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फीफा विश्व कप : दुर्भाग्य का प्रतीक है 13 नंबर की जर्सी?

13 नंबर की जर्सी कई देशों के लिए दुर्भाग्य का प्रतीक है लेकिन फुटबाल की सर्वोच्च संस्था फीफा को इस अंधविश्वास से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता।

यही कारण है कि 1954 में जब से जर्सी नंबर का चलन शुरू हुआ है, तब से लेकर आज तक विश्व कप के हर एक संस्करण में 13 नंबर की जर्सी मौजूद रही है।

यह अलग बात है कि 13 नंबर की जर्सी फाइनल मुकाबलों के दौरान नहीं दिखती। 1954 के बाद से अब तक कुल 14 फाइनल मुकाबले खेले गए हैं लेकिन उनमें से सिर्फ चार खिलाड़ी 13 नंबर की जर्सी के साथ फाइनल में खेले हैं।

13 नंबर की जर्सी पहनकर विश्व कप में व्यक्तिगत पुरस्कार जीतने वालों की संख्या तो और भी कम है। इनकी गिनती एक हाथ की अंगुलियों पर की जा सकती है।

वर्ष 1966 में पुर्तगाल ने तीसरा स्थान हासिल करते हुए विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उसने मोजाम्बिक में जन्मे स्ट्राइकर इयूसेबियो की मदद से यह मुकाम हासिल किया था।

इयूसेबियो 13 नंबर की जर्सी पहना करते थे। उन्होंने उस विश्व कप में कुल नौ गोल किए थे। इनमें से चार उत्तर कोरिया के साथ खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लगाए गए थे। पुर्तगाल ने 0-3 से पिछड़ रहे होने के बावजूद यह मैच जीता था।

इयूसेबियो को शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्डन बूट दिया गया था। इयूसेबियो को आज भी पुर्तगाल के महानतम खिलाड़ियों में एक गिना जाता है।

वर्ष 1954 में विश्व कप का फाइनल हंगरी और जर्मनी के बीच खेला गया था। दोनों टीमों में 13 नंबर की जर्सी पहनने वाले खिलाड़ी थे लेकिन जर्मनी के मैक्स मोरलॉक ने इस नंबर की जर्सी के साथ जर्मनी के लिए मैच का पहला गोल किया था।

उस समय जर्मनी 0-2 से पिछड़ रहा था। जर्मनी ने यह मैच 3-2 से जीता था। मोरलॉक ने अपने देश के लिए खेलते हुए सिर्फ 26 मैचों में 21 गोल किए थे।

इसके बाद 1970 विश्व कप फाइनल में 13 नंबर की जर्सी पहने एक खिलाड़ी मैदान में उतरा था। यह खिलाड़ी थे इटली के एंजेलो डोमेंघिनी। इटली वह मैच ब्राजील के हाथों 1-4 से हार गया था।

चार वर्ष बाद 1974 में जर्मनी के खिलाड़ी गर्ड मुलर ने 13 नंबर की जर्सी के साथ मैदान में उतरने की हिम्मत की थी। मुलर की किस्मत अच्छी थी कि उनकी टीम हालैंड के खिलाफ यह खिताबी मुकाबला 2-1 से जीतने में सफल रही थी।

हालैंड की ओर से जोहान नीसकींस ने दो बार 13 नंबर की जर्सी के साथ विश्व कप का फाइनल खेला था लेकिन दोनों ही मौकों पर उनकी टीम हार गई थी।

1982 में इटली के गैब्रीएले ओरियाली और 1994 में ब्रालीजल के एल्डायर ने 13 नंबर की जर्सी के साथ अपनी टीम को खिताबी जीत हासिल करते हुए देखा था। दोनों इस नंबर की जर्सी के साथ खिताब जीतने वाले पहले गैरजर्मन खिलाड़ी बने।

फीफा विश्व कप-2010 में जर्मनी के सबसे युवा खिलाड़ी मुलर 13 नंबर की जर्सी के साथ शानदार खेल दिखा चुके हैं। मुलर को इस नंबर की जर्सी इसलिए दी गई क्योंकि कप्तान माइकल बलाक चोटिल होने के कारण विश्व कप में नहीं खेल सके।

मुलर के लिए यह नंबर एक साधारण नंबर मात्र है। वह कहते हैं, "मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। आप कौन से नंबर की जर्सी पहनते हैं, इससे इस बात पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप खेलते कैसा हैं। मैं अंधविश्वासी नहीं हूं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:39 [IST]
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