नई दिल्ली। 36 साल बाद फुटबॉल महासमर में भाग ले रही पेरू की टीम फीफा विश्व कप 2018 के अपने शुरुआती मैच में शनिवार को यहां जब डेनमार्क और उसके स्टार मिडफील्डर क्रिस्टियन एरिक्सन का सामना करेगी तो टीम का दारोमदार पाओलो गुएरेरो पर टिका रहेगा जो डोपिंग के कारण लगे प्रतिबंध को भुलाकर खुद को साबित करने के लिये मैदान पर उतरेंगे।
पेरू ने विश्व कप के अंतिम चरण तक पहुंचने के लिए 36 साल का इंतजार किया है और इसका क्रेडिट 1986 विश्वकप क्वालिफाइंग के दौरान पेरू के खिलाफ स्कोर करने वाले अर्जेंटीना कोच रिकार्डो गारेसा को जाता है। ये उनके लिए एक भावनात्मक टूर्नामेंट है सिर्फ इसलिए नहीं की वो लंबे समय के बाद टूर्नामेंट खेल रहे हैं बल्कि इस लिए भी की उनके कप्तान पाओलो गुएरेरो आखिरकार यह मुकाबला खेल रहे हैं।
फ्लेमेंगो के फारवर्ड गुएरेरो की मौजूदगी से पेरू के कोच रिकार्डो गारेसा को बड़ी राहत मिली। उन पर कोकीन लेने के कारण 14 महीने का प्रतिबंध लगा था जो विश्व कप शुरू होने से एक सप्ताह पहले हटा दिया गया था। लेकिन डेनमार्क के पास गोल मशीन एरिक्सन है जिन्होंने क्वालीफायर में अपनी टीम की तरफ से 11 गोल दागे थे। पेरू टीम के अटैक की जिम्मेदारी फॉरवर्ड जेफरसन फारफान के कंधों पर होगी, जिन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए प्लेऑफ के मैच में गोल दागकर टीम को विश्व कप में प्रवेश हासिल करने में अहम भूमिका निभाई थी।
दूसरी ओर, वर्ष 1998 में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाली डेनमार्क स्टार मिडफील्डर क्रिस्टियन एरिक्सन के दम पर टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करना चाहेगी। कप्तान सिमोन काएर के नेतृत्व वाली डेनमार्क ने पिछले साल नवंबर में आयरलैंड को 5-1 से हराकर विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है।
डेनमार्क देश के लिए फीफा का मुकाबला कोई परंपरा की तरह नहीं रहा है जैसा की उनके बाकी यूपोपीय देशों में हैं। और न ही इस टीम में कोई खास खिलाड़ी हैं जो इस सपने को पूरा कर सकें। लेकिन इस टीम के लिए सबसे खास है उनके कोच एज हरेइड। 2017 इस टीम के लिए शानदार रहा है और इस देश ने पोलैंड जैसी टीम को 4-0 से हराया था। वहीं क्रिश्चियन एरिक्सन इस टीम के सबसे खास खिलाड़ी हैं जो 2010 में साउथ अफ्रीका में हुए मुकाबले में महज 18 साल के थे अब वो 26 साल के हो गए हैं और पहले से ज्यादा अनुभवी भी हो गए हैं।
एरिक्शन अपनी टीम के लिए गोल दागने के साथ-साथ अपने खिलाड़ियों को संभालने का भी काम करते हैं। उनका हर प्रयास डेनमार्क के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। वहीं इस खिलाड़ी के अलावा जिन दो टीमों पर नजर होगी उनका नाम है निकोलाई जोर्गेन्सन और सिस्टो। जोगेर्सन ने सीरीज ए में 21 गोल दागकर एक शानदार फार्म में दिख रहे हैं। वहीं सिस्टो भी एक शानदार फार्म में नजर आ रहे हैं। वहीं इस टीम में कास्पर श्मीशेल जैसे शानदार गोलकीपर भी हैं। हालांकि इस टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है की ये टीम दबाव में खेलने के लिए तैयार नहीं है। और इसका प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा है।
पेरु vs डेनमार्क - 9.30PM - सरांस्क