खेल प्रेमियों के लिए जश्न मनाने का मौका
प्रदीप मैगज़ीन
वरिष्ठ खेल पत्रकार
खेल जगत में हाल में हो रही घटनाओं को निहारना किसी भी खेल प्रशंसक के लिए बड़ी खुशी की बात हो सकती है. इस समय उसके पसंद की ढेर सारी चीजें सजी हुई हैं. मुश्किल है कि वह किस एक खेल का आनंद उठाए और किसे न देख पाने का जोखिम ले. गौर करें कि कितनी लाजवाब चीजें मौजूद हैं!
एक बटन दबाकर आप फ़ुटबॉल खिलाड़ियों के जादुई कौशल को देख सकते हैं कि किस तरह से वे घूमती, चिढ़ाती हुए गेंद को अपने पांव से अपने कब्जे में कर रहे हैं और अपने इशारे पर नचा रहे हैं. अगर आप इससे संतुष्ट नहीं हैं तो अपना टीवी चैनल बदलें और गोली की रफ़्तार से आगे पीछे उड़ते हुए टेनिस की गेंद देखें. यहां भी अपनी पसंद को तय कर पाना मुश्किल है.
क्या आप फेडरर को, जो इन दिनों काफ़ी गलतियां भी कर रहे हैं, रैकेट पर अपनी जादुई पकड़ जमाते देखना चाहते हैं या फिर गुरुत्वाकर्षण बल का विरोध करते अपनी कभी न थकने वाली ऊर्जा से लबरेज नडाल को देखना चाहते हैं जिनकी फुर्ती को देखकर कोई चीता भी शरमा जाए.
अगर इन सबसे भी आपको संतोष नहीं मिलता है तो आप देख सकते हैं खिलाड़ियों को दस घंटे से अधिक समय तक लगातार खेलते हुए और इसके बाद भी उनमें जबरदस्त उत्साह है, मानो वे बाहर की किसी ऐसी ऊर्जा से नियंत्रित हो रहे हैं जिसे परिभाषित कर पाना कठिन है.
भारतीय खिलाड़ियों के जलवे
अगर आप एक न्यूट्रल प्रशंसक नहीं हैं और अभी भी भारतीय होने से प्यार है, तो भारतीय क्रिकेट टीम को दुबारा मैच जीतते हुए और एशियाई चैंपियन का ताज पहनते हुए देख सकते हैं.
जो लोग क्रिकेट और उसकी अति से नाक भौं सिकोड़ते हैं, तो उनके लिए गर्व से अपना सीना चौड़ा करने के लिए मौजूद हैं साइना नेहवाल. वे एक ऐसे खेल में विश्व की तीसरी नंबर की खिलाड़ी हैं जहां एक वजनरहित शटल को नियंत्रित करने के लिए ताकत के बजाय बारीक कौशल की जरूरत पड़ती है. और वे भारत की अब तक की सबसे महान खिलाड़ी बनने की राह पर हैं. याद रखें वो महज 20 साल की हैं.
अगर फील्ड की गतिविधियों से आप बोर हो रहे हैं तो आप भारत लाए जा रहे क्वीन बैटन देख सकते हैं और कॉमनवेल्थ खेलों के लिए बाकी दिनों की गिनती कर सकते हैं. वो खेल जिसके बारे में हमसे कहा गया है कि वो दुनिया को भारत की खेल और संगठनात्मक ताकत का दीदार कराएगा.
फिर यहां मौजूद है आईपीएल जो नहीं होने पर भी ख़बरों में रहता है, जो अब अपनी जगह बना चुका है, जहां ऐसे आदमी के सेवाओं की जरूरत नहीं है जो दुनिया में डींग हांकने से नहीं थकता है कि उसने दुनिया की "सबसे महान लीग" तैयार की है.
आईपीएल के निलंबित चेयरमैन ललित मोदी के लिए एक क्षण के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करें.
मुझे लगता है कि यदि विश्व कप फ़ुटबॉल के साथ ही आईपीएल होता तो भारतीय मीडिया उसे कैसे दिखाती. क्या आईपीएल को भी वो साइना की सफलता की ख़बर की तरह या एशिया कप में भारत की जीत की तरह फ़ुटबॉल के नीचे दफना पाते? एक रोचक चिंतन जो विजय माल्या की ताकत और उनके जैसे लोगों का परीक्षण करेगा.
(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)
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