भूटिया की सेंचुरी
भारतीय फ़ुटबॉल के सबसे जाने-पहचाने चेहरे बाईचुंग भूटिया ने सेंचुरी लगा दी है.
रविवार को उन्होंने दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम में चल रहे नेहरु कप में उन्होंने किर्गिस्तान के ख़िलाफ़ भारत के लिए सौंवा मैच खेला.
बाईचुंग ने भारत के लिए अपना पहला मैच 1995 में नेहरु कप में थाईलैंड के ख़िलाफ़ खेला था.
सच हुआ सपना
और भूटिया ने इस मौक़े को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. क्योंकि इस मैच उन्होंने एक गोल भी किया और मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब भी हासिल किया.
उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलना बड़े सम्मान की बात है.
भूटिया ने कहा कि अपने देश के लिए सौ मैच खेलना किसी के लिए भी सपना हो
सकता है और इस सपने का साकार होना वो जीवन भर याद रखेंगे.
बाइचुंग भूटिया ने ये लैंडमार्क पूरा करने पर सारी भारतीय फ़ुटबॉल टीम का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने कहा कि अपने करियर की शुरुआत उन्होंने कभी ये नहीं सोचा था कि वो भारत के लिए सौ मैच खेलेंगे.
उन्होंने कहा कि ये उपलब्धि पिछले चौदह-पंद्रह सालों में उनके साथ खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को समर्पित कर रहे हैं.
ख़ुशी
भारत के स्टार फ़ॉर्वर्ड सुनील छेत्री ने कहा कि देश के लिए सौ मैच खेलना एक बड़ी उपलब्धि है.
उन्होंने कहा ‘ ये आम बात नहीं है, ख़ासकर सारे करियर में अच्छी फ़ॉर्म बरक़रार रख पाना एक बहुत बड़ी बात है.’
भारतीय टीम के कोच बॉब हॉउटन ने कहा कि वो बाइचुंग के लिए बहुत ख़ुश हैं, ख़ासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने अपनी सौंवा मैच में गोल ठोका और मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब भी पाया.
भारतीय टीम फ़ुटबॉल टीम के अहम खिलाड़ी महेश गावली ने कहा कि ये मैच टीम और बाईचुंग दोनों के लिए यादगार रहेगा.
उन्होंने कहा ‘ मैं तो बस इतना ही कहूंगा – वैल डन भूटिया’
तिनकिताम का सपूत
बहुत से लोगों के लिए ये बताना मुश्किल हो कि भारते के नक्शे में तिनकिताम कहा हैं लेकिन भारतीय फ़ुटबॉल के दिवाने समर्थक जानते हैं कि 1976 में सिक्किम के इसी गांव में बाईचुंग भूटिया का जन्म हुआ था.
1992 में भारत में स्कूलों के फ़ुटबॉल टूर्नामेंट सुब्रतो कप में दिल्ली में पहली बार ‘सिक्किमीज़ स्नाइपर’ का हुनर सामने आया.
वो 1999 में किसी भी यूरोपिय फ़ुटबॉल क्लब के लिए पेशेवर फ़ुटबॉल खेलने वाले पहले भारतीय बने. उस साल उन्होंने Bury FC के साथ तीन साल का क़रार किया.
हांलाकि ये रिश्ता उतना कारगर साबित नहीं हुआ जितना बाइचुंग के प्रशंसकों को उम्मीद थी.
फ़ुटबॉल से आगे
भूटिया सार्वजानिक तौर पर तिब्बती आंदोलन के बारे में अपने विचार रख चुके हैं. 2008 में उन्होंने भारत में ओलंपिक टॉर्च के साथ दौड़ने से इनकार कर दिया था.
उन्होंने कहा था कि वो तिब्बती मुद्दे से सहानुभूति रखते हैं और वो तिब्बती लोगों के संघर्ष में उनके साथ हैं.
बाइचुंग सिर्फ़ फ़ुटबॉल में दिलकश ड्रिबलिंग ही नहीं करते डांस फ़्लोर पर भी उनके क़दम ख़ूब थिरकते हैं. हाल ही में उन्होंने एक डांसिंग टीवी रियलटी शो में हिस्सा ही नहीं लिया बल्कि उसमें जीत भी हासिल की.
ये अगल बात है कि इसी शो की वजह से बाइचुंग और उनके क्लब मोहन बागान के बीच रिश्तों में खटास आ गई. बाद में भूटिया ने मोहन बाग़ान छोड़ दिया और कोलकाता के दूसरे मशहूर क्लब ईस्ट बंगाल में शामिल हो गए.
1993 में भूटिया ने ईस्ट बंगाल से ही पेशेवर फ़ुटबॉलर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी.
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