गॉल टेस्ट : भारत की करारी हार, मुरली ने रचा इतिहास (लीड-7)
मैच के पांचवें दिन गुरुवार को श्रीलंका को जीत के लिए 95 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे उसने बिना कोई विकेट गंवाए हासिल कर लिया। पहली पारी में शानदार शतक लगाने वाले सलामी बल्लेबाज थरंगा पारानाविताना (नाबाद 23) और हालिया नाकामी से उबरते हुए दिग्गज बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान (नाबाद 68) अपनी टीम को जीत दिलाने के बाद ही पेवेलियन लौटे।
पारी की शुरुआत करने आए पारानाविताना ने 42 गेंदों का सामना करते हुए चार चौके लगाए जबकि दिलशान ने अपनी 47 गेंदों की तूफानी पारी के दौरान छह चौके और एक छक्का लगाया। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने तीन मैचों की इस श्रृंखला में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है।
यह मैच मुरलीधरन की टेस्ट क्रिकेट से विदाई और उनके 800 विकेटों के मील के पत्थर के कारण यागदार बन गया। मुरली ने भारत के बल्लेबाज प्रज्ञान ओझा का विकेट हासिल करने के साथ यह जादुई आंकड़ा छुआ।
इस मुकाम पर उनके अलावा और कोई गेंदबाज नहीं पहुंच सका है। मुरलीधरन विश्व के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 1000 से अधिक विकेट लिए हैं। उन्होंने 133 टेस्ट मैचों में अब तक कुल 800 विकेट झटके हैं जबकि 337 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 515 विकेट दर्ज हैं।
28 अगस्त 1992 को आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में अपने करियर का पहला टेस्ट मैच खेलने वाले मुरली ने टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 67 बार पारी में पांच और 22 बार मैच में दस विकेट झटके हैं। इसके अलावा 11 ट्वेंटी-20 मैचों में उन्होंने 13 विकेट झटके हैं। मुरली के नाम कुल 1328 विकेट हैं।
मुरली ने मई 2004 में वेस्टइंडीज के कोर्टन वाल्श का 519 विकेटों का विश्व रिकार्ड ध्वस्त किया था। लंबे समय तक आस्ट्रेलिया के शेन वार्न उनके प्रतिद्वंद्वी बने रहे लेकिन दिसंबर 2007 में उनके संन्यास के साथ मुरली सर्वाधिक विकेट लेने की दौड़ में अकेले धावक रह गए।
इससे पहले, भारतीय टीम की दूसरी पारी 338 रनों पर सिमट गई। फॉलोऑन खेल रही भारतीय टीम पारी की हार बचाने में सफल रही और श्रीलंका के सामने जीत के लिए 95 रनों का लक्ष्य रखा।
भारतीय टीम ने भोजनकाल तक आठ विकेट के नुकसान पर 292 रन बनाए थे। भोजन के बाद बल्लेबाजी के लिए उतरे दिग्गज बल्लेबाज वी.वी.एस. लक्ष्मण का सब्र जवाब दे गया और पूरे एक सत्र तक विकेट पर टिके रहने के बाद वह 127 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 69 रन बनाने के बाद रन आउट हो गए। भारत का यह विकेट 314 रन के कुल योग पर गिरा।
इसके बाद, ईशांत शर्मा और प्रज्ञान ओझा ने हालांकि अंतिम विकेट के लिए 24 रन जोड़े। 338 रन के कुल योग पर मुरलीधरन द्वारा ओझा को आउट करने के साथ ही भारतीय पारी समाप्त हुई। मुरली ने इस विकेट के साथ 800 विकेटों का आंकड़ा छू लिया।
ओझा 50 गेंदों पर एक चौके की मदद से 13 रन बनाने में सफल रहे। मुरली का 800वां शिकार बने ओझा का नाम भी क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया क्योंकि जब भी मुरली की इस ऐतिहासिक सफलता का जिक्र होगा, तब ओझा का नाम जरूर लिया जाएगा। दूसरी छोर पर ईशांत शर्मा 106 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 31 रन बनाकर नाबाद रहे।
भारतीय टीम ने अपना आठवां विकेट 246 रन के कुल योग पर गंवाया था। आठवें विकेट के रूप में अभिमन्यु मिथुन आउट हुए थे। अपने करियर का पहला टेस्ट खेल रहे मिथुन ने अपनी संघर्षपूर्ण पारी के दौरान 59 गेंदों का सामना करते हुए पांच चौकों की मदद से 25 रन बनाए। पहली पारी में श्रीलंका के चार बल्लेबाजों को पेवेलियन की राह दिखाने वाले मिथुन ने लक्ष्मण के साथ आठवें विकेट के लिए 49 रन जोड़े।
पांचवें दिन हरभजन सिंह मुरली की गेंद पर पगबाधा करार दिए गए। हरभजन सिर्फ आठ रन बना सके। पहली पारी में मुरली ने पांच विकेट चटकाए थे। पहली पारी में बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण फॉलोऑन खेल रही टीम इंडिया ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक पांच विकेट पर 181 रन बनाए थे।
आखिरी दिन भारतीय टीम को कप्तान धौनी और लक्ष्मण से लंबे समय तक मैदान पर डटे रहने की उम्मीद थी। परंतु जल्द ही मलिंगा ने धौनी को क्लीन बोल्ड कर इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। धौनी सिर्फ चार रन ही बना सके। मलिंगा इस पारी में पांच विकेट लिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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