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यूएस ओपन में भारतीय अंपायरों की तूती

सलीम रिज़वी

बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए, न्यूयॉर्क से

भारत के टेनिस खिलाड़ियों ने कई सालों से विश्व की कई ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में विभिन्न वर्गों में लोहा मनवाया है लेकिन अब भारतीय मूल के टेनिस अंपायर भी ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

ये अंपायर भले ही सानिया मिर्ज़ा, लिएंडर पेस और महेश भूपति जैसे खिलाड़ियों की तरह दुनिया भर में जाने- पहचाने न जाते हों लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन अंपायरों की मैचों के दौरान जांच परख कर फ़ैसले लेने की क्षमता का असर खिलाड़ियों का भविष्य संवार और बिगाड़ सकता है.

इस साल यूएस ओपन में भारतीय मूल के कुल पांच अंपायर पूरे टूर्नामेंट के दौरान होने वाले मैचों में अंपायरिंग कर रहे हैं.

इनके नाम हैं अभिषेक मुखर्जी, अभय पार्थी, रेवती सुधाकर, विवेक कुमार और मोहन.

अमरीका में चल रही यूएस ओपन टेनिस प्रतियोगिता के लिए दुनिया भर से क़रीब 300 अंपायरों को चुना गया है. ये अंपायर फ़्लंशिंग मैडोज़ में स्थित कुल 18 टेनिस कोर्टों पर होने वाले मैचों में अंपायरिंग करते हैं.

ये अंपायर अंतरराष्ट्रीय टेनिस फ़ेडेरेशन के नियमों के अनुसार मैचों को सुचारू रूप से खिलाए जाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

हर मैच के दौरान एक कोर्ट पर चार अंपायरों के अलावा सात लाइन अंपायरों की दो टीमें तैनात की जाती है. सात लाइन अंपायरों की एक टीम एक घंटे तक लगातार कोर्ट पर रहती है, फिर दूसरी टीम आ जाती है. और इसी प्रकार आठ घंटे तक लाइन अंपायरों को बारी-बारी से टेनिस मैचों को नियम क़ानून से खिलाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है.

भारत के अभिषेक मुखर्जी इस वर्ष दूसरी बार यूएस ओपन में अंपायरिंग करने आए हैं. वह कहते हैं कि उनको टेनिस खेलना हमेशा से पसंद रहा है.

लंबा सफ़र

अभिषेक अभी तक टेनिस की हर एक ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता में अंपायरिंग कर चुके हैं. इनमें ऑस्ट्रेलियाई ओपन, फ़्रेंच ओपन, विंबल्डन और यूएस ओपन सभी शामिल हैं.

इसके अलावा उन्होंने बीजिंग ओलंपिक में भी अंपायरिंग की थी.

अभिषेक कहते हैं, “ओलंपिक में अंपायरिंग करने के लिए चुना जाना मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था. और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा था अपनी कामयाबी पर. मैंने वहाँ रोजर फ़ेडरर के मैच के अलावा भारत के भी कई मैचों में अंपायरिंग की थी. वह बहुत ही अच्छा अनुभव था.”

टेनिस मैचों में अंपायरिंग शुरू करने से पहले कुछ अरसा उन्होंने टेनिस खेली भी लेकिन कुछ ख़ास कामयाबी नहीं हासिल कर पाए और फिर तय किया कि वह अंपायरिंग करेंगे लेकिन शुरू में टेनिस अंपायरिंग को एक करियर की तरह चुनना उनके लिए कोई आसान काम न था.

अभिषेक मुखर्जी कहते हैं, “माता-पिता तो चाहते थे कि मैं डॉक्टर या इंजीनियर बनूँ लेकिन मुझे ये धुन लग गई थी कि टेनिस में ही कुछ करना है. शुरू में मेरे दोस्त भी कहते थे कि यह क्या करियर चुना है तुमने, तो मैं कहता था कि हाँ अलग सा करियर तो है. कभी-कभी सोचता भी था कि कहीं मैं ग़लत करियर तो नहीं चुन रहा हूं.”

मुखर्जी बताते हैं कि ग्रैंड स्लैम टेनिस प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग करते हुए ग़लती की बहुत ही कम गुंजाइश होती है और किसी भी अंपायर के चयन में उसका रिकार्ड अच्छा होना बहुत मायने रखता है. इस स्तर पर अंपायरिंग करने के लिए चुने जाने के लिए प्रतिस्पर्धा भी बहुत है.

कड़ी प्रतिस्पर्धा

अंतरराष्ट्रीय स्तर के लाइन अंपायर बनने के लिए एटीपी और डब्लूटीए के टेनिस के सारे नियम-क़ानूनों को समझना पड़ता है, इसके अलावा मैचों के दौरान विवादों को सुलझाने का हुनर भी सीखना पड़ता है.

राष्ट्रीय स्तर पर टेनिस की अंपायरिंग का अनुभव लेने के बाद राष्ट्रीय टेनिस संस्था अंपायर के काम का आंकलन करती है फिर कहीं बारी आती है ग्रैंड स्लैम में अंपायरिंग के लिए चयन की.

अभिषेक मुखर्जी ने यूएस ओपन के फ़ाइनल और सेमी फ़ाइनल मैचों में भी अंपायरिंग की है. वो कहते हैं कि विश्व के बड़े खिलाड़ियों के मैच में अंपायरिंग करना एक बड़ी चनौती होती है.

