दिल्ली और बांबे उच्च न्यायालय ने हॉकी इंडिया के चुनावों को रोक दिया है. ये चुनाव 28 जुलाई को नई दिल्ली में होने थे.
पहले मुंबई हॉकी एसोसिएशन की याचिका की सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने हॉकी इंडिया के चुनावों पर तीन हफ़्तों के लिए रोक लगा दी थी.
अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यही फ़ैसला सुनाया है.
केंद्र सरकार को हॉकी इंडिया और इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन को लेकर क़ानूनी स्थति स्पष्ट करनी थी. ऐसा न करने पर ही दिल्ली हाईकोर्ट का ये फ़ैसला आया है.
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा था कि हॉकी इंडिया और इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन दोनों ही मान्यता प्राप्त संस्थाएं हैं.लेकिन कोर्ट ने कहा है कि सरकार का ये जवाब किसी भी स्पोर्ट्स संस्था को मान्यता देने के लिए बनाए गए नियमों के विपरीत है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जवाब को नियमों का उल्लंघन बताया है क्योंकि नियमों के अंतर्गत किसी भी खेल की सिर्फ़ एक ही संस्था को मान्यता मिल सकती है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जज एस मुरलीधर का कहना था, “अगले आदेश तक अदालत के पास हॉकी इंडिया के चुनाव की प्रक्रिया को रोकने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर मुंबई हॉकी एसोसिएशन की तरफ़ से इस मामले के वकील विजेंद्र जाबरा ने बीबीसी से कहा, “ 28 जुलाई को दिल्ली में हॉकी इंडिया के होने वाले चुनावों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. चुनावों पर ये रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि हॉकी इंडिया ने इससे पहले दिए गए हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया था.”
दरअसल मुंबई हॉकी एसोसिएशन की मांग है कि उसे हॉकी इंडिया से मान्यता मिलनी चाहिए और इसके लिए एमएचए ने जनवरी में एक अर्ज़ी दी थी.
हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश के तहत हॉकी इंडिया को इसका छह हफ़्तों में जवाब देना था.
जाबरा ने कहा कि हॉका इंडिया ने उन आदेशों का पालन नहीं किया इसलिए मुंबई हॉकी एसोसिएशन ने दोबारा एक नई याचिका दायर की थी.