कोलकाता, 1 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वींस बैटन रिले का रविवार को कोलकाता में जोरदार स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में उत्साही खेल प्रेमी रविवार को सड़कों पर उमड़ पड़े।
भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान भाईचुंग भूटिया और पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली क्वींस बैटन रिले में हिस्सा लेने वाले खेल सितारों में शामिल रहे। यह रिले विक्टोरिया मेमोरियल गेट से शुरू हुआ।
सैकड़ों की संख्या में स्कूली बच्चों ने रंगबिरंगे परिधान में सितारों का स्वागत किया और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम.के.नारायणन ने खेल सितारों को बैटन देकर रिले को रवाना किया।
गांगुली ने कहा, "इस रिले में शामिल होना सुखद अनुभव रहा।"
एशियाई खेलों में दोहरा स्वर्ण पदक जीतने वाली, ज्योतिर्मयी सिकदर, तैराक बुला चौधरी, पूर्व फुटबाल खिलाड़ी पी.के.बनर्जी और चुन्नी गोस्वामी तथा हॉकी ओलंपियन गुरुबख्श सिंह उन 38 खेल हस्तियों में शामिल थे, जिन्होंने रिले मार्ग में बैटन को आगे बढ़ाया।
बंगाली फिल्मों के प्रमुख कलाकार, रितुपर्णा सेनगुप्ता, देव और शुभश्री भी रिले में मौजूद थे।
ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स के एक बैंड ने अपनी मधुर धुनों से उपस्थित जनसमूह को सम्मोहित कर लिया।
इसके पहले राष्ट्रमंडल खेलों की यह मशाल शनिवार को राजनीतिक विवादों के बीच त्रिपुरा पहुंची थी।
त्रिपुरा सरकार इस मशाल की अगवानी करना चाहती थी, लेकिन हवाई अड्डे पर त्रिपुरा प्रदेश ओलंपिक संघ (टीएसओए) के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता गोपाल राय ने इसकी प्रथम अगवानी की। विधायक राय ने पत्रकारों से कहा, "टीएसओए, भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त संगठन है।"
त्रिपुरा सरकार ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सरकार के अधिकारी और प्रतिनिधि आगवानी के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे।
खेल मंत्री तपन चक्रवर्ती ने कहा था, "जब तक सुरेश कलमाडी जैसे लोग ओलंपिक संघ का नेतृत्व करेंगे तब तक देश में खेलों का विकास संभव नहीं है। प्रदेश सरकार मशाल रैली जैसे खेल कार्यक्रम पर राजनीति नहीं करना चाहती है।"
भारतीय ओलंपिक संघ और राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष कलमाडी ने पिछले सप्ताह त्रिपुरा सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि टीएसओए के अध्यक्ष राय को इस मशाल की आगवानी करने दी जाए।
कलमाडी के पत्र का जवाब देते हुए त्रिपुरा सरकार ने अपने पत्र में कहा था कि त्रिपुरा में दो ओलंपिक समितियां हैं इसलिए यह समझदारी नहीं है कि एक गैर सरकारी संस्था मशाल की आगवानी करें।
विवाद के बाद मशाल रैली के निदेशक कर्नल के. एस. बान्सतू ने एक समारोह के दौरान यह मशाल खेल मंत्री चक्रवर्ती को सौंपी इसके बाद दोपहर बाद शहर में रैली निकाली गई।
यह मशाल 100 दिनों में देश के विभिन्न राज्यों से होते हुए पूरे देश की यात्रा कर रही है।
मशाल 25 जून को पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंची थी। उससे पहले उसने दुनिया भर में 170,000 किलोमीटर की यात्रा की। भारत में इसे राज्योंे और केंद्र शासित प्रदेशोंे की 20,000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए 30 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचना है। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरूआत तीन अक्टूबर को होनी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।