फीफा विश्व कप : अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं भारतीय
जोहांसबर्ग, 27 जून (आईएएनएस)। भारत भले ही फुटबाल विश्व कप में हिस्सा नहीं ले रहा हो लेकिन फीफा विश्व कप-2010 के आयोजन में भारतीय उपस्थिति काफी मायने रख रही है। यहां रहने वाले कई भारतीय जोर-शोर से स्वयंसेवकों के तौर पर विश्व कप के आयोजन में योगदान दे रहे हैं।
जोहांसबर्ग के एक कॉलेज में पढ़ने वाली 19 वर्षीया मेलिसा रेड्डी मूल रूप से भारतीय हैं। वह मीडिया सेंटर के वेलकम डेस्क पर काम करती हैं और यहां पहुंचने वाले सभी पत्रकारों का वह गर्मजोशी के साथ स्वागत करती हैं। मेलिसा का काम पत्रकारों को विश्व कप से जुड़ी हर जानकारी मुहैया करना है।
मेलिसा ने आईएएनएस से कहा, "विश्व के सबसे बड़े खेल आयोजन का हिस्सा होना महान अवसर है। इस अनुभव के दम पर मैं सेवा क्षेत्र में अपने लिए बेहतर विकल्प तलाश सकती हूं। मेरे माता-पिता इस काम के लिए तैयार नहीं थे लेकिन मैं उन्हें मनाने में सफल रही। आज मुझे यह काम करते हुए गर्व होता है। मुझे इस बात का गर्व है कि मैं इस महान आयोजन का हिस्सा हूं।"
मेलिसा की तरह 21 वर्षीय अरशान खान भी मानते हैं कि विश्व कप का हिस्सा होना गर्व की बात है। अरशान स्नातक की परीक्षा देने के बाद खेल प्रबंधन का कोर्स कर रहे हैं। उनका काम प्रीटोरिया में स्थित लोफ्ट्स वर्सफील्ड स्टेडियम में पहुंचने वाले दर्शकों की मदद करना है।
अरशान कहते हैं, "यह कठिन काम है। मैच के दिनों में लोगों को नियंत्रित करना सचमुच कठिन काम है। मेरे लिए यह चुनौती है लेकिन मैं इसे पसंद करता हूं। मेरे लिए यह अनुभव काफी काम आएगा। पेशेवर लिहाज से यह मेरे काफी काम आएगा।"
दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के करीब 10 लाख लोग रहते हैं। ऐसे में यहां रहने वाले युवा भारतीयों के लिए स्वंयसेवकों की सूची में जगह बनाना आसान नहीं था। इस काम में कई वरिष्ठ भारतीयों को प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
50 वर्षीय मानिक पटेल को फुटबाल से प्यार है और यही कारण है कि उन्होंने एक महीने की छुट्टी लेकर खुद को विश्व कप के इस महा उत्सव में शामिल किया है। पटेल को एलिस पार्क स्टेडियम में कई अन्य लोगों के साथ प्रबंधन का काम दिया गया है। इस दौरान पटेल को महान फुटबाल खिलाड़ियों को करीब से देखने का मौका मिलता है।
पटेल कहते हैं, "ऐसा मौका जीवन में एक बार ही आता है। मैं इसे अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाहता था। मेरे लिए एक महीने की छुट्टी इस शानदार अनुभव के आगे कुछ भी नहीं। मेरे लिए यह सबसे अलग अनुभव है। मैं इसका जमकर लुत्फ उठा रहा हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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