विश्व कप के इस मैच को लेकर लोगों में बहुत उत्साह है. दोनों देशों के समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद हैं. वर्ष 1966 के विश्व कप में मिली सफलता के बाद इंग्लैंड की टीम जर्मनी के ख़िलाफ़ बैक फ़ुट पर ही रही है. 1970 में जर्मनी ने इंग्लैंड को हराया था, तो 1982 में मैच ड्रॉ हुआ था लेकिन वर्ष 1990 में पेनल्टी शूट आउट में टीम जीत गई थी.
इंग्लैंड की टीम नहीं चाहेगी कि इस मैच में पेनल्टी की नौबत आए क्योंकि पेनल्टी के मामले में इंग्लैंड का रिकॉर्ड कोई बहुत अच्छा नहीं है. वर्ष 2006 के विश्व कप में पुर्तगाल के ख़िलाफ़ मैच में फ़्रैंक लैम्पार्ड पेनल्टी शूट आउट में चूक गए थे. इस साल एफ़ए कप के फ़ाइनल और जापान के ख़िलाफ़ वॉर्म अप मैच में भी लैम्पार्ड पेनल्टी पर गोल नहीं कर पाए थे.
जर्मनी के डिफ़ो भी पिछले 11 पेनल्टी शॉट्स में से छह पर गोल नहीं कर पाए थे. लेकिन इतिहास को छोड़ इंग्लैंड की टीम वर्तमान के बारे में सोच रही है. कोच फ़ेबियो कपेलो को यह फ़ैसला करना है कि सेंटर बैक से मैथ्यू उप्सन को मौक़ा दें या फिर लेडली किंग या जिमी कैरेघर को टीम में जगह दें.
किंग चोट से उबर चुके हैं तो एक मैच के निलंबन के बाद कैरेघर भी उपलब्ध हैं. जर्मनी के स्ट्राइकर ककाउ मांसपेशियों में खिंचाव के कारण नहीं खेल पाएँगे, तो मिरोस्लाव क्लोज़ा भी एक मैच के निलंबन के बाद इस मैच में खेलेंगे. कोच जोकिम लॉ मिडफ़ील्डर स्वाइंसटाइगर को लेकर चिंतित हैं जेरोम बोटेंग भी पूरी तरह फ़िट नहीं हैं.
दिन का दूसरा मैच जोहानेसबर्ग के सॉकर सिटी स्टेडियम में ख़िताब की प्रबल दावेदार अर्जेंटीना और मैक्सिको के बीच खेला जाएगा. इस विश्व कप में लैटिन अमरीकी देशों ने अभी तक शानदार प्रदर्शन किया है और सभी पाँच देशों ने नॉक आउट स्टेज में जगह बनाई है. इन लैटिन अमरीकी देशों में सबसे प्रभावशाली रही है अर्जेंटीना की टीम.
मैक्सिको की टीम ने उतना प्रभावित तो नहीं किया है लेकिन ग्रुप मैचों में फ़्रांस को उसने मात दी थी. लगातार पाँचवीं बार टीम ने नॉक आउट स्टेज तक जगह बनाई है. लेकिन चार मौक़े पर मैक्सिको की टीम क्वार्टर फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाई. पिछले विश्व कप में भी नॉक आउट स्टेज में अर्जेंटीना और मैक्सिको की टीमें आमने-सामने थी. और अर्जेंटीना ने 2-1 से जीत हासिल करके मैक्सिको को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया था.
अर्जेंटीना और मैक्सिको के बीच इससे पहले 25 बार मुक़ाबला हो चुका है और सिर्फ़ चार बार ही मैक्सिको की टीम विजयी रही है. जबकि 11 मैच अर्जेंटीना ने जीते हैं. विश्व कप की बात करें तो दोनों टीमों का मुक़ाबला दो बार हुआ है, एक 1930 में और दूसरा वर्ष 2006 के विश्व कप में और दोनों बार अर्जेंटीना की टीम ही जीती है.
अगर टीमों की बात करें, तो ग्रीस के ख़िलाफ़ उतनी मज़बूत टीम न उतारने वाले अर्जेंटीना के कोच डिएगो माराडोना इस मैच में कार्लोस तावेज़, मैसकरानो और हिग्वेन को मैदान पर ज़रूर उतारेंगे. माराडोना को ये भी फ़ैसला करना है कि वे इस अहम मैच में वेरॉन को मौक़ा देंगे या मैक्सी रोड्रिगेज़ को.
मैक्सिको की बात करें तो डिफ़ेंडर जुआरेज़ एक मैच की पाबंदी के बाद उपलब्ध रहेंगे. चोट से उबरते हुए कार्लोस वेला भी इस मैच में उपलब्ध रहेंगे लेकिन शायद वे मैच की शुरुआत न करें.