फीफा विश्व कप: इतिहास में दर्ज हुए कैसिलास, म्यूलर और फोर्लान (लीड-2)
कैसिलास फुटबाल इतिहास के तीससरे ऐसे गोलकीपर-कप्तान बन गए जिन्होंने विश्व कप की ट्रॉफी उठाई। उन्हें इस टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर भी चुना गया।
स्पेन की ओर इनेएस्ता के विजयी गोल ने कैसिलास के लिए वह सुनहरा पल मुहैया कराया जिसे आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी। स्पेन ने पहली बार विश्व कप जीता है। ऐसे में इस टीम के कप्तान कैसिलास के लिए वाकई जिंदगी का सबसे सुखद क्षण रहा।
इससे पहले वर्ष 1934 का विश्व कप जीतने वाली इटली टीम के गोलकीपर गियानपेरो कोम्बी कप्तान भी थे। इसके बाद इटली के ही डिनो जोफ को वर्ष 1982 यह सौभाग्य प्राप्त हुआ।
फीफा के तकनीकी अध्ययन समूह ने कैसिलास को इस टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुना। 29 साल के कैसिलास ने रविवार को हॉलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में कई मौकों पर शानदार बचाव किया।
पराग्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उन्होंने पेलेल्टी का बेहतरीन बचाव किया था। उस मैच में स्पेन को 2-1 से जीत मिली थी। वह रियाल मेड्रिड की ओर से भी खेलते हैं।
रुग्वे के स्ट्राइकर फोर्लान को विश्व कप-2010 का 'गोल्डन बॉल' दिया गया। पत्रकारों ने उन्हें इस टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी की दौड़ में स्पेन के डेविड विला और हॉलैंड के वेल्से स्नाइडर जैसे स्टार खिलाड़ी थे। परंतु टूर्नामेंट में फोर्लान का शानदार प्रदर्शन सब पर भारी पड़ गया।
जर्मनी के युवा मिडफिल्डर म्यूलर को गोल्डन बूट दिया गया। 20 साल के म्यूलर ने इस विश्व कप में कुल पांच गोल किए। उनके बराबर स्पेन के विला और स्नाइडर जैसे भी रहे। परंतु म्यूलर ने कई ऐसे मौके बनाए जिससे उनकी टीम गोल कर सकी या फिर कई बार वह खुद गोल करने के नजदीक पहुंचे थे। इसलिए वह सब पर भारी पड़े।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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