“शुरू में तो मुझे बड़े बड़े खिलाड़ियों के मैचों में अंपायरिंग करने में थोड़ी घबराहट भी होती थी. क्योंकि मुझे लगता था कि मेरे फ़ैसले से उन खिलाड़ियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है लेकिन अब काफ़ी वर्षों से करने के बाद मुझे मज़ा भी आता है और मैं इसे एक चुनौती के तौर पर लेता हूं.”

अब क़रीब 12 वर्षों से अभिषेक मुखर्जी दुनिया भर में विभिन्न मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं. वो कहते हैं कि साल भर में कई महीने उन्हें घर वालों से दूर रहना पड़ता है, मुश्किल भी होती है लेकिन फिर भी वह इस करियर से संतुष्ट हैं.

वो बताते हैं कि अब भारत में कई अच्छे टेनिस अंपायर आगे आ रहे हैं. अब आने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन में तीन भारतीय अंपायर अंपायरिंग करेंगे.

अभिषेक उभरते हुए अंपायरों को सलाह देते हुए कहते हैं, “टेनिस अंपायरिंग को शुरू से ही करियर के तौर पर नहीं देखा जा सकता है. पहले स्नातक और अन्य डिग्रियां हासिल करने के बाद अंपायरिंग को करियर के तौर पर देखना चाहिए लेकिन इस दौरान अंपायरिंग जारी रखनी चाहिए. औऱ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग करने के लिए कई वर्षों की अंपायरिंग और अच्छा रिकॉर्ड होना ज़रूरी होता है.”

अभिषेक बंगाल राज्य टेनिस एसोसिएशन में खेल विकास अधिकारी के रूप में काम भी करते हैं. उन्हें अंपायरिंग के लिए ख़ासतौर पर छुट्टियाँ दी जाती हैं.

अब उनकी कोशिश है कि वह उपरी स्तर के लिए परीक्षा देकर चेयर अंपायर बनें.

यूएस ओपन के बाद अब अभिषेक शांघाई मास्टर्ज़ के लिए चीन जा रहे हैं और उसके बाद ऑस्ट्रेलियाई ओपन में भी अंपायरिंग करने जाएंगे.

मैसूर से लेकर...

यूएस ओपन में अंपायरिंग कर रहे एक और भारतीय मूल के टेनिस अंपायर अभय पार्थी भारत के मैसूर शहर में जन्मे लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं.

अभय 4 वर्ष के थे जब उनके माता-पिता ऑस्ट्रेलिया जाकर बस गए थे. उन्होंने यूनिवर्सिटी के स्तर तक टेनिस खेली है. वह कहते हैं कि जब वह टेनिस खेलते थे तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने जीवन में कभी टेनिस मैचों में अंपायरिंग करेंगे.

उनका कहना था, “जब मैं टेनिस खेलता था तो अपने मैचों के दौरान मैं कभी अंपायरों पर ज़्यादा ध्यान भी नहीं देता था लेकिन यह अचानक ही हो गया कि जब मैं बॉलबॉय के तौर पर कुछ मैचों में काम करता था तब मुझे लगा कि अंपायरिंग करना भी एक मज़ेदार काम है. मुझे टेनिस बहुत पसंद है और मैं चाहता था कि टेनिस से जुड़ा रहूं.”

28 वर्षीय अभय वैसे तो अब भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और कहते हैं कि वह इंजीनियर बन जाने के बाद भी मौक़ा निकाल कर टेनिस अंपायरिंग करते रहेंगे.

लेकिन ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए क्या टेनिस के बजाय क्रिकेट की तरफ़ झुकाव नहीं हुआ?

अभय कहते हैं, “नहीं मुझे तो क्रिकेट उतना पसंद नहीं है, मैं टेनिस का दीवाना हूं और मैंने टेनिस बहुत खेली है और इसीलिए मुझे इसकी अंपायरिंग करना भी पसंद है.”

टेनिस के दीवाने होने के बावजूद भी अभय कहते हैं कि उनके सबसे पसंदीदा क्रिकेटर हैं सचिन तेंदुलकर.

अब अभय भारत में अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भी अंपायरिंग करने के लिए चुन लिए गए हैं और वह भारत जाकर टेनिस मैचों में अंपायरिंग करने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं.

अमरीका में जन्मे विवेक कुमार भी भारतीय मूल के अंपायर हैं जो इस वर्ष यूएस ओपन में अंपायरिंग कर रहे हैं. विवेक कहते हैं कि टेनिस का खेल उन्हें पसंद है और वह क़रीब सात वर्षों से अंपायरिंग कर रहे हैं.

वैसे तो वह वॉशिंगटन स्थित जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं लेकिन अपनी वार्षिक छुट्टी के दौरान वह अमरीकी ओपन में अंपायरिंग करते हैं. इसके अलावा अमरीका में अन्य प्रतियोगिताओं में भी विवेक अंपायरिंग करने जाते हैं.

स्पष्ट है कि भारतीय मूल के लोगों में भी अब अंतरराष्ट्रीय टेनिस मैचों में अंपायरिंग की ओर तेज़ी से रुझान बढ़ रहा है और अब यही लगता है कि आने वाले दिनों में टेनिस के शौक़ीन लोगों को भारतीय टेनिस खिलाड़ियों के साथ-साथ भारतीय मूल के अंपायरों की भी टेनिस कोर्ट पर मौजूदगी का अहसास होने लगेगा और सिर्फ़ लाइन अंपायर ही नहीं बल्कि चेयर अंपायर भी.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:24 [IST]
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