हॉलैंड में 'खलनायक' बन गए हैं वेब
दरअसल, फाइनल मुकाबले में वेब ने कुल 13 पीले कार्ड और एक लाल कार्ड दिखाया। इनमें से आठ पीले कार्ड डच खिलाड़ियों को दिखाए गए। एक लाल कार्ड भी डच खिलाड़ी जॉन हेतिंगा को दिखाया गया। सिर्फ पांच पीले कार्ड स्पेन के खिलाड़ियों को दिखाए गए। विश्व कप फाइनल मुकाबले में सबसे ज्यादा पीले कार्ड रविवार को ही देखने को मिले।
ब्रिटिश समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार एम्सटरडम से प्रकाशित सभी प्रमुख अखबारों ने अपने संपादकीय में वेब पर हमले बोले हैं। इन अखबारों का कहना है कि वेब ने अपने 'पक्षपातपूर्ण' फैसलों से डच टीम की हार की बुनियाद रखी। गौरतलब है कि अतिरिक्त समय में इनेएस्ता के गोल की बदौलत स्पेन ने हॉलैंड को 1-0 से हराकर विश्व कप का पहला खिताब जीता। डच मीडिया का मानना है कि वेब ने जान बूझकर हॉलैंड को पेनेल्टी नहीं दिए ताकि प्रतिद्वंद्वी टीम की जीत सुनिश्चित हो जाए।
डच अखबार 'डी टेलीग्राफ' लिखता है, "मैदान पर 120 मिनटों तक वेब का व्यवहार बहुत रुखा था। वह मैच में निष्पक्षता नहीं बना पाए। उनसे डच खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों को निराशा हाथ लगी।"
इससे पहले हॉलैंड की टीम के कोच बर्ट वान मार्विक ने इंग्लैंड के रैफरी वेब पर 'पक्षपातपूर्ण रवैया' अपनाने का आरोप लगाया था। मैच के बाद मार्विक मैदान से बाहर जाते समय वेब से झगड़ते हुए दिखे थे। उन्होंने कहा था, "मेरा मानना है कि रैफरी ने मैच को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया। अगर आपने पूरा मैच देखा होगा तो अंदाजा लग जाएगा कि किस तरह से मैच को प्रभावित किया गया "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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