उन्होंने माना कि महिला हॉकी खिलाड़ी की शिकायत ही कौशिक के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए पर्याप्त है. रिपोर्ट जारी करते हुए बत्रा ने कहा, "समिति का मानना है कि महिला हॉकी खिलाड़ी रंजीता के आरोप में काफ़ी दम है लेकिन समिति के पास इस पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है."
इस दलील के साथ ही समिति ने गेंद भारत सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण और पुलिस के पाले में डाल दिया है. इस तरह समिति ने न तो एमके कौशिक को दोषी करार दिया और न ही उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. समिति ने टीम के वीडियोग्राफर बासवराज को भी दोबारा टीम के लिए काम करने का मौक़ा नहीं दिया है.
कौशिक के ख़िलाफ़ यौन शोषण के आरोप लगने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. महिला हॉकी खिलाड़ी रंजीता देवी ने कौशिक के विरुद्ध ये आरोप लगाए और 30 अन्य ने उस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.
समिति
हॉकी इंडिया ने मामले की सुनवाई के लिए चार सदस्यों की एक समिति गठित की थी जिसमें पूर्व खिलाड़ियों ज़फ़र इक़बाल और अजित पाल सिंह के अलावा सुदर्शन पाठक और राजीव मेहता शामिल हैं.
एमके कौशिक ने कहा कि मुझे विश्वास है कि निर्णय मेरे ही पक्ष में होगा. कौशिक पिछले कई वर्षों से महिला टीम के कोच रहे हैं. उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ये उन्हें बदनाम करने की साज़िश है.
हालांकि इस बीच वीडियोग्राफर बासवराज की कुछ लड़कियों के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें भी मीडिया में सामने आईं और उन्हें जांच शुरू होने से पहले ही निलंबित कर दिया गया.
रंजीता देवी महिला खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में खेल चुकी हैं. उनका कहना है कि टीम के अधिकतर खिलाड़ी ग़रीब पृष्ठभूमि के हैं इसलिए वो कोच या किसी अन्य अधिकारी के ख़िलाफ़ शिकायत करने से घबराती हैं.
भारतीय टीम को अगले ही महीने विश्व कप में हिस्सा लेने अर्जेंटीना जाना है, इसके अलावा दिल्ली में ही टीम को राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेना होगा और फिर चीन में एशियाई खेल होने हैं. ऐसे मौक़े पर टीम के कोच पर ऐसे आरोप और उनका पद से हटना टीम के लिए काफ़ी बड़ा झटका माना जा रहा है.