राष्ट्रमंडल खेल : सीजीएफ के निर्णय से पहलवान दुखी
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कुश्ती मुकाबलों में अपना दबदबा रखने वाले भारतीय पहलवानों ने अगले राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती की ग्रीको-रोमन और महिला वर्ग श्रेणियों को बाहर करने के राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के निर्णय पर नाराजगी जताई है। पहलवानों ने इस कदम को पश्चिमी देशों और आस्ट्रेलिया का 'षडयंत्र' करार दिया है।
ग्रीको रोमन कुश्ती के 47 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान संजय कुमार ने आईएएनएस को बताया, "यह भारतीय पहलवानों के साथ सरासर भेदभाव है। हमने बीते कुछ सालों में इसके लिए काफी मेहनत की है। राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती स्पर्धा के किसी भी रूप में बाहर करने का कोई तर्क नहीं है।"
उन्होंने बताया कि पहलवान और उनके प्रशिक्षक इस निर्णय से काफी दुखी हैं। उन्हें लगता है कि इस खेल से उन्हें दूर रखने के लिए यूरोप के देश और आस्ट्रेलिया ने इस साजिश को रचा है, क्योंकि वे उनका सामना करने से डरते हैं।
संजय ने बताया," ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों से दोनों श्रेणियों की कुश्ती को बाहर करने पर भारतीय कुश्ती को बड़ा झटका लगा है। इस निर्णय के खिलाफ हमारे संघ को आवाज उठानी चाहिए। हम उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं।"
दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों के ग्रीको रोमन कुश्ती प्रतियोगिता में भारत ने चार स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता है। जबकि, महिलाओं की कुश्ती में भारत को एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक मिला है।
उधर, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष जी.एस. मंदेर ने बताया कि वह राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के ग्लासगो में होने वाले खेलों से ग्रीको रोमन और महिला कुश्ती को बाहर करने के निर्णय से खुश नहीं हैं।
मंदेर ने आईएएनएस को बताया, "हम सीजीएफ के इस निर्णय का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। हमें अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती संघों और विश्व के कई कुश्ती संगठनों का समर्थन प्राप्त है।"
मुख्य राष्ट्रीय कोच हरगोबिंद सिंह ने कहा कि ग्लासगो में होने वाली कुश्ती को लेकर ढेर सारी भ्रम की स्थिति है। उन्होंने आईएएनएस को बताया, "हमलोग ग्लासगो में होने वाली फ्रीस्टाइल कुश्ती को लेकर भी आश्वस्त नहीं हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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