'महानतम ऑलराउंडर' कपिल देव हुए 50 साल के

By Staff

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के महानतम हरफनमौला खिलाड़ी कपिल देव रामलाल निखंज मंगलवार को 50 साल के हो गए। देश को एकमात्र विश्व खिताब दिलाने वाले इस पूर्व कप्तान का जन्म 6 मार्च, 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था।

वर्ष 1978 से 1994 के बीच 131 टेस्ट और 225 एकदिवसीय मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले कपिल को 'हरियाणा हरिकेन' नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने टेस्ट मैचों में जहां 31.05 के औसत से 5248 रन बनाए हैं वहीं उनके नाम 434 विकेट भी दर्ज हैं। कपिल ने सात शतक और 27 अर्धशतक लगाए हैं। टेस्ट विकेटों के लिहाज से वे अनिल कुंबले (619) के बाद आज भी दूसरे स्थान पर काबिज हैं।

एकदिवसीय मैचों की बात करें तो कपिल ने 24.00 के औसत से 3783 रन बनाए हैं। उनके खाते में एक शतक और 14 अर्धशतक हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 175 (नाबाद) रहा है, जो उन्होंने 1983 के विश्व कप में जिंबाब्वे के खिलाफ विपरीत परिस्थितियों में लगाया था। इसके अलावा कपिल ने एकदिवसीय मैचों में 253 विकेट भी लिए हैं।

कपिल को भारत के सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता है क्योंकि उनके नेतृत्व में ही भारत ने एकमात्र विश्व खिताब जीता है। 1983 में भारत ने शक्तिशाली वेस्टइंडीज के गुरूर को चकनाचूर करते हुए विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।

एक समय था जब कपिल पाकिस्तान के इमरान खान, इंग्लैंड के इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के रिचर्ड हेडली के साथ दुनिया के बेहतरीन हरफनमौला खिलाड़ियों की चौकड़ी बनाते थे।

वह वक्त विश्व क्रिकेट के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी था क्योंकि उस वक्त एक से बढ़कर एक खिलाड़ी अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया करते थे, लेकिन इसके बावजूद कपिल ने उच्चस्तरीय मुकाम हासिल किया।

अपने करियर में हासिल की गई तमाम सफलताओं के कारण वर्ष 2002 में कपिल को भारत का 'क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी' सम्मान से नवाजा गया। जिस तरह फिल्म जगत में अमिताभ बच्चन 'एक्टर ऑफ द सेंचुरी' हैं, आज क्रिकेट जगत में कपिल को भी यही सम्मान हासिल है।

कपिल ने एक खिलाड़ी, कोच और प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर भारतीय क्रिकेट की सेवा की है लेकिन भारतीय क्रिकेट की राजनीति में जारी उठापटक से वे एक दिन इतने निराश हुए कि मई 2007 में जी समूह के बागी इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) से जुड़ गए। आज वे आईसीएल के अध्यक्ष हैं और परोक्ष रूप से क्रिकेट की सेवा कर रहे हैं।

अंत में एक मजेदार तथ्य : वर्ष 1984-85 में अगर कपिल को अनुशासनात्मक आधार पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने से नहीं रोका गया होता तो उनके नाम लगातार 132 टेस्ट मैच खेलने का रिकार्ड जुड़ गया होता। कपिल को गलत समय पर आक्रामक शॉट खेलने के कारण इंग्लैंड में टेस्ट नहीं खेलने दिया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, January 6, 2009, 7:53 [IST]
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