विश्व कप स्टेडियमों का अब क्या होगा
जोहांसबर्ग, 12 जुलाई (आईएएनएस)। फुटबॉल विश्व कप समाप्त हो चुका है और दक्षिण अफ्रीका के सामने लाखों डॉलर की लागत से बने फुटबॉल स्टेडियमों के उपयोग की समस्या खड़ी हो गई है।
एक महीने तक चले विश्व कप के दौरान उपयोग किए गए सभी 10 स्टेडियमों के निर्माण या मरम्मत पर दो अरब डॉलर का खर्च आया।
कुछ बाधाओं के बाद पोर्ट एलिजाबेथ, डरबन, केप टाउन और जोहांसबर्ग की सॉकर सिटी के अत्याधुनिक स्टेडियम बनकर तैयार हुए।
विश्व कप के समाप्त होने के बाद अब यह सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या देश ऐसे स्टेडियमों का खर्च वहन कर सकता है जहां आबादी का काफी बड़ा हिस्सा सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य की मूल सुविधाओं से वंचित है।
जोहांसबर्ग विश्वविद्यालय की खेल प्रबंधन की एक छात्रा एना फोस्टर ने आईएएनएस से कहा, "फुटबॉल दक्षिण अफ्रीका में कोई बड़ा खेल नहीं है और मुझे नहीं लगता कि विश्व कप के बाद हमारी फुटबॉल लीग से हासिल धन इन स्टेडियमों के रखरखाव के लिए पर्याप्त है। मुझे आश्चर्य है कि अब इनका क्या उपयोग होगा।"
एना के सहपाठी जेम्स रॉबर्ट्स बहरहाल आशावादी हैं और उन्होंने कहा कि एलिस पार्क मूल रूप से रग्बी के लिए उपयोग होता था लेकिन उम्मीद है कि स्थानीय फुटबॉल मैचों को और अधिक दर्शक मिलेंगे।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने कहा कि स्टेडियमों का उपयोग फुटबॉल, रग्बी और क्रिकेट लीग के लिए किया जाएगा।
जुमा ने कहा कि इन स्टेडियमों को वर्ष 2020 के ओलंपिक के लिए देश के निवेश के तौर पर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि अधिक विदेशी फुटबॉल स्टार यहां आकर खेलें। स्टेडियमों को उपयोगी बनाने के लिए कई योजनाएं हैं।"
परंतु रुढ़िवादी लोग इन तर्को को मानने को तैयार नहीं हैं।
एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंटन हारबर ने कहा कि विश्व कप ने हमको पागल बना दिया। धन को सावधानी से खर्च करना था। उन्होंने कहा कि सरकार को इन स्टेडियमों के रखरखाव में कठिनाई आएगी। वे शीघ्र ही सफेद हाथी बन जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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