी ने फ़ाइनल मुक़ाबले में जर्मनी के अलेक्जेंड्रो फर्डिनांडोस जोरडियस को लगातार सेटों में 6-3, 6-1 से हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन में भारत का परचम लहराया. उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
ऑस्ट्रेलियन ओपन जूनियर ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल खेलने से पहले आपके मन में क्या उमड़-घुमड़ रहा था
फ़ाइनल खेलने से पहले मैं विश्वास से भरा था. जब मैं ऑस्ट्रेलियन ओपन ग्रैंड स्लैम खेलने गया था तब मुझे जीत की काफ़ी उम्मीदें थी. फ़ाइनल खेलना मेरे लिए एक सपना था जिसे मैं पूरा करना चाहता था. मुझे ख़ुशी है कि मैं जीत पाया.
फ़ाइनल तक का सफ़र कैसा रहा...
पहला राउंड काफ़ी मुश्किल था. उसमें मैं तीन सेट में गया. काफ़ी गर्मी भी थी. लेकिन उस मैच से मेरे विश्वास में इज़ाफ़ा हुआ. मैं सोच रहा था कि पहला सेट हार कर भी मैं इतना आगे तक जा सकता हूँ तो यदि खुद को फ़ोकस्ड रखूँ. अपने खेल पर और ज़्यादा ध्यान दूँ तो आगे तक जा सकता हूँ.
ग्रैंड स्लैम में खेलने के दौरान दर्शकों का दबाव कितना था आप पर?
चूँकि मैं पिछले साल ग्रैंड स्लैंम खेला था तो मुझे काफ़ी सहूलियत हुई खुद को वातावरण के अनुकूल बनाने में.
वो कौन कौन से लम्हे हैं जो आपको हमेशा के लिए याद रहेंगे
इतने बड़े कोर्ट पर खेलते हुए लोग हमें देख रहे थे जिस पर फ़ेडरर, नडाल वगैरह खेल चुके हैं. मुझे हमेशा याद रहेगा. साथ ही अंत में जब मुझे ट्रॉफ़ी दी जा रही थी तो वहाँ मौजूद भारतीय दर्शक खड़े होकर तालियाँ बजा रहे थे मैं कभी नहीं भूल पाउँगा.
इस खिताब को जीतने के बाद अब आपका फ़ोकस क्या रहेगा आने वाले दिनों में
अभी तो यह शुरुआत है. सफर बहुत लंबा हैं. मेरा फ़ोकस रहेगा कि मैं ऑस्ट्रलियाई ओपन में पुरुषों के ख़िताब के लिए खेलूँ और चार-पाँच साल बाद उसे जीत पाउँ.
आपकी दोनों बहनें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेनिस खेल चुकी है. उनकी क्या भूमिका रही आपके खेल में
उनकी वजह से ही मैं टेनिस खेल रहा हूं. उनका बहुत बड़ा योगदान हैं.
टेनिस के अलावा आपकी और क्या क्या रुचि है
मैं क्रिकेट और गोल्फ भी खेलता हूँ. हिंदी संगीत सुनने का और शाहरुख और आमिर की फ़िल्में देखने का मुझे शौक है.
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