कोरो के बिना लोबेरो की फिलोसिफी की होगी असली परीक्षा

Sans Corominas, Goa face true test of Lobera’s philosophy

नई दिल्ली। एफसी गोवा के लिए जमशेदपुर एफसी की चुनौती आसान नहीं रहेगी। पिछले साल लीग के प्लेऑफ मे जगह बनाने के लिए गोवा ने आखिरी मैच में जमशेदपुर को ही मात दी थी, लेकिन कोच सर्गियो लोबेरा को अब अपनी टीम की क्षमता की अग्नी परीक्षा का सामना करना है।

लोबेरा हमेशा से अपनी गेंद पर ज्यादा से ज्यादा पजेशन रखने की फीलोसिफी पर कायम हैं। पिछले साल से अभी तक इस स्पेनिश कोच को इस बात को कबूल करने में कोई परेशानी नहीं हुई है कि गोल के सामने उनकी टीम ने इसी तरह की फुटबाल खेली है। वह अभी तक इसमें सफल भी रहे हैं, लेकिन अब स्टार स्ट्राइकर फरान कोरोमिनास के निलंबन के कारण और रांची में एक थकान भरी रात के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई है। यहां टीम के सामने एक व्यक्ति से ऊपर उठते हुए आगे आने की चुनौती है।कोरोमिनास को पिछले मैच में पुणे एफसी सिटी के खिलाफ रेड कार्ड मिला था जिसमें टीम ने 4-2 से जीत हासिल की थी। इस मैच में कोरोमिनास ने दो गोल किए थे और वह लोबेरा के अटैकिंग प्लान का अहम हिस्सा है। उन्होंने अभी तक गोवा के लिए 24 मैच खेले हैं और 24 ही गोल किए हैं। अब अगले मैच मैं टीम उनके बिना कैसे तालमेल बिठा पाती है या देखना होगा। वह टीम निलंबन के कारण टीम के साथ जमशेदपुर नहीं आए हैं।

लास प्लमास के पूर्व कोच ने कहा, "मेरा मानना है कि टीम एक व्यक्ति से ज्यादा की होती है। हम इस बात के शुक्रगुजार हैं कि हमारी टीम ने कई मौके बनाए हैं और कई गोल किए हैं। यह हमारी किस्मत है कि हमारे पास कोरोमिनास जैसा स्ट्राइकर है। यह हमारे लिए अच्छी बात है कि हमारे पास बैंच पर ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैदान में उतरकर गोल कर सकते हैं।"लोबेरा की अट्रैकिंग फिलोसिफी को कई लोग पसंद करते हैं और उनकी इस रणनीति के कारण टीम कई गोल करने में सफल रही है। पिछले सीजन वह प्लेऑफ में चेन्नइयन एफसी से मात खा गए थे। इस बार उन्होंने लगातार तीन जीत के साथ शुरुआत की है। पहले मैच में हालांकि उन्होंने नार्थईस्ट के खिलाफ ड्रॉ खेला था।

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गोवा का खेल उसके प्रशंसकों के लिए काफी रोचक रहा है। पिछले सीजन में इस टीम ने 18 लीग मैचों में कुल 42 गोल किए थे। इनमें से 31 गोल कोरोमिनास और मैन्युएल लैंजारोते की जोड़ी ने किए थे। इस साल लैंजारोते एटीके चले गए हैं जो टीम के लिए कागजों पर बड़ा नुकसान है, लेकिन मैदान पर ऐसा कम ही प्रतीत हुआ है।

लैंजारोते के बिना लोबेरा ने अटैक में अपनी टीम की कमी को काफी हद तक संभाला है जबकि पिछले साल एफसी गोवा के लिए पिछले चार साल से विंगर के तौर पर खेल रहे मंडार राव देसाई को इस बार फुल बैक खिलाड़ी में तब्दील कर दिया गया है। इदू बेदिया ने भी विंगर का रोल निभाया।इन बदलावों के कारण लैंजारातो के विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किए गए स्पेन के मिगुएल प्लांसा को अभी तक मैदान पर सिर्फ 44 मिनट का खेल खेलने का मौका मिला है।

प्लांसा को अब कोरोमिनास की गैरमौजूदगी में अपने आप को साबित करने का मौका मिल सकता है। इससे पहले रियल मेड्रिड के लिए खेल चुके प्लांसा ने मुंबई सिटी के खिलाफ दो गोल किए थे जहां गोवा ने 5-0 से जीत हासिल की थी। अगर वह अपने इसी फॉर्म को जारी रखते हैं तो वो सभी बातें खत्म हो जाएंगी जिनमें कहा जा रहा है कि गोवा का भार कोरोमिनास के जिम्मे है। जमशेदपुर की परीक्षा गोवा और लोबेरा के लिए कड़ी परीक्षा है।

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    Story first published: Wednesday, October 31, 2018, 15:42 [IST]
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