नई ऊंचाई पर पहुंचे पंकज आडवाणी
चेन्नई, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड में आयोजित विश्व पेशेवर बिलियर्ड्स खिताब जीत लिया है। आडवाणी इस चैंपियनशिप के 139 साल के इतिहास में खिताबी जीत हासिल करने वाले दूसरे भारतीय हैं।
विश्व चैंपियन बनने की राह में पु्णे में जन्म 24 साल के आडवाणी ने नौ बार के विजेता इंग्लैंड के माइक रसेल को पराजित किया। लीड्स के नार्दन स्नूकर सेंटर में रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में आडवाणी ने रसेल को 2030-1253 के भारी अंतर से हराया।
इससे पहले गीत सेठी ने 1992 से 2006 के बीच कुल छह बार यह खिताब जीता था। सेठी ने 1992, 1993, 1995, 1998, 2001 और 2006 में इस खिताब पर कब्जा किया था। सेठी ने अपने शुरुआती तीन खिताब रसेल को ही हराकर जीता था।
एक पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर यह आडवाणी का पहला बिलियर्ड्स विश्व खिताब है। वह इससे पहले विश्व एमेच्योर बिलियर्ड्स और स्नूकर विश्व खिताब जीत चुके हैं। आडवाणी ने 2003 में चीन में आयोजित विश्व चैंपियनशिप के दौरान एमेच्योर स्नूकर खिताब जीता था। वर्ष 2005 में माल्टा में आयोजित विश्व एमेच्योर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने के बाद आडवाणी ने अपना नाम रिकार्ड बुक में दर्ज करा लिया था।
आडवाणी स्नूकर तथा बिलियर्ड्स एमेच्योर दोनों खिताबों पर कब्जा करने वाले विश्व के दूसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले यह कारनामा माल्टा के पॉल मिफ्सुद ने किया था। आडवाणी विश्व के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 'प्वाइंट' और 'टाइम' आधार पर खेली जाने वाली विश्व बिलियर्ड्स चैंपिनयनशिप का खिताब दो बार जीता है। उन्होंने यह उपलब्धि 2005 और 2008 में हासिल की थी।
वर्ष 1997 में 11 वर्ष की उम्र में आडवाणी ने बेंगलुरू में आयोजित बी.एस. संपत मेमोरियल टूर्नामेंट में अपने बड़े भाई श्री को हराकर अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई थी। इसके बाद आडवाणी उस समय देश के सबसे प्रतिभाशाली स्नूकर खिलाड़ियों में एक रहे अरविंद सावुर के शार्गिद बन गए।
सावुर और आडवाणी के बीच पिता-पुत्र जैसा रिश्ता कायम हो गया और इसका सीधा फायदा आडवाणी को मिला, जिन्होंने कुछ ही समय में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताएं जीतकर साबित कर दिया कि वह काबिल गुरु के काबिल चेले हैं।
स्विट्जरलैंड में छुट्टियां मना रहे सावुर ने अपने चेले की जीत की खुशी आईएएनएस से बांटते हुए कहा कि वह इस नतीजे से थोड़े हैरान हैं लेकिन उन्हें खुशी है कि उनके शार्गिद ने वह कर दिखाया, जिसकी उससे आस थी।
उपलब्धियों के मामले में आडवाणी ने अपने तमाम पूर्ववर्तियों को काफी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप जीत चुके विल्सन जोंस (1958, 1964), माइकल फरेरा (1877, 1981, 1983), सेठी (1981, 1987, 2001), मनोज कोठारी (1990) और अशोक शांडिल्य (2002) को अपनी महान उपलब्धियों से एक तरह से 'बौना' साबित कर दिया है।
आडवाणी अपनी तमाम कामयाबियों का श्रेय अपनी मां काजल को देते हैं, जिन्होंने 1992 में पति अर्जुन के गुजर जाने के बाद अपने बच्चों को बड़ी मुश्किल हालात में पाला।
वर्ष 2003 में चीन में विश्व स्नूकर खिताब जीतने के बाद आडवाणी ने कहा था, "मेरी मां मेरे लिए सबकुछ है। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसका श्रेय मेरी मां को जाता है।"
इस ऊंचाई पर पहुंचकर आडवाणी की इच्छा सेठी सरीखा हरफनमौला खिलाड़ी और उम्दा इंसान बनने की है। शालीन आडवाणी कहते हैं, "मैं टेबल पर और टेबल से दूर सेठी जैसा इंसान और खिलाड़ी बनना चाहता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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