मेघालय में है फुटबाल विश्व कप का दीवाना कीड़ा
मेघालय के री बोई जिले के निवासी इस कीड़े से अच्छी तरह परिचित हैं। इसका नाम 'नियानटेजर' है और यह सिकाडा परिवार के क्रिमेस्टिका वंशज का कीड़ा है। इसकी सबसे खास विशेषता यह है कि यह चार वर्ष में एक बार धरती से बाहर आता है और वह भी फुटबाल विश्व कप से ठीक एक महीने पहले।
जीव विज्ञानी बी. खारबुली ने आईएएनएस को बताया, "हां, यह कीड़ा चार वर्षो तक जमीन में ही रहता है। यही कारण है कि जनजातीय लोग इसे विश्व कप कीड़ा कहकर पुकारते हैं।"
क्रिमेस्टिका सिकाडा परिवार के कीड़ों उन 2500 प्रजातियों में से एक है जो दक्षिण एशियाई देशों में पाए जाते हैं। री बोई जिले के सिएडेन इलाके में रहने वाले बेंतेईबोर्लाग नांगशली क्रिमेस्टिका कीड़ों पर 1998 से नजर रखे हुए हैं। नांगशली ने पाया कि ये कीड़े 1998, 2002, 2006 और 2010 में धरती से बाहर निकले हैं। इन्हीं वर्षो में फुटबाल विश्व कप खेले गए हैं।
पेट के दोनों तरफ सफेद धारी लिए हुए यह कीड़ा जनजातीय लोगों का पसंदीदा आहार भी है। यह पक्षियों और मछलियां को भी पसंद आता है। यही कारण है कि मेघालय में यह 300 से 400 रुपये प्रति किलो के दर से बिका करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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