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फीफा विश्व कप : पहली बार फाइनल में पहुंचा स्पेन (राउंडअप)

अपनी शानदार पासिंग शैली और मैदान पर बेहतरीन रणनीति तथा सामंजस्य के लिए मशहूर स्पेन की टीम ने खेल के हर विभाग में तीन बार के चैम्पियन जर्मनी को दोयम साबित किया और 11 जुलाई को सॉकर सिटी स्टेडियम में हॉलैंड के साथ खिताबी मुकाबले में खेलने का अधिकार हासिल किया।

हॉलैंड की टीम उरुग्वे को हराकर तीसरी बार फाइनल में पहुंची है लेकिन स्पेन की टीम पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची है। इससे पहले स्पेन की टीम को चार बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने का मौका मिला था लेकिन वह एक बार भी उस मौके को भुना नहीं सकी थी।

उम्मीद के मुताबिक यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा। दोनों टीमों ने श्रेष्ठता की इस जंग में जमकर लोहा लिया और मध्यांतर तक अपने खिलाफ एक भी गोल नहीं होने दिया। 73वें मिनट में स्पेन को मिले कार्नर पर जावी ने किक लिया और अपनी जुझारू शक्ति के लिए मशहूर मजबूत कदकाठी वाले पूयोल ने 15 गज की दूरी से लिए गए गोली की गति वाले हेडर की मदद से गोल करके अपनी टीम को बढ़त दिला दी।

यह अलग बात है कि पूयोल ने यह ऐतिहासिक गोल करके अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया लेकिन दुनिया भर के दर्शकों ने पूरे 90 मिनट तक मैदान का हर एक कोना नापने वाले जावी को मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा। जावी के ही शानदार कार्नर किक पर पूयोल ने स्पेन की बढ़त दिलाई।

84वें मिनट में स्पेन को बढ़त हासिल करने का एक और शानदार मौका मिला लेकिन प्रेडो ने उसे गंवा दिया। प्रेडो और डेविड विला के स्थानापन्न के तौर पर मौदान में आए फर्नाडो टॉरेस जर्मन डिफेंडरों की गैरमौजूदगी में डीएरिया में पहुंच गए थे लेकिन प्रेडो ने समय रहते टॉरेस को पास नहीं दिया और स्पेन के हाथ से 2-0 की बढ़त हासिल करने का यह मौका निकल गया।

इस हार ने जर्मनी के हाथों से चौथी बार खिताब जीतने का मौका छीन लिया है। अब उसे न चाहते हुए भी 10 जुलाई को दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे के साथ तीसरे और चौथे स्थान के लिए होने वाले प्ले-ऑफ मुकाबले की तैयारी करनी होगी। उरुग्वे को मंगलवार को खेले गए पहले सेमीफाइनल में हॉलैंड के हाथों 2-3 से हार मिली थी।

इस मैच की एक और खास बात यह रही कि भारी दबाव के बावजूद दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल भावना का परिचय दिया। यही कारण है कि पूरे मैच के दौरान किसी भी खिलाड़ी को किसी प्रकार का कार्ड नहीं दिखाया गया। एक दो मौकों पर खिलाड़ियों को चेताए जाने की घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो इस मैच को फीफा विश्व कप-2010 के सबसे साफ-सुथरे और खेल भावना से भरपूर मैच के तौर पर गिना जा सकता है।

ग्रुप स्तर और क्वार्टर फाइनल दौर तक के प्रदर्शन के लिहाज से विशेषज्ञ जर्मनी को इस मैच का विजेता मान रहे थे लेकिन स्पेन की टीम ने तमाम अटकलों को झूठा साबित करते हुए फाइनल खेलने का श्रेय हासिल किया। ग्रुप स्तर में दोनों टीमों का प्रदर्शन समान रहा था।

जर्मनी ने दो मैच जीते थे जबकि सर्बिया के खिलाफ उसे चौंकाने वाली हार मिली थी। उसने आस्ट्रेलिया को 4-0 से और घाना को 1-0 से हराया था लेकिन सर्बिया ने उसे 1-0 से पराजित किया था। स्पेन को भी ऐसे ही नतीजे से दो-चार होना पड़ा था।

उसे पहले मैच में स्विट्जरलैंड के हाथों 0-1 से हार मिली थी जबकि उसने अपने दूसरे मैच में होंडुरास को 2-0 से और तीसरे मैच में चिली को 2-1 से पराजित किया था। स्पेन की टीम ने विला के शानदार गोल की मदद से जहां नॉकआउट दौर में पुर्तगाल को 1-0 से पराजित किया था वहीं क्वार्टर फाइनल में उसने पराग्वे को भी इसी अंतर से हराया था। इस मैच में भी विला ही स्पेन के हीरो रहे थे।

जर्मनी ने अंतिम-16 दौर में इंग्लैंड को 4-1 से पराजित किया था। रेफरियों की गलती के कारण यह मैच हालांकि थोड़ा विवादित रहा लेकिन बड़े अंतर की जीत के साथ जर्मनी आखिरकार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद उसने दक्षिण अमेरिकी पावरहाउस अर्जेटीना पर 4-0 से बड़ी जीत दर्ज की थी। इस मैच में मिलर के अलावा मिरोस्लाव क्लोज ने अपना सौवां मैच खेलते हुए दो गोल किए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:40 [IST]
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