नई दिल्लीः रूस में आयोजित हुए फीफा विश्वकप का खुमार अब भले ही धीरे-धीरे समाप्त होने लगा हो लेकिन रूस के अंदर अभी भी इस फीफा का असर देखा जा सकता है। दरअसल रूस ने फीफा वर्ल्डकप के आयोजन के लिए बड़ी संख्या में स्टेडियमों के निर्माण पर बड़ी धनराशि खर्च की थी। वहीं अब जब यह विश्वकप समाप्त हो गया है तो इन स्टेडियमों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि वर्ल्डकप के लिए स्टेडियमों के निर्माण और उन्नयन के लिए रूस ने लगभग चार बिलियन डॉलर खर्च किए थे, वहीं विकसित शहरों के स्टेडियमों के अलावा देश के दूरदराज हिस्से के स्टेडियम की निर्माण भी भी शामिल है। ऐसे स्टेडियमों में वोल्गा नदी के किनारे बनाए गए निजनी नोवगोरोद स्टेडियम और छोटे तथा एकांत जगह सरांस्क में बने स्टेडियम शामिल हैं। ऐसे में रूस के लिए अक और बड़ी मुसीबत सामने आई है कि उसके दो स्टेडियम भारी बारिश की वजह से बुरी तरह से टूट गए हैं।
बारिश ने तोड़ी भविष्य की उम्मीदेंः गौरतलब हो कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को पता है कि वर्ल्डकप की सफलता का अंदाजा स्टेडियमों के भविष्य पर भी निर्भर करेगा और वह इसका बेहतर इस्तेमाल करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसा लगाकर स्टेडियम को बनवाया और आकर्षक किया लेकिन एक ओर जहां दर्शकों के लिए दूर दराज इलाकों में जाकर मुकाबले देखना बड़ी परेशानी है वहीं उससे पहले ही वोल्गोग्रैड में भारी बारिश के कारण स्टेडियम बुरी तरह से टूट गए हैं। गौरतलब हो कि इस स्टेडियम को बनवाने में रूस ने 198 मिलियन खर्च किए थे। ऐसे में अब वहां की सड़के भी टूट गई हैं और पावर सप्लाई भी बंद है। वहीं अब इतनी मात्रा में लगाया गया पैसा और इससे जुड़ी उम्मीदें भी टूटती नजर आ रही हैं।