विलय की प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हुई। विलय का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) की मान्यता हासिल करने के लिए हुए इस विलय के बाद इसे भारतीय हॉकी महासंघ के नाम से जाना जाएगा।
पदाधिकारियों के चयन के लिए नए संगठन का चुनाव अक्टूबर में नई दिल्ली में संपन्न होगा। चुनावों के बाद नए संगठन का संविधान तैयार किया जाएगा। आईएचएफ को दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश में हॉकी की मान्यता प्राप्त संस्था करार दिया है, जबकि एफआईएच हॉकी इंडिया को मान्यता प्राप्त संस्था मानता है।
खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया की मान्यता पिछले सप्ताह रद्द कर दी थी। पांच अगस्त को हुए एचआई के चुनावों से खेल मंत्रालय नाराज था क्योंकि उसके मुताबिक चुनावों में एचआई ने सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया।
विलय की प्रक्रिया आईएचएफ और आईडब्ल्यूएचएफ की अलग-अलग बैठकों के साथ हुई। इसके बाद दोनों संगठनों की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से एकीकृत संगठन बनाने का फैसला किया गया। इस एकीकृत संगठन की अगली बैठक नौ सितंबर को होगी। इस दौरान आईएचएफ के संविधान में कुछ जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
आईएचएफ के अध्यक्ष गिल ने कहा, "दोनों महासंघों की बैठक के बाद विशेष आम बैठक बुलाई गई। आप कुछ ऐसे सदस्यों को भी देख सकते हैं, जो कुछ सालों से हॉकी जगत में दिखाई नहीं दे रहे थे। मुख्य फैसले दोनों संगठनों के विलय का हुआ। आईएचएफ ने आईडब्ल्यूएचएफ द्वारा पास किए गए प्रस्तवों को स्वीकार किया है। इसमें आईएचएफ के संविधान में कुछ जरूरी बदलाव की बात कही गई है। हम अक्टूबर के पहले सप्ताह में चुनाव कराएंगे।"
गिल ने कहा कि चुनावों के लिए सरकार को 21 दिन पहले सूचित किया जाएगा। साथ ही चुनावों तक दोनों संगठनों की कार्यकारिणी एक साथ काम करेगी और साथ मिलकर मामलों को सुलझाएगी।
आईडब्ल्यूएचएफ महासचिव अमृत बोस ने कहा कि आईएचएफ के साथ उनकी बैठक उपयोगी रही। बकौल बोस, "हमने पुरुष और महिला हॉकी को चलाने की दिशा में आईएचएफ को अपनी मंजूरी दे दी है। महिला हॉकी की 33 इकाइयों में से 30 ने बैठक में हिस्सा लिया। आईएचएफ की 45 इकाइयां हैं और इस बैठक में अधिकांश मौजूद थीं।"
यह पू्छे जाने पर कि एचआई के अध्यक्ष पद का चुनाव हारने वाले पूर्व कप्तान परगट सिंह आईएचएफ के साथ हैं? बोस ने कहा, "हां, परगट हमारे साथ हैं। वह पिछले दिन गिल से मिले हैं। आज की बैठक में भी उन्हें शामिल होना था कि लेकिन किसी व्यस्तता के कारण वह ऐसा नहीं कर सके। हम महासंघ का पुनर्निमाण करने के लिए पूर्व खिलाड़ियों की मदद लेंगे। साथ ही हम आईएचएफ के संविधान में हर जरूरी बदलाव करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।