बत्रा के मुताबिक खेल मंत्रालय ने परगट को अध्यक्ष पद के लिए चुनने हेतु एचआई पर दबाव डाला था लेकिन जैसे ही विद्या स्टोक्स ने परगट को पराजित किया, खेल मंत्रालय ने हिसाब चुकाने के लिए एचआई की मान्यता समाप्त कर दी।
बत्रा ने कहा, "परगट को अध्यक्ष बनाने के लिए हमारे ऊपर काफी दबाव था। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर मंत्रालय किसी एक उम्मीदवार में इतनी रुचि क्यों ले रहा था।"
"हमने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार चुनाव के परिणाम घोषित नहीं किए लेकिन मंत्रालय को जैसे ही इसकी जानकारी मिली कि परगट हार गए हैं, उसने हम पर तमाम तरह के आरोप लगाकर हमारी मान्यता रद्द कर दी। मैं पूछना चाहता हूं कि मंत्रालय को चुनाव परिणाम कहां से मिला, क्या उसे परगट ने परिणाम के बारे में बताया है?"
गुरुवार को हुए चुनावों में स्टोक्स को अध्यक्ष और बत्रा को महासचिव चुना गया था। स्टोक्स ने परगट को 20 मतों के अंतर से पराजित किया था जबकि बत्रा ने गुंजुम हैदर को भारी मतों से हराया था। एचआई का यह चुनाव सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद कराया गया था। सर्वोच्च न्यायालय एचआई, खेल मंत्रालय और दिल्ली तथा बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव पर तीन सप्ताह के रोक के मामले में 19 अगस्त को अंतिम रूप से सुनवाई करेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।