नो-बॉल विवाद में एसएलसी को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए : बीसीसीआई
बीसीसीआई के प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि इस मामले में बोर्ड कुछ नहीं कर सकता क्योंकि यह सीधे तौर पर खिलाड़ियों की 'नैतिकता' से जुड़ा मामला है।
शुक्ला ने कहा, "बोर्ड आईसीसी के नियमों से बंधा है। बोर्ड नियमों में तब्दीली नहीं कर सकता क्योंकि यह मामला पूरी तरह खिलाड़ियों की नैतिकता से जुड़ा है। एसएलसी को इस मामले में कड़ा कदम उठाते हुए दोषियों को सजा देनी चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी किसी को नो-बॉल करने के लिए उकसाता है तो उके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। यह बड़ा ही गंभीर मामला है।"
उधर, श्रीलंकाई मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमवार को दाम्बुला में खेले गए त्रिकोणीय श्रृंखला मुकाबले में श्रीलंकाई ऑफ स्पिनर सूरज रणदीव ने कप्तान कुमार संगकारा के नहीं बल्कि वरिष्ठ बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान के कहने पर भारतीय बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को नो-बॉल फेंकी थी।
उस नो-बॉल के कारण सहवाग अपने 13वें शतक से मात्र एक रन से चूक गए थे। इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। रणदीव के अलावा क्रिकेट श्रीलंका (एसएलसी) ने इसके लिए सहवाग से माफी मांग ली थी और साथ ही मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
रणदीव की नो-बॉल पर सहवाग ने छक्का जड़ा था, लेकिन उस छक्के को स्कोर में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि नो-बॉल पर मिले एक रन से भारतीय टीम मैच जीत गई थी। इस तरह 99 रनों के स्कोर पर खेल रहे सहवाग शतक लगाने से महरूम रह गए थे।
इसे लेकर सहवाग ने नाराजगी जताते हुए रणदीव पर जानबूझकर नो-बॉल फेंकने का आरोप लगाया था। सहवाग ने मैच के बाद कहा था, "ऐसे मौकों पर मैंने रणदीव को क्सर नो-बॉल फेंकते देखा है। यह क्रिकेट के हित में नहीं है।"
एसएलसी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए। साथ ही एसएलसी के सचिव निशांत रणातुंगा ने मैच के अगले दिन भारतीय टीम प्रबंधक रंजीब बिस्वाल को बुलाकर इस घटना के लिए खेद जताया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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